नागौर

कौन सा वार्ड नहीं, कैसा नागौर बनेगा: शहर की जनता चाहती है 5 साल का विकास रोडमैप

नागौर. नगर परिषद चुनाव की सरगर्मी के बीच शहर के सामने सवाल केवल वार्ड की समस्याओं का नहीं, बल्कि पूरे नागौर के भविष्य का है। अगले 5 साल में शहर कैसा बनेगा, इसकी योजना जरूरी है। टूटी सड़कें, अधूरी सीवरेज, सफाई, जलभराव, यातायात और पार्किंग जैसी समस्याएं बनी हैं। जनता चाहती है कि चुनाव केवल पार्षद चुनने तक सीमित न रहे। अगले बोर्ड को 5 साल का विकास रोडमैप सामने रखना होगा। प्रतिनिधित्व की इच्छा रखने वालों को जुबानी वादों के बजाय लिखित लक्ष्य, प्राथमिकताएं और समयसीमा बतानी होगी, ताकि जनता विकास की दिशा और कामकाज का आकलन कर सके।
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Aug 31, 2026
Such roads have become the identity of Nagaur.
Nagaur. Road near Teliwara area in the city

टूटी सडक़ें, अधूरी सीवरेज, चरमराती सफाई व्यवस्था के बीच बड़ा सवाल—अगला बोर्ड बने तो बदले शहर की तस्वीर कैसे?
नागौर. नगर परिषद चुनाव की सरगर्मी के बीच इस बार शहर के सामने सवाल केवल वार्ड की समस्याओं का नहीं, बल्कि पूरे नागौर के भविष्य का है। अगले 5 साल में शहर कैसा बनेगा, इसकी स्पष्ट योजना अब जरूरी है। टूटी सडक़ें, अधूरी सीवरेज, सफाई, जलभराव, यातायात और पार्किंग जैसी समस्याएं लंबे समय से लोगों की चिंता बनी हुई हैं। ऐसे में जनता चाहती है कि चुनाव केवल पार्षद चुनने तक सीमित न रहे, बल्कि अगले बोर्ड के लिए 5 साल का स्पष्ट विकास रोडमैप भी सामने आए। जनता के प्रतिनिधित्व की इच्छा रखने वालों को जुबानी वादों के बजाय लिखित लक्ष्य, समयसीमा और प्राथमिकताएं बतानी होंगी।

गड्ढों से आगे बढ़े सडक़ की योजना

शहर में सडक़ निर्माण को केवल गड्ढे भरने और पैचवर्क तक सीमित रखने के बजाय स्थायी समाधान की जरूरत है। सडक़ बनाने से पहले पेयजल, सीवरेज और बिजली लाइनों से जुड़े काम पूरे किए जाएं, ताकि नई सडक़ बनने के बाद बार-बार खुदाई नहीं हो। मुख्य मार्गों के साथ कॉलोनियों की सडक़ों की गुणवत्ता और निर्माण की समयसीमा भी तय हो।

सीवरेज का अधूरा नेटवर्क सबसे बड़ी चुनौती

नागौर के व्यवस्थित विकास में सीवरेज सबसे अहम मुद्दों में है। जहां लाइन नहीं पहुंची, वहां नेटवर्क विस्तार और जहां लाइन बिछ चुकी है, वहां घरों को कनेक्शन से जोडऩा जरूरी है। टूटे चैंबर, ओवरफ्लो और सफाई की शिकायतों के लिए नियमित निगरानी हो। सडक़ पर बहता गंदा पानी शहर की आधारभूत व्यवस्था की कमजोरी को सामने लाता है।

