नागौर

प्रताप सागर की पाल पर गरजा पीला पंजा, 12 बीघा से ज्यादा जमीन हुई अतिक्रमण मुक्त

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को लेकर हुए विवाद के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

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Dec 31, 2025
कुछ लोगों ने समझाइश के बाद खुद ही अतिक्रमण हटा लिया

नागौर. शहर के ऐतिहासिक प्रताप सागर तालाब की पाल व आड क्षेत्र के साथ आसपास के आबादी क्षेत्र में किए गए अतिक्रमण पर प्रशासन का पीला पंजा गरजा। करीब तीन घंटे तक चली कार्रवाई में 12 बीघा से अधिक जमीन अतिक्रमण मुक्त करवाई गई। एसडीएम व आयुक्त गोविन्दसिंहभींचर ने बताया कि कुछ लोगों ने समझाइश के बाद खुद ही अतिक्रमण हटा लिया तो कुछ लोगों के अतिक्रमण नगर परिषद की टीम ने हटाए हैं। अतिक्रमण हटाने के बाद ऐसा लगा, मानो प्रताप सागर को सांस आ गई।

तीन बीघा में बनाया तबेला ध्वस्त

गौरतलब है कि प्रताप सागर तालाब क्षेत्र में बीते चार दिन से दो पक्षों में जमीन के कब्जे को लेकर विवाद चल रहा था, जिसको लेकर कोतवाली थाने में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ मामले भी दर्ज करवाए। मामला बढ़ता देख पहले आयुक्त भींचर ने सोमवार को अतिक्रमियों को चेताते हुए खुद के स्तर पर अतिक्रमण हटाने के लिए कहा, लेकिन जब अतिक्रमियों ने अनसुना किया तो मंगलवार दोपहर बाद नगर परिषद की टीम ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।

मौके पर तैनात रहा भारी पुलिस जाब्ता

अतिक्रमण हटाने के दौरान नगर परिषद की पूरी टीम के साथ तहसीलदार व राजस्व विभाग के कर्मचारी एवं कोतवाली थानाधिकारी वेदपाल ​शिवरान के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात रहा। कार्रवाई में प्रताप सागर की पाल सहित आसपास के क्षेत्र में फैली सात बीघा से अधिक बेशकीमती सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। नगर परिषद ने पांच जेसीबी मशीनों की सहायता से कच्चे-पक्के अतिक्रमणों को ध्वस्त किया।

तीन बीघा में बनाया तबेला ध्वस्त

कार्रवाई के दौरान करीब तीन बीघा क्षेत्र में फैले एक बड़े गाय-भैंस के तबेले को पूरी तरह ध्वस्त किया गया। एसडीएम भींचर ने बताया कि जब उन्होंने नगर परिषद आयुक्त का चार्ज लिया, उस समय प्रतापसागर तालाब की सफाई के दौरान तबेला संचालक को नोटिस दिया था, जिस पर वह न्यायालय की शरण में गया, लेकिन नगर परिषद ने वहां मजबूती से पैरवी करते हुए स्थगन आदेश नहीं लेने दिया। सोमवार को भी उसे चेताया, इसके बावजूद जब वह नहीं माना तो मंगलवार को अतिक्रमण तोडऩा पड़ा। नगर परिषद ने मौके से गोबर व चारा तक को जब्त कर डंपरों में भरकर कांजी हाउस भिजवाया। लिया। इसके साथ ही अवैध रूप से बने पानी के होद, चबूतरे, बाड़े, पट्टियां लगाकर की गई तारबंदी और अस्थायी निर्माण कार्यों को भी हटाया गया। वैष्णव समाज के मोक्ष धाम के आगे बने चबूतरे सहित अतिक्रमण हटाया गया, वहीं नायक बस्ती में घरों के आगे किए गए अवैध हिस्सों को भी चिह्नित कर हटाने की कार्रवाई की गई। हाल ही में बनाई गई लिखमीदास बगीची की पट्टियां माली समाज के लोगों ने स्वयं हटा ली।

12 बीघा से ज्यादा जमीन हुई अतिक्रमण मुक्त

आसपास के मकानों की जांच होगी

एसडीएम भींचर ने अतिक्रमण हटाने के दौरान मौके पर मौजूद रहकर निगरानी रखी। उन्होंने बताया कि बुधवार को भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रहेगी। मौके से मलबा और कचरा हटाकर तालाब की पाल को साफ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आसपास बने मकानों की भी जांच शुरू कर दी है और सभी मकान मालिकों को अपने वैध पट्टे व भूमि संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर संबंधित निर्माणों को अतिक्रमण मानते हुए ध्वस्त किया जाएगा।

बड़ा सवाल - पहले क्यों सोता रहा प्रशासन

सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने को लेकर दो पक्षों में हुए विवाद के बाद जागे नगर परिषद प्रशासन ने मंगलवार को करोड़ों रुपए की 12 बीघा जमीन अतिक्रमण मुक्त करवाई। शहरवासियों का कहना है कि शहर में ऐसी कई जमीनें हैं, जिन पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है, लेकिन नगर परिषद और जिला प्रशासन कार्रवाई नहीं करता। प्रतापसागर तालाब की पाल व आसपास की 12 बीघा जमीन पर अतिक्रमण कोई एक दिन में नहीं हुआ है और ऐसा भी नहीं है कि इसकी जानकारी जिम्मेदारों को नहीं थी, इसके बावजूद कार्रवाई में इतना समय क्यों लगा, यह बड़ा सवाल है।

शहर में अंगोर व आड भूमि में छह साल पहले चिह्नित किए थे 56 अतिक्रमण

नागौर शहर में सात ऐतिहासिक तालाबों के साथ छोटे नाडे-नाडियों पर अतिक्रमण दिनों दिन बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। छह साल पहले तत्कालीन एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार ने 20 जनवरी 2020 को शहर के 12 पारम्परिक जल स्रोतों की जांच कर एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कुल 56 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। तहसीलदार की रिपोर्ट मिलने के बाद तत्कालीन एसडीएम दीपांशु सांगवान ने 21 जनवरी 2020 को जिला कलक्टर को पत्र लिखकर शहर के जड़ा, तालाब, बख्तासागर, प्रताप सागर, दुलाया, लाल सागर, समस तालाब, गांछोलाई, मुंदोलाव नाडी, गिनाणी तालाब, कृषि मंडी के पश्चिम दिशा में स्थित नाडी की आड व अंगोर भूमि किए गए अतिक्रमणों की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की थी। एसडीएम के पत्र पर तत्कालीन जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव ने उपखंड अधिकारी की अध्यक्षता में नगर परिषद आयुक्त व तहसीलदार की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर 15 दिन में कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। प्रशासन की सुस्ती एवं जानबूझकर आंखें मूंदने से अतिक्रमियों के हौसले बुलंद हैं। आए दिन सरकारी जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं।

Published on:
31 Dec 2025 11:55 am
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