अब अगली उपज के तैयारियों की सताने लगी चिंता, गावों में कई जगहों पर स्थिति हुई बेहद विकट, उत्पादन भी 25-30 फीसदी प्रभावित, काश्तकारों ने लगाए कृषि विभाग एवं प्रशासन पर अनदेखी के आरोप
नागौर. बारिश के अभाव में फसलों की स्थिति बिगड़ चुकी है, लेकिन कृषि विभाग एवं प्रशासन की नजर में स्थिति संतोषप्रद है। जबकि वास्तव में मूंग, ज्वार एवं बाजरा, मोठ एवं ग्वार आदि के उपज स्थिति औसतन 20 से 25 प्रतिशत तक खराब हुई है, लेकिन कई जगहों पर यह आंकड़ा 50 फीसदी से भी ज्यादा जा पहुंचा है। इस संदर्भ में गांवों में पड़ताल हुई तो काश्तकारों का कहना है कि मूंग व बाजरे की फसल उनकी पूरी तरह से चौपट हो चुकी है।
जिले में इस बार कई जगहों पर बादलों की मेहरबानी नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलों की हालत खराब हो चुकी है। विशेषकर मूंग, ज्वार, बाजरा व मोठ व सब्जियों की स्थिति ज्यादा बिगड़ी है। कई जगहों पर पूरे खेत में खड़ी फसलें ही बारिश के अभाव में सूख गई तो कुछ जगहों पर आधी-अधूरी बची फसलों की कटाई करने में किसान लगए गए हैं। खड़ी फसल के पौधों में अब पीलापन आने के साथ ही पौधों ने दम तोड़ दिया है। बची हुई फसलों में भरपूर बारिश से होने वाली उपज सरीखी गुणवत्ता नहीं मिलेगी। जिले के बाराणी, अमरपुरा, भगवानपुरा, जोसियाद, बुड़ोद, गावडिय़ों की ढाणी,बालिया, भगवानपुरा आदि ग्रामीण क्षेत्र के किसानों का मानना है कि इस बार बारिश नहीं होने की वजह से काफी नुकसान पहुंचा है। खेतों में पौधों के सूखते कंठ, मुरझाते पौधे अपनी स्थिति खुद-ब-खुद बयां करते नजर आ रहे हैं। अब सूखने लगे हैं। अब खेतों में फसल हुई तो बरसात गायब हो गई है। समर्थन मूल्य की दरों में मूंग में सर्वाधिक राशि बढऩे के बाद उत्साहित किसानों ने जिले के तीन लाख 99 हजार 780 हेक्टेयर के एरिया में बुवाई कर डाली। अब बरसात नहीं होने से मूंग, मोठ, मूंगफली, ज्वार, चौला एवं हरी सब्जियों का उत्पादन अप्रत्याशित रूप से ज्यादा प्रभावित हुआ है। मूंग के बाद करीब तीन लाख 39 हजार 478 हेक्टेयर के एरिया में लहलहा रहे बाजरे की चमक भी कम हो गई है। फसलों की स्थिति यह है कि दाने तो आए हैं, लेकिन पानी नहीं मिलने के कारण उनके अंदर न तो अच्छी चमक है, और न ही गुणवत्ता अपेक्षा के अनुरूप है।
अब तो फसल ही खराब हो गई
ग्रामीण क्षेत्रों में जोसियाद का भ्रमण किए जाने पर वहां फसलों की हालत बेहद खराब मिली। खेत में काम करते काश्तकार कुशालसिंह ने कहा कि उनकी तो मूंग की पूरी फसल सूख गई। पानी नहीं होने के कारण अन्य उपज भी उनकी खासी खराब हो चुकी है। ज्वार, बाजरा एवं मोठ को तो सूखा निगल गया है। स्थिति यह है कि परेशान किसानों के पास उनकी सुध लेने के लिए न तो कृषि विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी पहुंचा, और न ही प्रशासन की ओर से गिरदावरी के लिए पटवारी आया। नेता भी आएंगे तो चुनाव के दौरान। इस समय परेशान एवं सूखे से जूझते और हाड़तोड़ मेहनत करने वाले किसानों की समस्या जानने के लिए किसी के पास फुरसत नहीं है। जबकि हालात बेहद खराब हो चुके हैं। यहीं थोड़ी दूर पर खेतों में काम करते मिले किसान ओमप्रकाश ने कहा कि आप खुद ही देख लो, बारिश नहीं होने के कारण फसलों की क्या हालत हो चुकी है।
बाजरा 339478
ज्वार 32085
मूंग 399780
मोठ 58580
चौला 7283
मूंगफली 14541
तिल 4375
कपास 35958
ग्वार 105878
( फसल हेक्टेयर में)सल बुवाई एक नजर
उत्पादन 25-30 प्रतिशत गिरा
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण निर्धारित उत्पादन में 25-30 फीसदी की गिरावट हो चुकी है। अब जो फसल है भी तो बारिश के अभाव में वह पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाई। हालांकि कई जगहों पर बाद में बरसात तो हुई, लेकिन यथासमय नहीं होने के कारण फसलों का उत्पादन औसतन अब गिर चुका है। आश्चर्य है कि हालत इतनी खराब होने के बाद भी प्रशासन का कोई अधिकारी अब तक किसानों के पास उनकी सुध लेने के लिए नहीं पहुंचा है।
अधिकारी कहिन...
&कृषि विस्तार उपनिदेशक हरजीराम चौधरी का कहना है कि विभाग की ओर से सर्वे तो नहीं कराया गया, लेकिन कई जगहों पर पर्याप्त बारिश हुई है। हालांकि कुछ क्षेत्र में कम बारिश के कारण स्थिति खराब हुई है, लेकिन बहुत ज्यादा बदतर नहीं है।