MP News: राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े तीन कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए भोपाल लोकायुक्त की टीम ने रंगेहाथों पकड़ा।
MP News: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला नर्मदापुरम जिले के इटारसी का है जहां राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े तीन कर्मचारियों को भोपाल लोकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है।
सुनैया बरकडे निवासी ग्राम पाण्डुखेड़ी तहसील केसला जिला नर्मदापुरम ने लोकायुक्त कार्यालय भोपाल में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया था कि वो राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन योजना में पशु सखी के रूप मे कार्यरत हैं। इस कार्य के लिए उसे समूह के माध्यम से फरवरी 2026 को 29700 रूपये का मानदेय प्राप्त हुआ। मिशन के जनपद पंचायत केसला में पदस्थ विकासखंड प्रबंधक धर्मेंद्र गुप्ता आवेदिका पर यह दवाब बना रहा था की आवेदिका ने काम पूरा नहीं किया था लेकिन उसने आवेदिका का काम ज्यादा दिखा कर उसका इतना मानदेय बनवाया है। आवेदिका के केवल 4000 रूपये बनते हैं, इसलिए बाकि के 25000 रूपये आवेदिका उसे दे, नहीं तो आरोपी उसे इस कार्य से हटाकर दूसरी महिला को ट्रेनिंग दिलाकर पशु सखी काम के लिए रख लेगा।
आवेदिका सुनैया बरकड़े ने अपनी शिकायत में बताया कि उसके मिन्नत करने पर 20000 रूपये रिश्वत लेने पर बात तय हुई है। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर जाल बिछाकर आवेदिका सुनैया बरकड़े को रिश्वत के 20 हजार रुपये देने के लिए रिश्वतखोर धर्मेंद्र गुप्ता के पास भेजा। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ब्लॉक कार्यालय जनपद पंचायत केसला जिला नर्मदापुरम में जैसे ही धर्मेंद्र गुप्ता ने सुरभि क्लस्टर फेडरेसन संघ की मैनेजर कामिनी राजपूत तथा चपरासी कृष्णा धुर्वे के माध्यम से 20000 रूपये की रिश्वत ली तो लोकायुक्त ने उन्हें रंगेहाथों पकड़ लिया। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन)2018 की धारा-7, 12,के अंतर्गत कार्यवाही की है।
शुक्रवार को ही मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के महू में इंदौर लोकायुक्त की टीम ने जनपद पंचायत की उपयंत्री (सब इंजीनियर) सावित्री मुवेल को 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा है। सब इंजीनियर के खिलाफ ग्राम पंचायत यशवंत नगर के सचिव रमेशचन्द्र चौहान ने शिकायत दर्ज कराई थी और बताया था कि 15वें वित्त आयोग मद से 4.52 लाख रुपए की लागत से सीसी रोड का निर्माण हुआ था। निर्माण पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया के लिए भौतिक सत्यापन और माप पुस्तिका (एमबी) में एंट्री जरूरी थी। उपयंत्री सावित्री मुवेल ने इसी प्रक्रिया को बाधा बनाकर 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। सब इंजीनियर सावित्री मुवेल बिना रकम लिए मूल्यांकन दर्ज करने से इनकार कर रहीं थीं और इसके कारण भुगतान अटका हुआ था।