
नागौर. विभाग ने भले ही प्रदेश भर में वाहन प्रदूषण जांच केन्द्रों को ऑनलाइन कर दिया हो लेकिन नागौर में आज भी कई केन्द्र ऑफ लाइन संचालित किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि राजस्थान मोटरयान प्रदूषण जांच केन्द्र योजना (ऑनलाइन-2017) के अंतर्गत परिवहन विभाग ने अपे्रल से सभी जिलों में स्थापित प्रदूषण जांच केन्द्रों को ऑनलाइन नेटवर्किंग से जोड़कर केवल ऑनलाइन प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र देने की व्यवस्था की है। इसके बावजूद नागौर परिवहन कार्यालय के आसपास संचालित केन्द्र ऑफ लाइन व पुरानी तिथि में प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं।
चूक पर चुकाना होगा जुर्माना
परिवहन आयुक्त व अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेन्द्र अग्रवाल ने 4 अप्रेल 2018 को एक आदेश जारी कर सभी केन्द्रों को ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी करने व ऑफ लाइन प्रमाण पत्र के लिए जारी स्टेशनरी जमा संबंधित कार्यालयों में जमा करवाने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वाहन मालिकों को ऑनलाइन प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र के स्थान पर ऑफलाइन प्रमाण पत्र थमाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि प्रमाण पत्र की निर्धारित वैद्यता समाप्त होने के बाद तय समय पर नवीनीकरण नहीं करवाने वाले वाहन मालिक से सरकार जुर्माना भी वसूलेगी। निर्धारित फीस के साथ उसे जुर्माना राशि भी जमा करानी होगी।
मोबाइल पर मिलेगी जानकारी
जुर्माना राशि का भुगतान वाहन मालिकों की ओर से ई-ग्रास के जरिए मित्र, नेट बैंकिंग से परिवहन विभाग के राजस्व मद में प्रदूषण मद में जमा करवाए जाने का प्रावधान है। वाहन प्रदूषण जांच केन्द्रों के ऑनलाइन होने से वाहनों का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन दर्ज हो रहा है। इससे पता लग जाता है कि कौन से वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र नहीं बना है। वाहन मालिक जांच केन्द्र पर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन करेगा। उसके मोबाइल पर एसएमएस आएगा। प्रमाण पत्र बनने की जानकारी भी मोबाइल पर एसएमएस से मिलेगी। प्रमाण पत्र की वैद्यता अवधि समाप्त होने की जानकारी भी वाहन मालिक के मोबाइल पर एसएमएस मिलेगी।