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दिनेश कुमार स्वामी@ नागौर. एक दशक पहले साल 2015 में प्रदेश में मतपत्र से अंतिम चुनाव हुए। इसके बाद मतपेटी की जगह ईवीएम ने ले ली और मतदान कराने वाली पोलिंग पार्टिंयों को भी राहत मिल गई। उन्हें रातभर जागकर पांच दिन काम करने की हार्ड वर्किंग से नहीं गुजरना पड़ता और ईवीएम से घंटों और मैनुअल प्रक्रिया तकनीक से तुरंत संभव हो गई। अब फिर सरपंच व वार्ड पंच के चुनाव में हाथ से तैयार मतपत्र से मतपेटी में वोट डलवाने और मतदान के बाद एक-एक मतपत्र की गिनती वाली पुरानी प्रक्रिया पर लौट आए है। वोटर को भले ईवीएम की जगह मतपत्र से मतदान में खास फर्क नहीं पड़े, लेकिन मतदान कराने में लगी पोलिंग पार्टियों के लिए मतपत्र से मतदान और मतगणना पसीना छुड़ाने वाली स्थिति से कम नहीं है।
पंचायत चुनाव के लिए मतदान दलों के कार्मिकों का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। जिले की 347 ग्राम पंचायतों में दो चरण में चुनाव होंगे। पहले चरण में 196 ग्राम पंचायतों के सरपंचों और उनके 1950 वार्ड पंच तथा 120 पंचायत समिति सदस्यों व जिला परिषद सदस्यों काे चुना जाएगा। दूसरे चरण में 151 ग्राम पंचायतों के सरपंच और 91 पंस. सदस्य तथा 1479 वार्ड पंच निर्वाचित होंगे। दोनों चरणों में सभी 12 पंचायत समिति के 11 लाख 70 हजार 201 मतदाता शामिल होने हैं।
जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्य के लिए ईवीएम से वोटिंग के बाद ग्राम पंचायत सरपंच, वार्ड पंच के लिए वोटिंग मतपत्र के माध्यम से मतपेटी में कराई जाएगी। ऐसे में जिले में दोनों चरण में शामिल प्रत्येक मतदाता के लिए दो मतपत्र तैयार किए जाएंगे। एक पर सरपंच के प्रत्याशी के नाम और चुनाव चिन्ह रहेंगे, जबकि दूसरे पर वार्ड पंच के लिए। यानि मतदान कर्मियों को कुल 23 लाख से अधिक मतपत्र हाथ से तैयार करने होंगे, जिन्हें मतदान के दिन मतदाता को दिए जाने है।
पहले चरण के चुनाव की पोलिंग पार्टियां 21 अक्टूबर को ग्राम पंचायत मुख्यालय पर बने 745 पोलिंग बूथों पर पहुंचेगी। अगले दिन 22 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक जिप. व पंस. सदस्य के लिए ईवीएम से वोटिंग होगी। देर शाम दो मतदान कार्मिक पुलिस सुरक्षा में ईवीएम को पंचायत समिति मुख्यालयों पर बने स्ट्रॉंग रूम में जमा कराने जाएंगे और रात में ही पंचायत मुख्यालय पर लौट आएंगे।
अगले दिन 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से सरपंच और वार्ड पंच के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन पत्रों की जांच, नामवापसी का कार्य दोपहर 2 बजे तक चलेगा, फिर प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह का आवंटन करते-करते शाम के 4 बज जाएंगे। इसके बाद सभी मतदान कर्मी सरपंच व वार्ड पंच के लिए मतदान कराने की तैयारी में जुटेंगे और हाथ से प्रत्याशी का नाम लिखकर मतपत्र को तैयार करेंगे। पहले चरण में 23 अक्टूबर की रात में कुल 6 लाख 49 हजार 699 वोटरों के लिए 13 लाख मतपत्र तैयार करने होंगे। जिसका उपयोग अगले दिन 24 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से सरपंच व वार्ड पंच के लिए मतदान के लिए किया जाएगा। शाम 6 बजे मतदान सम्पन्न होने के बाद मतगणना शुरू होगी। सभी 13 लाख मतपत्रों को पेटियों से निकाल कर मतगणना कर्मी गिनेंगे और चुनाव परिणाम घोषित करेंगे, यह कार्य देर रात तक चलेगा।
अगले दिन 25 अक्टूबर को ग्राम पंचायत मुख्यालय पर ही उप सरपंच का निर्वाचन होगा। उप सरपंच का चुनाव वार्ड पंच करते है। ऐसे में यह कार्य दोपहर तक आसानी से पूरा हो जाएगा और पांचवें दिन पोलिंग पार्टियां चुनाव कार्य से मुक्त होगी।
वोटरों की तादाद के अनुसार सरपंच व वार्ड पंच के लिए चुनाव चिन्ह छपे खाली मतपत्र उपलब्ध होंगे। पोलिंग पार्टियों को एक-एक मतपत्र पर चुनाव चिन्ह के सामने संबंधित सरपंच प्रत्याशी का नाम अपने हाथ से लिखना होगा। यानि यदि सरपंच के लिए पांच प्रत्याशी है तो पांचों का नाम साफ लिखाई में लिखना होगा और सबसे अंत में नोटा का स्टीकर चिपकाना होगा। शेष नीचे खाली रहे मतपत्र को फाड़कर हटाया जाएगा। यही प्रक्रिया वार्ड पंच के मतपत्र को तैयार करने में दोहराई जाएगी। प्रत्येक वोटर को वोटिंग के समय यह दोनों मतपत्र मिलेंगे। यानि जिले के 11.70 लाख ग्रामीण वोटरों के लिए प्रत्याशियों के नाम लिखे 23 लाख मतपत्रों की जरूरत होगी।
पोलिंग पार्टियों के कामकाज का देखे तो यह काफी भारी भरकम दिखता है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 15 कार्मिकों का दल होगा। एक-एक आरओ अलग से होंगे। करीब साढ़े पांच हजार कार्मिक 23 लाख मतपत्र तैयार करेंगे। औसत एक कार्मिक को 400 मतपत्र पर प्रत्याशी के नाम लिखने होंगे। समय शाम 4 बजे से अगले दिन सुबह 7 बजे तक रातभर का रहेगा। मौटे तौर पर दो मिनट में एक मतपत्र तैयार होगा। फिर मतदान के बाद एक-एक कर इन्हीं मतपत्रों को गिनना भी होगा, यानि अगली आधी रात भी आंखों में कटेगी।
मतदान कार्मिकों को बारीकी से प्रशिक्षण दे रहे है। सरपंच व वार्ड पंच के चुनाव में से प्रत्याशियों के नाम लिखकर मतपत्र तैयार करने की पुरानी व्यवस्था ही रहेगी। यह थोड़ी हार्ड जरूर है लेकिन प्रशिक्षित कार्मिक को परेशानी नहीं आएगी। पांच दिन की चुनावी ड्यूटी भी कार्मिकों के लिए गर्व का पल होता है।
- मानाराम पचार, चुनाव प्रशिक्षक प्रभारी नागौर
Updated on:
12 Oct 2026 01:04 pm
Published on:
12 Oct 2026 01:04 pm
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