पोर्टल की खामी से नागौर के किसान परेशान, सात दिन बाद भी पंजीकरण अटका, एमएसपी पर खरीद के लिए सरसों के साथ रायड़ा का विकल्प नहीं होने से नहीं कट पा रहे टोकन, सहकारी समितियां के उप रजिस्ट्रार ने राजफैड के प्रबंध निदेशक को लिखा पत्र
नागौर. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों खरीद के लिए पंजीकरण प्रक्रिया में तकनीकी खामी के कारण जिले के हजारों किसान परेशान हैं। पोर्टल पर ‘सरसों’ के साथ स्थानीय नाम ‘रायड़ा’ का विकल्प नहीं होने से किसान पंजीकरण नहीं करा पा रहे हैं। खास बात यह है कि समस्या सामने आने के सात दिन बाद भी राजफैड के अधिकारियों ने इसमें सुधार नहीं करवाया है।
सहकारी समितियां नागौर के उप रजिस्ट्रार संजय पैगोरिया ने 20 मार्च को राजफैड के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर इस गंभीर समस्या से अवगत कराया था। उन्होंने पत्र में बताया कि जिले की विभिन्न तहसीलों में राजस्व विभाग की ओर से ऑनलाइन गिरदावरी के दौरान सरसों की फसल को स्थानीय भाषा में ‘रायड़ा’ के रूप में दर्ज किया गया है। लेकिन राजफैड के पंजीकरण पोर्टल पर केवल ‘सरसों’ का ही विकल्प उपलब्ध है। इससे किसानों को टोकन जारी नहीं हो पा रहे हैं।
उप रजिस्ट्रार ने राजफैड के एमडी को यह भी बताया कि इस संबंध में उन्होंने 17 मार्च को उनसे व्यक्तिगत मिलकर जानकारी दी थी, लेकिन अब तक इस समस्या का समाधान नहीं किया गया है। पोर्टल पर ‘सरसों’ के साथ ‘रायड़ा’ का विकल्प भी जोड़ा जाए, ताकि किसान आसानी से पंजीकरण कर सकें और एमएसपी पर अपनी उपज बेच सकें।
गौरतलब है कि राजस्थान पत्रिका ने गत 17 मार्च को ‘पोर्टल पर केवल सरसों का विकल्प, पटवारियों ने गिरदावरी में लिखा रायड़ा’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया था, जिसके बाद स्थानीय अधिकारी ने उच्चाधिकारियों को पत्र लिख दिया, लेकिन किसानों की समस्या का समाधान अब तक नहीं हुआ है।
आय पर असर
इस तकनीकी खामी का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। टोकन नहीं कटने से किसान अपनी उपज को सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं बेच पाएंगे और उन्हें खुले बाजार में कम दाम पर फसल बेचने की मजबूरी हो रही है। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
जिले में सरसों (रायड़ा) व चने की बुआई का क्षेत्रफल व अनुमानित उत्पादन
चना बुआई - 61,171 हैक्टेयर
उत्पादन- 62577 मीट्रिक टन
सरसों बुआई - 60724 हैक्टेयर
उत्पादन- 82159 मीट्रिक टन
कुल उत्पादन का करीब 25 प्रतिशत ही एमएसपी पर खरीदा जाना है। ऐसे में यदि समय रहते पोर्टल की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में किसान सरकारी खरीद प्रक्रिया से वंचित रह सकते हैं। प्रशासन और राजफैड से किसान जल्द समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
पोर्टल पर केवल सरसों विकल्प, पटवारियों ने गिरदावरी में लिखा रायड़ा
नागौर जिले सहित प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना अन्तर्गत चना एवं सरसों खरीद के लिए पंजीयन 15 मार्च से प्रारम्भ कर दिया है, लेकिन जिले में सरसों की बिक्री के लिए पंजीकरण करवाने वाले किसानों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। ई-मित्र संचालकों व किसानों ने बताया कि सोमवार को जब पोर्टल पर सरसों के लिए पंजीकरण करने लगे तो ऑनलाइन गिरदावरी में रायड़ा लिखा होने से टोकन नहीं कट पाए। किसानों ने बताया कि जिले के पटवारियों ने गिरदावरी में फसल का नाम रायड़ा लिखा है, लेकिन पंजीकरण के लिए पोर्टल पर फसल का नाम सरसों आ रहा है। इसके चलते पंजीकरण नहीं हो रहा है। अजासर के किसान प्रेमाराम मड़ासिया ने पटवारियों से बात भी की, लेकिन उन्होंने बताया कि इस समस्या का समाधान जयपुर स्तर से होगा। उन्होंने राजफैड को पत्र लिख दिया है। ई-मित्र संचालकों ने बताया कि पोर्टल पर ‘फसल चुनें ऑप्शन’ में सिर्फ सरसों लिखा हुआ है और गिरदावरी में रायड़ा लिखा होने के कारण टोकन नहीं कट रहे हैं। इस बार गिरदावरी पोर्टल से ऑटोमैटिक ली जा रही है। गौरतलब है कि रायड़ा और सरसों एक ही फसल है।