नागौर. राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद अब राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रूख अपनाया है। आमजन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने सभी जिला कलक्टरों को राष्ट्रीय राजमार्गों के मध्य बिंदु से 75 मीटर की सीमा के […]
नागौर. राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद अब राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रूख अपनाया है। आमजन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता ने सभी जिला कलक्टरों को राष्ट्रीय राजमार्गों के मध्य बिंदु से 75 मीटर की सीमा के भीतर बने सभी व्यावसायिक निर्माण अवैध मानकर उन्हें तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 9 फरवरी को है।
एसीएस गुप्ता ने गत 23 जनवरी को आदेश जारी कर कहा कि हाईकोर्ट ने ‘सेफ्टी ऑवर प्रोप्रटी’ यानी ‘संपत्ति से पहले सुरक्षा’ के सिद्धांत को अपनाते हुए ज़ीरो टॉलरेंस नीति लागू करने के निर्देश दिए हैं। सड़क दुर्घटनाएं बढ़ने का मुख्य कारण हाइवे किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण है।
संयुक्त सर्वे और तत्काल कार्रवाई
इसके लिए राजस्व विभाग, पीडब्ल्यूडी एनएच और एनएचएआई संयुक्त सर्वे करेंगे। सर्वे में यदि 75 मीटर की सीमा के भीतर कोई भी दुकान, होटल, ढाबा या अन्य व्यावसायिक भवन मिला तो उसे तत्काल नोटिस जारी कर ध्वस्त किया जाएगा।
एनओसी के बिना भूमि रूपांतरण अवैध
आदेश में यह भी स्पष्ट है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की बिल्डिंग लाइन और कंट्रोल लाइन में आने वाली भूमि पर पीडब्ल्यूडी / एनएचएआई से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लिए बिना भूमि रूपांतरण नहीं किया जा सकता। इस संबंध में राजस्व विभाग की ओर से 18 नवम्बर 2021 को जारी आदेश का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
15 दिन में देनी होगी अनुपालना रिपोर्ट
एसीएस ने पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी अभियंताओं और एनएचएआई के परियोजना निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि अवैध निर्माण के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर 15 दिन के भीतर अनुपालना रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपें।
दुर्घटनाओं पर कोर्ट की चिंता
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि हाईवे किनारे अनियंत्रित और अवैध निर्माण से दृश्यता घटती है, ट्रैफिक बाधित होता है। इससे जानलेवा हादसों की संख्या बढ़ रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूर्व में मिली किसी भी अनुमति को वैध निर्माण का आधार नहीं माना जाएगा। इस आदेश से राजमार्ग के किनारे बने ढाबों, होटलों और दुकान मालिकों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कानून से ऊपर कोई नहीं और सड़क सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
नागौर के हालात खराब
गौरतलब है कि नागौर जिला दुर्घटनाओं के मामले में देश के टॉप 100 जिलों में शामिल है। जहां दुर्घटनाओं में कमी लानी थी, वहां पिछले साल बढ़ोतरी हो गई। ऐसे में यह आदेश नागौर जिले के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आमतौर पर लोग सड़क के पास दुकानें, कारखानें, छोटी फैक्टरियां आदि लगा लेते हैं या लगाने के लिए जमीन खरीद लेते हैं, इस कार्य में दलालों की भूमिका रहती है, इसलिए खरीदार नियम से अनभिज्ञ रहते हैं और बड़े निर्माण कर लेते हैं। जमीनों के दलाल अपना आर्थिक स्वार्थ सिद्ध करने के लिए उद्योगपतियों और बड़े अधिकारियों को हाईवे के किनारे जमीनें बेच देते हैं, जिसका खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।
कार्रवाई करेंगे
राज्य सरकार के निर्देशानुसार संबंधित विभागों के अधिकारियों से सर्वे करवाकर नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
- चम्पालाल जीनगर, एडीएम, नागौर