
नागौर. जन्म लेने के तीन दिन बाद अपने लाल को अस्पताल के हवाले करने वाली मां का एक साल बाद भी पता नहीं चला। पुलिस की टीम तक गठित हुई पर नतीजा सिफर। अपनों से ही ठुकराया यह लाल भी उस मां का क्यों इंतजार करता, जिसने खुद ही इसे भगवान भरोसे छोड़ दिया। बहरहाल इस नवजात को एक दम्पती गोद लेकर चले गए हैं। यह पहला मामला नहीं है, अब तक करीब तीन दर्जन से अधिक बच्चे तो मिले, लेकिन उन्हें फेंकने वालों का कोई सुराग नहीं लगा।
सूत्रों के अनुसार पिछले साल फरवरी में एक बुरका ओढ़े महिला तीन दिन के एक नवजात को जेएलएन अस्पताल के मदर एण्ड चाइल्ड विंग (एमएचसी विंग) के एक वार्ड में बुजुर्ग महिला के पास यह कहकर छोड़ गई, अभी आ रही हूं। बुजुर्ग महिला इंतजार करती रही, लेकिन वह नहीं लौटी। वारदात सर्दी के मौसम में रात करीब नौ बजे की थी। घंटे-डेढ़ घंटे बाद हल्ला मचा तो पुलिस भी आई और पालना गृह से यह बच्चा शिशु गृह पहुंच गया।
महिला की तलाश शुरू हुई वो इसलिए भी कि वो तो इसे सौंपकर गई थी। पटककर ही जाना था तो पालना गृह में भी डाल सकती थी। महिला ने बुर्का बने नकाब से खुद को ढांप रखा था। अब यह घटना आम बच्चों से अलग थी। बच्चा चोरी का भी हो सकता है, ऐसी तमाम अटकलों के बीच पुलिस सक्रिय हो गई और इस महिला की तलाश शुरू हुई।
सीसीटीवी कैमरे भी थे बंद
पुलिस ने अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले, लेकिन कैमरे ही बंद मिले। उसके बाद अस्पताल के आसपास के सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले गए, लेकिन महिला नहीं दिखी। महिला की तलाश के लिए पुलिस टीम भी गठित की गई थी, लेकिन कड़ी मशक्कत के बाद भी महिला हाथ नहीं लगी।
किस्मत जल्दी चमकी
अब चार-छह महीने गुजरने के बाद जांच धीमी पड़ गई, इधर इसे गोद लेने के लिए चयनित दम्पती आया और सरकारी कार्रवाई पूरी कर साथ ले गया। पैदा होते ही ठुकरा देने वाली मां को पुलिस तलाश भी लेती तो क्या होता?
हर बार यही सब
सूत्रों की मानें तो अब नागौर के पालना गृह में एक भी शिशु बाकी नहीं है, सब गोद दिए जा चुके हैं। पिछले तेरह साल में नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले में करीब चार दर्जन नवजात ऐसे ही मिले। पालना गृह में तो इक्का-दुक्का सड़क अथवा खेत किनारे। इनके अतिरिक्त कुछ मृत भी पाए गए थे। ऐसे शिशुओं के संरक्षण के लिए पालना गृह सही साबित हुआ। बावजूद इसके एक बार भी कोई माता-पिता वापस नहीं आया अपने बच्चे को लेने। यहां से दो-तीन बच्चे तो विदेशी दम्पती को गोद जा चुके हैं।
इनका कहना
तीन दिन के नवजात को अस्पताल में एक अन्य मरीज के परिजन के पास छोड़कर जाने वाली महिला का पता नहीं चला। अब यह बच्चा भी गोद दिया जा चुका है। यहां से अब तक बीस बच्चे गोद दिए जा चुके हैं। स्वीडन-मॉरिशस के दम्पती तक को बच्चे गोद दिए गए हैं।
-मनोज सोनी, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति, नागौर।