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राजस्थान के किसान ने रचा इतिहास, 4 साल की मेहनत से 40°C में उगा दिए अंगूर, नई दिल्ली में मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

Desert Grapes Farming Innovation: मारवाड़ के तपते रेगिस्तानी इलाके में एक किसान ने 40°C तापमान में अंगूर उगाकर कृषि क्षेत्र में नई मिसाल कायम की है। सुपका गांव के धर्मपाल चौधरी को उनकी इस अभिनव खेती और मेहनत के लिए भारत गौरव राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया।

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Grapes Cultivation In Marwar

फोटो: AI

Bharat Gaurav National Award To Dharmpal Chaudhary: मारवाड़ के तपते रेगिस्तानी क्षेत्र में जहां पारंपरिक खेती भी मौसम की मार झेलती है, वहां सुपका गांव के युवा किसान धर्मपाल चौधरी ने अंगूर की सफल खेती कर नया इतिहास रच दिया है। उनकी इसी अभिनव कृषि पहल और मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। नई दिल्ली स्थित संविधान क्लब में आयोजित समारोह में धर्मपाल चौधरी को भारत गौरव राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में भारत सरकार के एमएसएमई डायरेक्टर हरीश चंद्र, संयुक्त राष्ट्र असेंबली सदस्य शशि कुमार, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसडर ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष डॉ. अविनाश सुकुंडे सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस सम्मान ने न केवल किसान का मनोबल बढ़ाया है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गया है।

धर्मपाल चौधरी ने बताया कि मरुस्थलीय क्षेत्र में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बीच अंगूर की खेती करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। उन्होंने पौधों को तेज गर्मी और लू से बचाने के लिए पारंपरिक जूट की बोरियों का उपयोग कर कृत्रिम छांव तैयार की।

इसके साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति, नियमित निगरानी और सटीक देखभाल को अपनाया, जिससे पौधे सुरक्षित रहे और बेहतर उत्पादन देने लगे। लगातार चार वर्षों की मेहनत के बाद अब उनके बाग में अंगूर के गुच्छे लहलहा रहे हैं। अंगूर के साथ उन्होंने सीताफल, पपीता, अनार और अमरूद की खेती में भी सफलता हासिल की है, जिससे उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

युवाओं और किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

धर्मपाल चौधरी की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और नवाचार के जरिए मरुस्थल में भी बागवानी खेती को सफल बनाया जा सकता है। उनकी उपलब्धि अब क्षेत्र के किसानों को पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर नई संभावनाएं तलाशने की प्रेरणा दे रही है। साथ ही यह उदाहरण दिखाता है कि यदि मेहनत और वैज्ञानिक सोच को अपनाया जाए तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी कृषि को लाभकारी बनाया जा सकता है।