Raksha Bandhan 2025: इस अनोखे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि रक्षाबंधन का त्योहार केवल एक धागा नहीं, बल्कि रिश्तों को जोड़ने और नई शुरुआत की उम्मीद जगाने वाला पवित्र बंधन है।
Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन के पावन अवसर पर नारायणपुर में एक अनोखा और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला, जब बस्तर फाइटर की महिला कमांडो ने आत्मसमर्पित नक्सलियों की कलाई पर राखी बांधी। यह पहली बार था, जब 40 साल बाद इन नक्सलियों ने रक्षासूत्र को अपने हाथों में महसूस किया और भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट को करीब से जिया।
राखी बांधते समय महिला कमांडो ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुयधारा से जुड़े रहने और नए जीवन की शुरुआत करने का संकल्प दिलाया। इस पहल से न सिर्फ उनके जीवन में भावनात्मक जुड़ाव पैदा हुआ, बल्कि उनके भीतर परिवार और त्योहारों की अहमियत भी ताज़ा हो गई। आत्मसमर्पित डिवीसीएम नक्सली मुकेश वट्टी, निवासी सुकमा, ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए बताया कि वह 14 साल की उम्र में 1997 में नक्सली संगठन से जुड़े थे और करीब 27 साल तक सक्रिय रहे।
Raksha Bandhan 2025: 2002 में शादी के बाद भी संगठन में हथियार बनाने का काम करते रहे। इस दौरान नसबंदी करा दी गई और परिवार से रिश्ते लगभग टूट गए। मुकेश ने बताया कि नक्सली संगठन में रक्षाबंधन जैसे त्योहार नहीं मनाए जाते थे, इसलिए आज तक उनकी कलाई पर राखी नहीं बंधी थी। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘‘40 साल बाद आज पहली बार मेरी कलाई पर राखी बंधी है। ऐसा लग रहा है मानो मेरी अपनी बहन ने आकर रक्षासूत्र बांधा हो। यह मेरे जीवन का एक खास पल है।’’
ऐसी ही भावनाएं अन्य आत्मसमर्पित नक्सलियों की भी थीं, जो वर्षों तक जंगलों में रहकर परिवार और समाज से दूर रहे थे। अब मुख्यधारा में लौटने के बाद वे फिर से त्योहारों और पारिवारिक खुशियों का आनंद लेना चाहते हैं। इस अनोखे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि रक्षाबंधन का त्योहार केवल एक धागा नहीं, बल्कि रिश्तों को जोड़ने और नई शुरुआत की उम्मीद जगाने वाला पवित्र बंधन है।