Bastar Naxal Operation: अबूझमाड़ में जंगलों में छिपे गुरिल्ला ठिकाने, अंडरग्राउंड हाउस और हथियारों के डंप लगातार बरामद हो रहे हैं, जिससे वर्षों पुराने नक्सली नेटवर्क के राज सामने आ रहे हैं।
Bastar Naxal Operation: कभी देश के सबसे दुर्गम और रहस्यमयी इलाकों में शुमार अबूझमाड़ अब अपने भीतर छिपे नक्सली नेटवर्क के उन राजों को उजागर कर रहा है, जो वर्षों तक सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए चुनौती बने रहे। बस्तर सहित पूरे क्षेत्र में नक्सलवाद के कमजोर पडऩे के बाद अब जंगलों के भीतर छिपे गोरिल्ला युद्ध के ठिकाने, अंडरग्राउंड हाउस और बड़े पैमाने पर छिपाए गए हथियारों के डंप एक-एक कर सामने आ रहे हैं।
ताजा कार्रवाई में नारायणपुर जिले के काकुर थाना सोनपुर क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा तैयार किए गए एक अंडरग्राउंड ठिकाने (भूमिगत घर) का पता लगाकर उसे ध्वस्त कर दिया। यह ठिकाना नक्सलियों के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था, जहां से वे अपनी गतिविधियों का संचालन करते थे। काकुर क्षेत्र के घने जंगलों में तैयार इस अंडरग्राउंड हाउस को इस तरह डिजाइन किया गया था कि ऊपर से देखने पर सामान्य जमीन जैसा प्रतीत हो, लेकिन भीतर यह एक सुरक्षित छिपने की जगह थी।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस ठिकाने का उपयोग नक्सली छिपने, बैठक करने, रणनीति बनाने और दैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए करते थे। सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए सघन सर्चिंग अभियान के दौरान जब इस संदिग्ध स्थान पर गहराई से जांच की गई, तब यह भूमिगत संरचना सामने आई। जवानों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया, ताकि भविष्य में इसका उपयोग न हो सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र नक्सलियों के लिए लंबे समय तक सुरक्षित पनाहगाह रहा, जहां उन्होंने गुरिल्ला युद्ध की उन्नत तकनीकों को अपनाते हुए अपने ठिकाने बनाए। इन ठिकानों की विशेषता यह रही कि—ये पूरी तरह प्राकृतिक वातावरण में छिपे होते थे और जमीन के नीचे सुरंगनुमा संरचनाएं बनाई जाती थीं।
आसपास निगरानी के लिए ऊंचे स्थानों का चयन किया जाता था। इससे आपात स्थिति में भागने के लिए वैकल्पिक रास्ते भी मौजूद रहते थे। अब जब नक्सली प्रभाव कमजोर हुआ है, तो सुरक्षा बलों को इन तकनीकों और नेटवर्क को समझने का मौका मिल रहा है, जिससे भविष्य की रणनीतियां और मजबूत बनाई जा रही हैं।
जंगलों से अभियान के दौरान सुरक्षा बलों का फोकस सिर्फ ठिकानों को ध्वस्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि नक्सलियों द्वारा वर्षों से जंगलों में छिपाकर रखे गए हथियार, गोला-बारूद और आईईडी डंप को भी खोजकर निष्क्रिय किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अबूझमाड़ के कई ‘अबूझ’ यानी दुर्गम और अनजान स्थानों पर बड़े पैमाने पर हथियार दफन किए गए थे, जिन्हें अब एक-एक कर बाहर निकाला जा रहा है। यह कार्रवाई न केवल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि नक्सलियों की भविष्य की संभावनाओं को भी कमजोर कर रही है।
नक्सलियों के इन अंडरग्राउंड ठिकानों का ध्वस्त होना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जीत है। इससे नक्सलियों की लॉजिस्टिक सप्लाई, छिपने की क्षमता और संगठनात्मक मजबूती पर सीधा असर पड़ रहा है। काकुर में मिला यह अंडरग्राउंड हाउस इस बात का संकेत है कि नक्सली लंबे समय से इस क्षेत्र में व्यवस्थित तरीके से अपनी पकड़ बनाए हुए थे, लेकिन अब सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई से यह नेटवर्क बिखर रहा है।
नारायणपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नक्सल उन्मूलन अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा। जंगलों के भीतर छिपे हर ठिकाने, हर डंप और हर संभावित खतरे को खत्म करने के लिए सुरक्षा बल पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।