नागौर

न काम हुआ और न ही मॉनिटरिंग : निरीक्षण ही नहीं होगा तो कैसे सुधरेगी व्यवस्था, नागौर की हालत सबसे खराब

जीएसएस मॉनिटरिंग ऐप लागू, लेकिन कई जिलों में पूरे साल दहाई तक नहीं पहुंचा निरीक्षण, नागौर में सिर्फ सात बार हुई जांच
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Jul 21, 2026
अमरपुरा के जीएसएस में उगी झाडि़यां
अमरपुरा के जीएसएस में उगी झाडि़यां

नागौर. प्रदेश में ग्रिड सब स्टेशनों (जीएसएस) के संचालन, अनुरक्षण और निगरानी को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया जीएसएस मॉनिटरिंग मोबाइल एप्लीकेशन कागजों में तो प्रभावी नजर आता है, लेकिन धरातल पर इसकी तस्वीर बिल्कुल अलग है। विधानसभा में ऊर्जा विभाग की ओर से दिए गए जवाब से सामने आया है कि कई जिलों में पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान निरीक्षण की संख्या इतनी कम रही कि व्यवस्था की वास्तविक मॉनिटरिंग पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में यह भी बड़ा सवाल है कि जब नियमित निरीक्षण ही नहीं होंगे तो जीएसएस पर मौजूद तकनीकी खामियां कैसे दूर होंगी और हादसों पर कैसे रोक लगेगी।

अजमेर डिस्कॉम की स्थिति सबसे चिंताजनक

सबसे चिंताजनक स्थिति अजमेर डिस्कॉम के अधीन आने वाले जिलों की रही है। पूरे डिस्कॉम में 14 वृत्त होने के बावजूद वर्षभर में केवल 512 निरीक्षण किए गए। यानी प्रति वृत्त औसतन मात्र 36 निरीक्षण। नागौर जिले में पूरे साल केवल सात निरीक्षण किए गए। राजसमंद में 10, सलूम्बर में 11, ब्यावर में 12, उदयपुर व भीलवाड़ा में 13-13 निरीक्षण हुए। कई जिलों में तो ऐसे महीने भी रहे, जिनमें एक भी जीएसएस का निरीक्षण ऐप के माध्यम से नहीं किया गया।

जोधपुर डिस्कॉम में भी स्थिति संतोषजनक नहीं रही। बाड़मेर में पूरे साल केवल एक निरीक्षण हुआ, जबकि जालोर में चार और जैसलमेर में छह निरीक्षण किए गए। इसके विपरीत पाली जिले में 230 निरीक्षण दर्ज किए गए, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। वहीं जयपुर डिस्कॉम ने 18 वृत्तों में 1874 निरीक्षण कर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि जोधपुर डिस्कॉम के नौ वृत्तों में 495 निरीक्षण हुए।

निरीक्षण के प्रमुख बिंदु

- सब-स्टेशन उपकरणों की स्थिति

- सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और कार्यशीलता

- सिविल सुविधाओं की स्थिति (जैसे भवन, शौचालय, जल व्यवस्था आदि)

- पावर ट्रांसफार्मर की कार्यक्षमता और रखरखाव स्थिति

एप्लीकेशन के लाभ

- सुधारात्मक कार्यवाही की सुविधा।

- दर्ज किए गए निरीक्षण डेटा के आधार पर अधिकारी त्वरित सुधारात्मक निर्णय ले सकते हैं।

- बिजली आपूर्ति की दक्षता में सुधार।

- समय पर निरीक्षण और कार्यवाही से सब-स्टेशन की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है।

- पारदर्शिता और जवाबदेही।

- हर निरीक्षण डिजिटल रूप से दर्ज होता है, जिससे प्रक्रिया ट्रैक योग्य और उत्तरदायी बनती है।

- यह एप्लीकेशन डिस्कॉम की निगरानी प्रणाली को आधुनिक बनाता है और उपभोक्ता सेवा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाता है।

