
नागौर. शहर के सेंट एंसलम स्कूल के पास ताऊसर रोड रेलवे फाटक पर मंगलवार सुबह एक छात्रा में ट्रेन के आगे आकर आत्महत्या कर ली। दुर्घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया, जहां परिजनों की उपस्थिति में पोस्टमार्टम करवाया गया।
कोतवाली थानाधिकारी सुरेन्द्रसिंह जोधा ने बताया कि नागौर के फिड़ौद निवासी राजेश जाखड़ की 15 वर्षीय पुत्री मोनिका जाखड़ शहर के दीप कॉलोनी में अपनी मां व भाई के साथ रह रही थी। मंगलवार सुबह मोनिका घर से मोटरसाइकिल लेकर निकली तथा सेंट एंसलम स्कूल के पास रहने वाले अपने रिश्तेदार के घर मोटरसाइकिल खड़ी कर बोली कि वह वापस आ रही है, मोटरसाइकिल उसका भाई ले जाएगा। इसके बाद वह स्कूल के पास ताऊसर फाटक पर पहुंची तथा करीब सवा 9 बजे जैसे ही भटिंडा-जोधपुर ट्रेन आई, उससे पहले पटरियों के बीच जाकर बैठ गई। पटरियों के बीच बैठने से पहले मोनिका ने अपना मोबाइल व चप्पल एक तरफ रखे। हालांकि गेटमेन ने उसे देखा तो बचाने दौड़ा, लेकिन तब तक ट्रेन ने उसे चपेट में ले लिया।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी पहुंचाया तथा पोस्टमार्टम के बाद शव उसके परिजनों को सुपुर्द किया। पुलिस का कहना है कि छात्रा के माता-पिता अलग-अलग रहते हैं।
घर का रास्ता भटकी आलिया व मुमताज को एएचटी ने परिजनों से मिलाया
नागौर. घर का रास्ता भटकी दो अबोध बालिकाओं को रोता देख खाई की गली में फर्नीचर की दुकान करने वाले व्यवसायी अजय पारीक ने उन्हें कारण पूछा तो एक बालिका ने रोते हुए बताया कि उसे मम्मी के पास जाना है। मोहल्ले व मोबाइल नम्बर पूछने पर बालिका कुछ भी बता नहीं सकी, बल्कि और जोर से रोने लगी।
इस पर उसे चॉकलेट देकर राजी किया तथा पिता का नाम पूछा तो उसने आरीफ बताया, लेकिन मोहल्ले का नाम नहीं बता पाई। काफी मशक्कत के बावजूद जब बालिकाओं के परिजनों का पता नहीं चला तो व्यवसायी नरेन्द्र पारीक ने मानव तस्करी विरोध यूनिट के कांस्टेबल मुकेश को फोन कर पूरी घटना बताई, जिस पर यूनिट हैड कांस्टेबल बंशीलाल के नेतृत्व में कांस्टेबल मुकेश, मेहराम चौधरी, सरमा जाट मौके पर पहुंचे तथा बालिकाओं को राजी कर परिजनों के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया। छह घंटे बाद मिले परिजनएएचटी की टीम ने देखा कि बालिकाओं की उम्र लगभग 3 वर्ष व 4 वर्ष थी। टीम ने बालिकाओं से नाम-पता पूछा तो एक ने अपना नाम आलिया व दूसरी ने अपना नाम मुमताज बताया, लेकिन निवास स्थान का पता बताने में असमर्थ रहीं। इस पर हैड कांस्टेबल बंशीलाल ने कांस्टेबल मुकेश व मेहराम व सूचना देने वाले नरेन्द्र पारीक को शहर में बालिकाओं के माता-पिता की तलाश के लिए भेजा, उन्होंने शहर कई जगह पूछताछ की। इसी दौरान बालिकाओं के परिजन भी उनकी तलाश करते हुए मिल गए। पुलिसकर्मियों ने बालिकाओं की फोटो दिखाकर तस्दीक करवाई। जिस पर परिजनों को बालिकाओं के पास ले गए, माता रूखसाना व पिता आरीफ को देखकर बालिकाएं काफी खुश हुई। माता-पिता ने भी राहत की सांस ली। एएचटी टीम ने बालिकाओं व परिजनों के दस्तावेज तस्दीक कर बालिकाओं को माता-पिता को सुपूर्द कर दिया।