
नावां की एक नमक रिफाइनरी में पसरा सन्नाटा। फोटो पत्रिका
Salt industry : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमरीका इजराइल-ईरान के बीच चल रही जंग का असर अब देश के नमक उद्योग पर भी नजर आने लगा है। नमक पैकिंग में उपयोग होने वाली प्लास्टिक थैलियां, बारदाना, टी-एसडीपी बैग, जे-बीओपीपी बैग और एलडी (पीपी पाउच) की कमी से नमक सप्लाई कार्य प्रभावित हो रहा है।
पेट्रोलियम पदार्थों की कमी से प्लास्टिक कच्चे दानों का उत्पादन नहीं होने के कारण पैकिंग सामग्री महंगी हो गई है। साथ ही मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही है। प्लास्टिक पैकिंग सामग्री की कीमतों में करीब 35 प्रतिशत बढ़ोतरी होने से उत्पादन की लागत बढ़ गई है। इससे नमक उद्योग से जुड़े व्यापारी और रिफाइनरी संचालक परेशान हैं।
राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु की लगभग 90 नमक रिफाइनरियां प्लास्टिक पैकिंग उत्पादों की कमी से जूझ रही हैं। इससे बाजार में नमक आपूर्ति ठहर सी गई है। इस वक्त नमक कारोबारी दोहरी मार झेल रहे हैं। पैकिंग उत्पादों के कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई हैं, दूसरी ओर श्रमिकों की कमी ने नमक उत्पादन के लिए संकट खड़ा कर दिया है।
नमक उद्यमी राजेश गोयल ने बताया कि मार्च से नमक का सीजन शुरू होता है। इस दौरान करीब 100 टन पैकिंग मटेरियल की आवश्यकता रहती है। लेकिन मुश्किल से 10 टन मटेरियल उपलब्ध हो रहा है। इससे माल की ढुलाई बाधित है। राजस्थान की 30, गुजरात की 50 और तमिलनाडु के तुतिकोरिन (थूथुकुडी) की 10 नमक रिफाइनरियां इस संकट से जूझ रही हैं।
युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की कमी होने से प्लास्टिक पैकिंग सामग्री तैयार करने के काम में आने वाले कच्चे दानों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे पैकिंग सामग्री महंगी होने के साथ मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही। सप्लाई चेन प्रभावित होने के साथ नमक के लदान की प्रक्रिया भी बाधित हुई है। प्रदेश में करोड़ों रुपए का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
अनिल गट्टाणी, अध्यक्ष, राजस्थान नमक रिफाइनरी एसोसिएशन, नावां शहर
युद्ध के कारण कोयला मिलने में भी समस्या आ रही है। ऐसे में रिफाइनरियों पर नमक पैकिंग से लेकर लदान तक में समस्या है। गुजरात का नमक व्यापार पूरी तरह प्रभावित है।
पारसमल नाहटा, उपाध्यक्ष, गुजरात रिफाइंड नमक निर्माता कल्याण संघ
Updated on:
23 Mar 2026 11:40 am
Published on:
23 Mar 2026 11:11 am
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