Ramdev Pashu Mela : राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेले में सोमवार को राज्य के विभिन्न जिलों से 900 से ज्यादा पशु पहुंचे। अब तक मेला मैदान में पहुंचने वाले पशुओं में सर्वाधिक संख्या गोवंशों की है। पशु मेला शुरू होने के तीसरे दिन भी नागौरी बैल की आवक ज्यादा रही।
Ramdev Pashu Mela : राज्य स्तरीय रामदेव पशु मेले में सोमवार को राज्य के विभिन्न जिलों से 900 से ज्यादा पशु पहुंचे। अब तक मेला मैदान में पहुंचने वाले पशुओं में सर्वाधिक संख्या गोवंशों की है। पशु मेला शुरू होने के तीसरे दिन भी नागौरी बैल की आवक ज्यादा रही। मेले में 50 हजार से लेकर तीन लाख तक के बैलों की जोड़ी आई है।
चमकदार सींग के साथ सजी-धजी नागौरी बैलों की जोड़ियां पशुपालकों व व्यापारियों को आकर्षित कर रही हैं। इनकी खरीद-फरोख्त के लिए महाराष्ट्र के औरंगाबाद, पंजाब एवं उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर से व्यापारी मेले में आने लगे हैं। भड़ाना गांव से आए दशरथ ने बताया कि नागौरी बैल भार वाहन क्षमता में बेहतर होने के साथ ही दौड़ में भी इनका प्रदर्शन काफी शानदार रहता है। उसके बैलों की उम्र महज तीन साल है। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. मूलाराम जांगू ने बताया कि मेले में अब तक 3072 पशु पहुंच चुके हैं। इनमें गोवंश-1652, भैंसवंश-32, ऊंट-1310, अश्व वंश-78 शामिल हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम आज से
रामदेव पशु मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मंगलवार से शुरुआत होगी। जिला परिवहन एवं अंबुजा के संयुक्त तत्वावधान में सड़क सुरक्षा जागरुकता संध्या का आयोजन किया जाएगा। इसमें पशुपालकों व आमजन को संगीत, नृत्य, नाटक के माध्यम से सड़क सुरक्षा नियमों तथा सड़क पर चलते समय रखी जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
तीन वर्ष से कम उम्र के बैलों के परिवहन से रोक हटाए सरकार
पशुपालक ठाकरराम, जगदीश ने बातचीत में खासी निराशा जताई। इनका कहना था कि राज्य सरकार को तीन वर्ष से कम उम्र के बैलों को दूसरे प्रदेशों में ले जाने पर रोक को हटानी चाहिए। इस रोक की वजह से पशु पालकों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ठाकराम ने बताया कि वह पिछले कई सालों से लगातार मेले में आ रहा है। इनसे पहले पिता आते थे। अब वह खुद नागौरी नस्ल के गोवंश को लेकर आते हैं। पहले मेला काफी भरा रहता था। लोगों को चलने तक में संघर्ष करना पड़ता था। अब ऐसी स्थिति नहीं है। नागौर डेयरी दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष जीवणराम ने बताया कि वह तो मेले में पशु पालकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानने के लिए आए थे। ज्यादातर पशु पालकों का कहना है कि राज्य सरकार की ओर से तीन वर्ष से कम उम्र के बैलों के परिवहन पर लगाई गई रोक के कारण के नागौरी नस्ल के गोवंश के अस्तित्व का खतरा उत्पन्न हो गया है।