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अस्पताल भवन के बीच गैस सिलेंडर से जल रही भट्टी, सुरक्षा पर उठे सवाल

जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल भवन में वेंटिलेशन के लिए खाली छोड़ी गई जमीन पर लगा दिया फास्ट फूड सेंटर, जिम्मेदार बोले - ऊपर से आदेश, लेकिन हादसा हुआ तो कौन होगा जिम्मेदार

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अस्पताल भवन के बीच गैस सिलेंडर से जल रही भट्टी

अस्पताल भवन के बीच गैस सिलेंडर से जल रही भट्टी

नागौर. जिला मुख्यालय स्थित जेएलएन राजकीय जिला अस्पताल में सुरक्षा नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। अस्पताल भवन के बीच वेंटिलेशन के लिए खाली छोड़ी गई जगह पर फास्ट फूड सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां गैस सिलेंडर से भट्टी जलाकर चाय व फास्ट फूड तैयार जा रहा है। इस स्थिति को लेकर मरीजों और उनके परिजनों के साथ अस्पताल स्टाफ में चिंता का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, अस्पताल परिसर के भीतर जिस स्थान को वेंटिलेशन व मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए खाली रखा गया था, वहां अस्पताल प्रबंधन ने स्थायी रूप से फास्ट फूड सेंटर स्थापित करवा दिया है। यहां गैस सिलेंडरों का उपयोग खुले तौर पर किया जा रहा है, जिससे आगजनी जैसी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि भवन के अंदर गैस सिलेंडर से चूल्हा या भट्टी जलाना पूरी तरह नियमों के खिलाफ है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर इस तरह की लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है, खासकर तब जब यहां बड़ी संख्या में मरीज, परिजन और स्टाफ मौजूद रहते हैं।

फायर सेफ्टी सिस्टम भी खराब

विशेषज्ञों के अनुसार अस्पताल भवन के अंदर या उसके पास गैस सिलेंडर से जलने वाली भट्टी का उपयोग करना सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक गंभीर लापरवाही है, जो मरीजों, कर्मचारियों और आगंतुकों की जान खतरे में डाल सकती है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर, जहां ऑक्सीजन सिलेंडर और ज्वलनशील पदार्थ मौजूद होते हैं, वहां खुली लौ या भट्टी का उपयोग आग लगने के जोखिम को अत्यधिक बढ़ा देता है। चिंता का विषय यह भी है कि जेएलएन अस्पताल में पिछले काफी समय से फायर फाइटिंग सिस्टम भी खराब पड़ा है। ऐसे में यदि आग लगी तो उसे बुझाना मुश्किल होगा। अस्पताल में अग्निशमन उपकरणों की उचित व्यवस्था, समय-समय पर फायर ऑडिट का होना अनिवार्य है, लेकिन जिम्मेदार इसकी अनदेखी कर रहे हैं।

सुरक्षा पर उठते सवाल

- विस्फोट का खतरा: गैस सिलेंडर में रिसाव या आग लगने की स्थिति में, सिलेंडर फट सकता है और एक बड़ा विस्फोट हो सकता है।

- हवा में मौजूद ऑक्सीजन: अस्पताल के वॉर्डों में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से अधिक हो सकता है, जो आग को बहुत तेजी से भडक़ा सकता है।

- आपातकालीन निकासी: आग लगने की स्थिति में, अस्पताल में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालना एक बड़ी चुनौती होती है, जिससे जनहानि होने की संभावना रहती है।

संचालक ने किया अतिक्रमण

फास्ट फूड सेंटर संचालक ने पक्के निर्माण के साथ यहां लोगों को बैठाने के लिए ग्रीन नेट लगाकर अतिक्रमण कर लिया है, जिससे यहां दानदाताओं व अस्पताल प्रशासन की ओर से परिजनों के बैठने के लिए लगाई गई कुर्सियों का उपयोग भी नहीं हो पा रहा है।

ऊपर से आदेश

इस संबंध में जब जेएलएन अस्पताल के पीएमओ डॉ. आरके अग्रवाल से बात की तो उन्होंने कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर फास्ट फूड सेंटर स्थापित किया गया है। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।