सफाई ऐसी हो, जिसका असर दिखे

हर वार्ड में नियमित डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, गीले-सूखे कचरे का अलग-अलग करना, और कचरा परिवहन की निगरानी जरूरी है। खुले में कचरा डालने वाले स्थान खत्म किए जाएं। बाजार और मुख्य मार्गों पर जरूरत के अनुसार दिन में एक से अधिक बार सफाई हो तथा वार्डवार सफाई व्यवस्था की निगरानी की जाए।
बारिश में सडक़ें तालाब न बनें
जलभराव वाले स्थानों की स्थायी पहचान कर समाधान किया जाए। नालियों की सफाई के साथ उनकी क्षमता और निकासी मार्गों की समीक्षा हो। बारिश से पहले औपचारिक सफाई के बजाय पूरे साल ड्रेनेज व्यवस्था की निगरानी हो, ताकि पानी सडक़ पर रुकने के बजाय निकासी तंत्र तक पहुंचे।
ट्रैफिक-पार्किंग का भी बने मास्टर प्लान
पुराने बाजारों और प्रमुख मार्गों पर यातायात के दबाव को देखते हुए पार्किंग और अतिक्रमण का एकीकृत समाधान जरूरी है। प्रमुख बाजारों का ट्रैफिक सर्वे, व्यवस्थित पार्किंग स्थल, फुटपाथ, सुरक्षित क्रॉसिंग और पैदल यात्रियों के लिए सुविधाएं विकसित की जाएं। आने वाले वर्षों के वाहनों के दबाव को ध्यान में रखकर मास्टर प्लान बने।
सुंदरता सिर्फ रंग-रोगन से नहीं
पार्क, हरियाली, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक शौचालय और बैठने के स्थान जैसी मूल सुविधाओं पर ध्यान देना होगा। पुराने शहर और ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को सुरक्षित रखते हुए योजनाबद्ध सौंदर्यीकरण किया जा सकता है। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए सार्वजनिक स्थान सुविधाजनक बनाए जाएं।
जनता को दिखे काम का हिसाब
अगले बोर्ड के लिए पारदर्शिता भी प्रमुख एजेंडा होना चाहिए। किस वार्ड में कौन सा काम स्वीकृत हुआ, कितनी राशि लगी, काम कब शुरू हुआ और कब तक पूरा होगा, इसकी जानकारी सार्वजनिक हो। काम की गुणवत्ता और शिकायतों के समाधान की भी निगरानी हो। इससे वादों और जमीन पर हुए काम के बीच अंतर साफ दिखाई देगा।
अब चाहिए पूरे शहर की एक तस्वीर
अगले बोर्ड की चुनौती केवल अलग-अलग वार्डों की समस्याएं दूर करने की नहीं, बल्कि पूरे नागौर को व्यवस्थित शहर बनाने की है। सडक़, सीवरेज, सफाई, ड्रेनेज, यातायात, पार्किंग, हरियाली और नागरिक सुविधाओं को एक ही शहरी विकास योजना से जोड़ा जाए। 5 साल बाद नागौर की तस्वीर आज से बेहतर कैसे होगी, इसका लक्ष्य चुनाव से पहले ही स्पष्ट होना चाहिए।

जनता बोली: वायदे पर खरा उतरना होगा

रोडमैप ऐसा हो, जिसमें काम की प्राथमिकता और उसे पूरा करने की समयसीमा दोनों साफ हों। जिससे शहर के विकास को गति मिल सके। इसमें सडक़ निर्माण, सफाई व्यवस्था बेहतर करने की कार्ययोजना होनी चाहिए।
भोजराज सारस्वत, व्यास कॉलोनी
सिर्फ सडक़ बनाना काफी नहीं, सीवरेज और दूसरी लाइनों की योजना साथ चले, तभी सडक़ टिकेगी। कार्यों की गतिविधि पर लगाम कसने के लिए एक विशेष व्यवस्था होनी चाहिए। इसके साथ ही जनता की समस्याओं के लिए कंट्रोल रूम बनना चाहिए। जिसमें समाधान की अनिवार्यता के लिए जिम्मेदारों की जवाबदेही भी होनी चाहिए।
नितिन मित्तल, खत्रीपुरा

शहर के विस्तार के साथ पार्किंग, ट्रैफिक और जलनिकासी की स्थायी योजना बननी चाहिए। सफाई व्यवस्था भी बेहतर होनी चाहिए, और सरकारी जमीनों पर कब्जे न हो, लाइट व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए।
मूलचंद भाटी, ताऊसर
जनता को हर काम का हिसाब और उसकी प्रगति सार्वजनिक रूप से दिखाई देनी चाहिए। विकास की कार्ययोजना ऐसी होनी चाहिए कि शहर विकास की दौड़ प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सके, और बड़े शहरों की अग्रिम कतार में शामिल हो सके।
बनवारीलाल अग्रवाल, सैनिक बस्ती

Updated on:
31 Aug 2026 10:26 pm
Published on:
31 Aug 2026 10:25 pm