
MP News Mango heatwave protection (photo: AI)
MP mango heatwave protection: फलों के राजा आम की फसल इन दिनों पककर तैयार हो गई है, लेकिन भीषण गर्मी और तेज लू के कारण फलों को नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में किसान आम को लू से बचाने के लिए अनूठे देसी तरीके अपना रहे हैं। बगीचों में आम के पेड़ों की टहनियों पर कपड़े में फूटी हुई प्याज बांधी या लटकाई जा रही है। कुछ जगहों पर प्याज के रस से भरी बोतलें भी पेड़ों पर टांगी जा रही हैं। किसानों का मानना है कि इससे लू के कारण आम के आकार और रस पर असर नहीं पड़ता और फल की गुणवत्ता बनी रहती है। यह तरीका सेहत को भी किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता।
तापमान लगातार बढ़ रहा है और पारा आसमान छू रहा है। तेज गर्म हवाओं के कारण आम के फलों के अंदर का रस कम होने और उनकी वृद्धि प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। छोटे फल तेज हवा और आंधी में गिर भी जाते हैं, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। इससे बचाव के लिए किसान प्याज का सहारा ले रहे हैं।
वे प्याज का रस बोतलों में भरकर पेड़ों पर लटका देते हैं या फूटी हुई प्याज को टहनियों से बांध देते हैं। किसानों का कहना है कि इस जैविक उपाय से आमों पर लू का असर कम होता है और फल रसीले बने रहते हैं। इससे महंगे रसायनों के उपयोग की जरूरत भी नहीं पड़ती।
उद्यानिकी विभाग के मटकुली स्थित आम बगीचे में इन दिनों दशहरी, लंगड़ा, चौसा, मल्लिका, आम्रपाली, बांबेग्रीन, रत्ना, केसर, हापुस, हिमसागर, जरदालू, जहांगीर, पायरी, फजली, कृष्ण भोग सहित लगभग 40 प्रकार की आम की किस्में लगी हैं। यहां पेड़ों को कीटों से बचाने के लिए रसायन मिश्रित पानी से भरी कैन लटकाई गई हैं। प्रभारी सदाशिव कनाते ने बताया कि कीट प्रबंधन के लिए कैन में रासायनिक घोल भरकर पेड़ों पर लटकाया है।
गर्म हवाओं से आम के अंदर का रस सूख जाता है, जिससे फल का विकास प्रभावित होता है। ऐसे में प्याज का रस बोतल में भरकर या प्याज को फोड़कर पेड़ों की टहनियों से बांध दिया जाता है। इससे फल स्वस्थ और रसीले बने रहते हैं। किसानों को नुकसान नहीं होता।
- विवेक यादव, किसान, ग्राम मरोड़ा, नर्मदापुरम
गर्मियों में कच्चा प्याज खाना वरदान माना गया है। इसकी तासीर ठंडी होती है। इसे खाने से शरीर का तापमान बना रहता है। यह गर्मी में लू और हीट स्ट्रॉक से बचाता है। इसमें मौजूह हाई वॉटर कन्टेंट और पोषक तत्व जैसे विटामिन सी, पौटेशियम शरीर को हाइड्रेटेट रखते हैं। बीपी को कंट्रोल करते हैं। इसी तरह प्याज आम की सेहत का ख्याल रख रहे हैं। ताकि किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल किए बिना इन्हें आप तक पहुंचाया जा सके और इन्हें खाने से मिलने वाले स्वाद, मिठास और पोषण में कोई भी कमी न आ सके। ताकि आम भी सुरक्षित रहें और आपकी सेहत भी।
-डॉ. विनोद कोठारी, एमडी, भोपाल
एमपी में में दशहरी, लंगड़ा, केसर, मल्लिका, आम्रपाली जैसे आमों की वैराइटी पाई जाती है। अलग-अलग क्षेत्र के किसान अपने उत्पाद लेकर आम महोत्सव में पहुंचते हैं। वहीं छिंदवाड़ा, बालाघाट, नर्मदापुरम के केसर, लगड़ा, दशहरी, तोतापरी और मल्लिका आम सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले आम हैं।
यहीं मिलता है दुनिया का सबसे वजदार आम (heaviest mango of the world)
कोलंबियाई किसान जर्मन ऑरलैंडो नोवोआ बरेरा और रीना मारिया मार्रोक्विन ने कोलंबिया के गुआयाटा में बोयाका क्षेत्र के सैन मार्टिन फार्म में दुनिया का सबसे भारी आम उगाकर रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाबी हासिल की थी। इस आम का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक में भी दर्ज है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश के नूरजहां आम ने इसका भी रिकॉर्ड तोड़ रखा है।
दरअसल कोलंबियाई किसान के नाम दर्ज दुनिया के सबसे भारी-भरकम आम का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तब दर्ज है जब उसका वजन 4.250 किलोग्राम था। लेकिन मध्य प्रदेश में उगाया जाने वाला नूरजहां आम 2.500 ग्राम से लेकर 5 किलोग्राम तक वजदार होता है। भले ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कोलंबियाई किसान के नाम हो, लेकिन एमपी का ये आम 5 किलोग्राम तक वजनदार होता है, जिसका अपना रिकॉर्ड है।
Published on:
04 May 2026 10:40 am
