
नागौर. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत इस बार गुरुवार को शुक्ल योग, ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे दुर्लभ संयोग में हो रही है। इसे जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। रमल ज्योतिर्विद दिनेश प्रेम शर्मा ने बताया कि ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस वर्ष माता का आगमन पालकी पर होगा। इसे मिला-जुला फल देने वाला माना जाता है। जबकि माता की विदाई हाथी पर होगी। इसे सुख, समृद्धि, अच्छी वर्षा और कृषि में वृद्धि का संकेत माना जाता है। घटस्थापना का सबसे शुभ समय सुबह 6 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 42 मिनट तक चंचल वेला और दोपहर 12 बजकर 43 मिनट से 3 बजकर 44 मिनट तक लाभ-अमृत का समय भी अनुकूल रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 07 मिनट तक रहेगा।
चलती रही तैयारियां
मंदिरों एवं घरों में नवरात्रि को लेकर तैयारियां बुधवार को देर शाम तक चलती रही। शुभ मुहूर्त में घट स्थापना के साथ ही मां दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री के रूप में पूजन के साथ ही नवरात्रि की शुरुआत हो जाएगी। शहर के देवी मंदिरों में साफ-सफाई कर उनको रंगीन बिजली की झालरों से सजाए जाने का काम चलता रहा। नौ दिनों तक नवरात्रि तक मंदिरों में विविध धार्मिक कार्यक्रम होते रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालु भी उपवास रखकर माता की आराधना करेंगे। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। मां शैलपुत्री को शक्ति का प्रथम स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि इनकी आराधना से जीवन में स्थिरता, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजन कर घी का भोग लगाते हैं। जिससे आरोग्य और समृद्धि की कामना की जाती है। माता का वाहन वृषभ (बैल) है और उनके हाथों में त्रिशूल व कमल सुशोभित रहते हैं, जो शक्ति और पवित्रता का प्रतीक हैं।
Published on:
18 Mar 2026 10:36 pm
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