सरकार का दावा फेल

विधानसभा में विधायक पुष्पेन्द्र सिंह के प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया कि डिस्कॉम की ओर से विकसित जीएसएस मॉनिटरिंग एप्लीकेशन के माध्यम से अधिकारी किसी भी सब स्टेशन का निरीक्षण कर उपकरणों की स्थिति, सुरक्षा व्यवस्था, सिविल सुविधाएं, पावर ट्रांसफार्मर की कार्यक्षमता तथा अन्य तकनीकी बिंदुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर सकते हैं। सरकार का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई संभव होगी, लेकिन निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की उदासीनता ने सब पर पानी फेर दिया।

धरातल पर हालात खराब, हो रहे हादसे

सरकार का दावा भले कुछ भी हो, जमीनी हालात इन दावों से मेल नहीं खाती। प्रदेश में ठेके पर संचालित अधिकांश जीएसएस पर वीसीबी, ब्रेकर, जम्पर, सिलिका जेल, रोटरी स्विच और अन्य सुरक्षा उपकरणों की कमी लंबे समय से बनी हुई है। कई स्थानों पर तार टूटने के बाद भी समय पर बिजली आपूर्ति बंद नहीं होने से हादसे होते रहे हैं। यदि ऐप पर नियमित निरीक्षण दर्ज ही नहीं होंगे तो इन खामियों की पहचान और समय पर मरम्मत की प्रक्रिया भी प्रभावित होना स्वाभाविक है।

तथ्य जो सवाल खड़े करते हैं

- जयपुर डिस्कॉम : 18 वृत्त, 1874 निरीक्षण- जोधपुर डिस्कॉम : 9 वृत्त, 495 निरीक्षण

- अजमेर डिस्कॉम : 14 वृत्त, 512 निरीक्षण

- नागौर जिला : पूरे साल केवल 7 निरीक्षण

- बाड़मेर जिला : 1 निरीक्षण

- जालोर जिला : 4 निरीक्षण

- जैसलमेर जिला : 6 निरीक्षण

- पाली जिला : 230 निरीक्षण (प्रदेश में सर्वाधिक)

पत्रिका व्यू.... बड़ा सवाल यह है

सरकार ने जीएसएस मॉनिटरिंग एप्लीकेशन को बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का आधुनिक माध्यम बताया है, लेकिन जब कई जिलों में पूरे साल निरीक्षण की संख्या एक अंक या दहाई तक ही सीमित रहे, तो यह तकनीक व्यवस्था सुधारने का माध्यम बनेगी या केवल औपचारिकता? बिजली तंत्र की सुरक्षा और उपभोक्ताओं की जान-माल से जुड़े इस सवाल का जवाब अब केवल ऐप नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक और नियमित मॉनिटरिंग ही दे सकती है। ऊर्जा विभाग ने यह भी बताया कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली कमियों के आधार पर पावर ट्रांसफार्मर में ऑयल भरना, खराब ब्रेकर बदलना, जम्पर दुरुस्त करना, सिलिका जेल बदलना, रोटरी स्विच की मरम्मत तथा सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने जैसी कार्रवाई की जाती है। लेकिन निरीक्षणों की बेहद कम संख्या यह संकेत देती है कि इन सुधारात्मक कार्यों का दायरा भी सीमित रह गया है।

अधिकारियों को पाबंद किया है

अधिकारियों को पाबंद किया है। जीएसएस मॉनिटरिंग मोबाइल एप्लीकेशन से पिछले साल लक्ष्य के अनुरूप निरीक्षण नहीं होना गंभीर है। अजमेर डिस्कॉम के अधिकारियों की बैठक लेकर सभी को नियमित निरीक्षण करने के लिए पाबंद किया है। आगे से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

- एमसी बाल्दी, मुख्य अभियंता, अजमेर, डिस्कॉम।

Updated on:
21 Jul 2026 10:33 am
Published on:
21 Jul 2026 10:33 am