31 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Nagaur News: नागौर में अटके फोरलेन, बायपास और फ्लाईओवर फिर चर्चा में, करोड़ों के प्रोजेक्ट्स को रफ्तार की उम्मीद

Nagaur Development Projects: राजस्थान के नागौर जिले में वर्षों से अटकी विकास परियोजनाएं फिर चर्चा के केंद्र में हैं। आमजन की उम्मीदें अब नवनियुक्त जिला कलक्टर से जुड़ गई हैं।
2 min read
Google source verification
gwalior high court to inspect municipal corporation roads

सडकों की जांच करेगी ग्वालियर हाईकोर्ट - Photo: AI-generated

नागौर। राजस्थान के नागौर जिले में वर्षों से अटकी विकास परियोजनाएं फिर चर्चा के केंद्र में हैं। सड़कों से लेकर चिकित्सा, शिक्षा और कृषि आधारित ढांचागत विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट या तो अधूरे पड़े हैं या उनकी रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है। ऐसे हालात में आमजन की उम्मीदें अब नागौर के नवनियुक्त जिला कलक्टर से जुड़ गई हैं। आमजन को अपेक्षा है कि वे इन योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए धरातल पर रफ्तार देंगे।

लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से पूर्व में रहे कलक्टर कोई ठोस विकास कार्य नहीं करवा सके। अधिकांश योजनाएं कागजों या अधूरी स्थिति में है। हालांकि कुछ अधिकारियों ने नवाचार जरूर किया, लेकिन निरंतरता की कमी रही। अब नए कलक्टर देवेन्द्र कुमार के सामने इन रुके हुए कार्यों को आगे बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती है।

फोरलेन और बायपास: यातायात सुधार की कुंजी

नागौर शहर में कृषि मंडी तिराहे से गोगेलाव तिराहे तक फोरलेन सड़क का कार्य लंबे समय से अटका हुआ है। इसके लिए करीब 31 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। इसी तरह नागौर-जोधपुर रोड पर नेतड़ा तक फोरलेन और बीकानेर रोड को लाडनूं रोड से जोड़ने वाला 16 किमी बायपास भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सका है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर सुगम यातायात के साथ व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

खींवसर फ्लाईओवर

नागौर-जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर खींवसर में फ्लाईओवर वर्षों से निर्माणाधीन है। कार्य की धीमी गति से आमजन और वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। इस कार्य को शीघ्र पूरा कराने पर क्षेत्र में यातायात दबाव काफी हद तक कम होगा।

मूण्डवा: मैथी मंडी और फूड पार्क का इंतजार

मूण्डवा क्षेत्र फसल उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन यहां पान मैथी मंडी का सपना चार साल से अधूरा है। जमीन खरीद और चारदीवारी के बाद भी मंडी शुरू नहीं हो पाई है। इसी तरह मिनी फूड पार्क की योजना भी ठंडे बस्ते में है। इन दोनों परियोजनाओं के शुरू होने पर किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

डीडवाना बायपास और आरओबी: राहत की उम्मीद

डीडवाना बायपास पर रेलवे फाटक सी-60 पर आरओबी की स्वीकृति मिल चुकी है। यह प्रोजेक्ट यदि समय पर पूरा होता है तो शहर के यातायात दबाव में कमी आएगी। साथ ही बीकानेर फाटक से डीडवाना बायपास तक सड़क निर्माण भी आवश्यक है ।

शहर की सड़कों का बुरा हाल

नागौर शहर में सड़कों की स्थिति बेहद खराब है। मानासर से कलक्ट्रेट तक की सड़क का नवीनीकरण पांच वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है। टूटी सड़कों के कारण आमजन परेशानी झेल रहा है। ऐसे में सड़क सुधार कार्य को प्राथमिकता है।

मेडिकल कॉलेज और अस्पताल: स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

नागौर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। विद्यार्थियों को प्रायोगिक शिक्षा में नहीं मिल पा रही। 190 बेडेड अस्पताल भवन का निर्माण भी धीमी से चल रहा है। ये दोनों प्रोजेक्ट समय पर पूरे होने पर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार संभव है।

शिक्षा और युवा सुविधाएं भी अधूरी

मेड़ता में केंद्रीय विद्यालय की घोषणा के बावजूद एक साल बाद भी शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे स्थानीय विद्यार्थियों को निराशा हाथ लग रही है। नागौर में यूथ हॉस्टल का निर्माण पूरा होने के बावजूद अब तक हैंडओवर नहीं हो सका है ।

सबकी नजर प्रशासन पर

कलक्टर इन कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करवाते हैं, तो न केवल नागौर का समग्र विकास संभव होगा, बल्कि आमजन का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।