
कव्वाली में गूंजे सूफियाना कलाम, मेले में उमड़ी भीड़; व्यवस्थाओं में सहयोग देने वाले सिख समाज का सम्मान
नागौर. हजरत सूफी हमीदुद्दीन चिश्ती नागौरी रहमतुल्लाह अलैह का 775वां उर्स शुक्रवार को कुल की रस्म के साथ संपन्न हुआ। असर की नमाज के बाद दरगाह में कुल की रस्म अदा की गई। इससे पहले जुम्मे की नमाज के बाद महफिलखाने में कव्वाली की महफिल सजी, जिसमें कव्वालों ने सूफी साहब की शान में कलाम पेश किए। उर्स के अंतिम दिन दरगाह और मेला मैदान में जायरीन की भीड़ रही। रस्म पूरी होने के साथ ही बाहर से आए जायरीन की घर वापसी शुरू हो गई। दरगाह कमेटी अध्यक्ष हाजी शमशेर खान ने बताया कि कुल की रस्म के दिन जुम्मे की नमाज में बड़ी संख्या में नमाजी शामिल हुए। नमाज से पहले मस्जिद में हुई तकरीर में उलेमाओं ने सूफी साहब की शिक्षाओं पर चलने, जरूरतमंदों की मदद करने और सभी धर्मों का सम्मान करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे दूसरे धर्म के लोगों को परेशानी हो। सूफी साहब की जिंदगी त्याग, एकता और भाईचारे की सीख देती है। कुल की रस्म के दौरान दरगाह के मेला मैदान में बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचे। लोगों ने दुकानों पर खरीदारी की और बच्चों ने झूलों का आनंद लिया। सोहन हलवे की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही रही। जायरीन ने घरों और रिश्तेदारों के लिए सोहन हलवा पैक करवाया। दरगाह में जायरीन मजार पर मन्नतों के धागे बांधकर दुआएं मांगते नजर आए। नगर परिषद के उपसभापति शरीफ कुरैशी की ओर से लंगर की व्यवस्था की गई।
सिख समाज और सहयोगियों का सम्मान
उर्स के दौरान लंगरखाने सहित विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाएं संभालने वाले पंजाब से आए सिख समाज के लोगों का दरगाह कमेटी ने सम्मान किया। अध्यक्ष हाजी शमशेर खान ने उनके सहयोग की सराहना की। सिख समाज के प्रतिनिधियों ने भी जरूरत पडऩे पर सहयोग का भरोसा दिलाया। दावते इस्लामी के कार्यकर्ताओं ने उर्स के दौरान व्यवस्थाएं संभालीं। अंतिम दिन हाजी अमजद अत्तारी और हाजी एजाज अत्तारी सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान अली शेर खान, चैतराम भादू, डॉ. राजदीप, अशोक शर्मा, जगदीश टांडी, दिनेश मिर्धा, सुरेंद्र बेड़ा, नवीन भाकल, डॉ. लेखा मील, पोकर राम, रविन्द्र व विनय सहित अन्य सहयोगियों का सम्मान किया गया।
नागौर में 775वें उर्स के अंतिम दिन दरगाह के मेला मैदान में उमड़े जायरीन।