नागौर

सख्ती के साए में SI भर्ती परीक्षा, कम रही उपस्थिति; ‘टफ पेपर’ ने बढ़ाई अभ्यर्थियों की चिंता

कड़ी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्थाओं के बीच आयोजित एसआई भर्ती परीक्षा में इस बार अभ्यर्थियों की उपस्थिति 60 प्रतिशत से कम रही। त्रिस्तरीय जांच, डिजिटल लॉक सिस्टम और सख्त नियमों के बीच परीक्षा शांतिपूर्वक संपन्न हुई, लेकिन कठिन प्रश्नपत्र ने अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी

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Apr 05, 2026
परीक्षा देने के बाद केन्द्र के बाहर प्रश्नों को लेकर चर्चा करती महिला अभ्यर्थी

नागौर. राजस्थान लोक सेवा आयोग की उप निरीक्षक/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2025 इस बार कड़ी निगरानी, सख्त सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्थाओं के बीच आयोजित की गई। रविवार को नागौर जिले के 18 परीक्षा केंद्रों पर दो पारियों में हुई इस परीक्षा में जहां प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया, वहीं अभ्यर्थियों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। कुल 5448 आवंटित अभ्यर्थियों में से पहली पारी में 3254 (59.73 प्रतिशत) और दूसरी पारी में 3235 (59.38 प्रतिशत) अभ्यर्थी ही परीक्षा में शामिल हुए। यानी करीब 40 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा से दूरी बनाई।

परीक्षा केन्द्र में प्रवेश के लिए लगी महिला अभ्यर्थियों की लाइन

इस बार परीक्षा को लेकर प्रशासन और पुलिस ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए। पिछली भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार ‘जीरोटॉलरेंस’ नीति अपनाई गई। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को एक घंटे पहले बुलाकर त्रिस्तरीय जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया। क्यूआर कोड युक्त प्रवेश पत्र, बायोमेट्रिक सत्यापन और फोटो मिलान जैसे उपायों से डमी अभ्यर्थियों पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रयास किया गया।

सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रही कि परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर दायरे में साइबर कैफे और ई-मित्र केंद्रों को बंद रखा गया। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया और ड्रेस कोड का भी सख्ती से पालन कराया गया। महिला अभ्यर्थियों को दुपट्टे तक बाहर रखने पड़े। यहां तक कि परीक्षा केंद्रों पर तैनात कार्मिकों और पुलिसकर्मियों के मोबाइल भी जमा करवा दिए गए, जिससे किसी भी प्रकार की सूचना लीक होने की संभावना समाप्त हो सके।

परीक्षा देने के बाद बाहर आते परीक्षार्थी

प्रश्न पत्रों को डिजिटल लॉक वाले स्टील बॉक्स में परीक्षा शुरू होने से मात्र 30 मिनट पहले केंद्रों तक पहुंचाया गया और खोलने से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड और विजिलेंस टीमें लगातार निरीक्षण करती रहीं, जिससे परीक्षा पूरी तरह नियंत्रण में रही।

हालांकि सख्त व्यवस्थाओं के बीच अभ्यर्थियों के लिए पेपर चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। परीक्षा देकर बाहर निकले कई अभ्यर्थियों ने बताया कि सामान्य ज्ञान (जीके) का पेपर अपेक्षाकृत कठिन था। थांवला से आई अभ्यर्थी सुमन पूनिया ने कहा कि पेपर टफ होने के कारण मेरिट नीचे रहने की संभावना है, जबकि अन्य अभ्यर्थियों का मानना था कि जिनकी तैयारी मजबूत है, उन्हें इसका लाभ मिलेगा।

मेटल डिटेक्टर से जांच के बाद परीक्षा केन्द्र में प्रवेश देते पुलिसकर्मी

परीक्षा के दौरान एक केंद्र पर हल्का विवाद भी सामने आया, जहां वाहन प्रवेश व मोबाइल अंदर ले जाने को लेकर पुलिस और केंद्राधीक्षक के बीच बहस हो गई। हालांकि प्रशासन ने इसे सामान्य गलतफहमी बताते हुए मामला शांत करवा दिया।

एक खास पहलू यह भी रहा कि इस बार परीक्षा केंद्रों पर महिला अभ्यर्थियों की संख्या अधिक नजर आई, जो बदलते सामाजिक परिदृश्य और प्रतियोगी परीक्षाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। कुल मिलाकर, नागौर में आयोजित यह परीक्षा सख्ती, पारदर्शिता और अनुशासन के नए मानक स्थापित करती नजर आई, हालांकि कम उपस्थिति और कठिन पेपर ने अभ्यर्थियों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।

Published on:
05 Apr 2026 07:01 pm
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