
नागौर। राजस्थान के नागौर जिले के घाटवा समीप के खोरण्डी गांव के किसान परिवार के टेम्पो चलाने वाले बेटे लक्ष्मण कुमावत का सोमवार को अंतिम रूप से रेलवे में चयन हुआ। लक्ष्मण ने न सिर्फ अपने गांव का नाम रोशन किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि यदि मन में कुछ करने की ख्वाहिश हो तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
लक्ष्मण ने अपने माता-पिता के सपने को साकार करने के लिए दिन में टेम्पो से सब्जी बेचता था और रात को पढ़ाई करता था। इसी के परिणामस्वरूप लक्ष्मण ने अपना मुकाम हासिल कर अपने परिवार व गांव का नाम रोशन किया। चार बहनों में इकलौता भाई लक्ष्मण कुमावत जो चार साल से टेम्पो से गांव तथा आसपास के क्षेत्रों में सब्जी बेचकर अपनी रोजमर्रा के लिए पिता का सहयोग करते हुए अपनी पढाई को भी जारी रखा।
जिसके परिणाम स्वरूप सोमवार को रेलवे में अंतिम रूप से चयन होकर जोधपुर मंडल के अंतर्गत नियुक्ति प्रस्ताव मिला। खबर सुनकर गांव में खुशी का माहौल है। इस पर रेलवे कर्मचारी जितेन्द्र कुमावत ने ग्रामीणों के साथ घर जाकर माला पहनाकर स्वागत किया।
लक्ष्मण के पिता ओंकारमल कुमावत ने बताया कि वह खेती का काम करते हैं। पांच साल पहले खेत में पानी की कमी होने पर जब कुछ समझ नहीं आया तब इकलौते बेटे ने सब्जी बेचना शुरू किया। साथ ही रात को पढ़ाई भी जारी रखी। इस पर जितेंद्र ने पढ़ाई में लगन को देखते हुए उसे तकनीकी व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने की सलाह दी।