
awarded the GI tag नरसिंहपुर. जिले के गुड़ और बरमान में नर्मदा की तलहटी में होने वाले बैगन अर्थात भटे को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल गई है। जिले के इन दोनों उत्पादों को जीआइ टैग मिला है। जिसके लिए करीब तीन साल से प्रक्रिया चल रही थी और बीते साल उज्जैन में काउंसलिंग हुई थी। गुड़ और बैगन को जीआइ टैग देते हुए रजिस्टार भौगोलिक उपदर्शन के जरिए प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं।
जिले के बरमानक्षेत्र में नर्मदा की तटीय बालुई मिट्टी में होने वाले बैगन जिसे जनसामान्य की भाषा में भटे के नाम से लोकप्रियता हासिल है उसे जीआइ टैंगिंग दिलाने की प्रक्रिया तीन साल पूर्व शुरू हुई थी। जिसमें टैगिंग के लिए सभी जरुरी दस्तावेज चैन्नई भेजे गए, हियरिंग की प्रक्रिया हुई, फिर उज्जैन में काउंसलिंग हुई। तब कहीं जाकर जिले को यह बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है।
सहायक संचालक उद्यान दिनेश कोतू ने बताया कि जिले में नर्मदा की कछार भूमि में भटा अर्थात बैगन की फसल का रकबा काफी है। लेकिन जीआइ टैगिंग के लिए जिस भटा को चुना गया है वह नर्मदा के सतधारा, धरमपुरी से लेकर बरमान, रामघाट और केसली घाट तक करीब एक हजार हेक्टेयर रकबे में होता है। जो अपने स्वाद, आकार, पोषक-पाचक तत्वों जैसी कई खासियतों वाला है। सहायक संचालक ने बताया कि उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग और मां नर्मदा बरमान भटा उत्पाद सहकारी समिति मर्यादित के जरिए भटा को 16 जनवरी 2024 को रजिस्ट्रीकृत किया गया था। इसी तरह निजधरा फार्मर प्रोड्यूर कंपनी लिमिटेड खुलरी सिहोरा के जरिए गुड़ के संबंध में रजिस्ट्रीकरण हुआ।
महीन बीज व रेशामुक्त होना खासियत
नर्मदा की कछार भूमि में होने वाला यह भटा अन्य स्थानों पर होने वाले भटे से भिन्न होता है। इसका वजन 5 से 7 किलो तक का हो जाता है। इसमें बीज भी महीन होते हैं। जबकि अन्य भटे में बीज मोटा होता है। इस भटे में रेशे नहीं होते। इसमें पानी की मात्रा 85 से 89 प्रतिशत तक होती है। नर्मदा की तलहटी क्षेत्र के लंबे-चौड़े रकवे में किसान भटे की खेती करते हैं। इसकी फसल नवंबर से मार्च तक चलती है। भटे का यह बीज दशकों पुराना हैं। हर साल किसान खुद अपने स्तर पर इसे फसल में बड़े आकार के फल छोडकऱ तैयार करते हैं। यह भी रोचक है कि इस बीज से तैयार पौध के जरिए दूसरे स्थानों पर यदि पौधे लगाए जाते हैं तो उनसे फल तो मिलते हैं लेकिन वह स्वाद नहीं मिलता जो नर्मदा क्षेत्र की मिट्टी में मिलता है।
गन्ना के उत्पादन में अग्रणी जिले के गुड़ की रहती है मांग
नरसिंहपुर जिला गन्ना उत्पादन के मामले में प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल है। यहां हर साल गुड़ और गन्ने का कारोबार करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपए तक माना जाता है। जिले में किसान बड़े पैमाने पर गुड़ निर्माण करते हैं, और प्रमुख मंडियों के जरिए यह गुड़ देशभर की मंडियों, बाजारों तक पहुंचता है। गुड़ को जीआइ टैग मिलने से अब न केवल गन्ना और गुड़ उत्पादन से जुड़े किसानों को लाभ मिलेगा बल्कि जिले को भी राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पाद के जरिए नई पहचान मिलेगी।
वर्जन
जिले की पहचान कृषि प्रधान जिले के रूप में है, निश्चित तौर पर गुड़ व बरमान के बैगन को जीआइ टैग मिलने से जिले की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बढ़ेगी। गुड़ उत्पादक किसानों को न केवल गुड़ के अच्छे दाम मिलेंगे बल्कि इसका प्रमोशन और बेहतर ढंग से हो पाएगा। करीब 6 माह से हम लोग इसके बेहतर प्रमोशन और किसानों के प्रोत्साहन के लिए निरंतर कार्य कर रहे थे। बरमान का बैगन जिसे भटा कहते हैं वह तो पहले ही फेमस था अब और उसे अच्छी पहचान मिलेगी।
रजनी सिंह, कलेक्टर नरसिंहपुर