जिले में वर्ष 2020 से अब तक 6 साल में 127 बाल विवाह रोके गए हैं। समय पर मिली सूचनाओं पर यदि प्रशासनिक अमला सक्रियता नहीं दिखाता तो न जाने कितनी बालिकाएं वधू बन जातीं और कितने बालकों के सिर शादी का सेहरा बंध जाता।
child marriage persist within society नरसिंहपुर. (प्रकाश चौबे)वर्तमान दौर भले ही डिजीटल क्रांति का हो लेकिन समाज में बाल विवाह जैसी गलत रुढिय़ां आज भी खत्म नहीं हो रही है। भले ही इसके लिए शासन-प्रशासन लोगों को जागरूक कर रहा है। बदलते सामाजिक माहौल में यह कुप्रथा नए तरीके से सामने आ रही है। कार्रवाई और निगरानी से बचने के लिए कई परिवार अब अपने गांव या क्षेत्र से बाहर जाकर चुपचाप विवाह करा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे मामलों की चर्चा तो होती है, लेकिन अधिकांश घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पातीं।
जिले में वर्ष 2020 से अब तक 6 साल में 127 बाल विवाह रोके गए हैं। समय पर मिली सूचनाओं पर यदि प्रशासनिक अमला सक्रियता नहीं दिखाता तो न जाने कितनी बालिकाएं वधू बन जातीं और कितने बालकों के सिर शादी का सेहरा बंध जाता।
जिले में 6 वर्षो के दौरान बाल विवाह के मामलों को देखें तो सबसे अधिक मामले नरसिंहपुर, चीचली और साईंखेड़ा क्षेत्र में सामने आए हैं। वर्ष 2022 और 2024 में सर्वाधिक 25-25 बाल विवाह रोके गए, जबकि इस वर्ष में अब तक 9 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीण स्तर पर काम करने वाले लोगों का कहना है कि अब लोग विवाह आयोजन को गोपनीय रखने लगे हैं। वर्ष 2020 से अब तक सांइखेड़ा ब्लाक में बाल विवाह के 25, चीचली में 29, नरसिंहपुर में 33, करेली में 11, गोटेगांव में 13 एवं चांवरपाठा 16 मामले सामने आए। जिनमें विवाह रूकवाने की कार्रवाई हुई। अमले की सक्रियता से बुधवार को भी 17 वर्ष 3 माह की एक किशोरी का विवाह बालिग होने पर ही करने परिजनों को समझाइश देने अमला पहुंचा। किशोरी का विवाह रायसेन जिले में तय हुआ था।
बदलते माहौल में बढ़ी चिंता, रिश्तों का दबाब बड़ा कारण
समाज में बाल विवाह के प्रति कई वर्ग के लोगों की सोच न बदलने के पीछे कई वजह मानी जातीं हैं। इनमें बड़ी वजह यह भी है कि बदले सामाजिक माहौल में बालिकाओं की सुरक्षा, मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव, पारिवारिक प्रतिष्ठा की चिंता तथा आर्थिक दबाव जैसी वजहें भी जल्दी विवाह कराने के पीछे प्रमुख कारण बन रही हैं। कई पालकों में यह मानसिकता बनी रहती है कि कम उम्र में विवाह कर देने से जिम्मेदारी जल्दी पूरी हो जाएगी। वहीं कुछ परिवार सामाजिक चर्चा या रिश्तों के दबाव में भी जल्द निर्णय ले लेते हैं।
जागरूकता-समझाइश से कई टाल देते हैं विवाह
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी कई स्थानों पर कम उम्र में विवाह को परंपरा और सामाजिक चलन का हिस्सा माना जाता है। हालांकि शिक्षा का स्तर बढऩे और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण जागरूकता पहले की तुलना में बढ़ी है। स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और पंचायत स्तर पर लगातार समझाइश दी जाती है कि कम उम्र में विवाह से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और प्रशासन द्वारा विवाह सीजन में विशेष निगरानी रखी जा रही है। सूचना मिलने पर टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती है और कई मामलों में समय रहते विवाह रुकवाए गए हैं।
क्यों नहीं थम रहे बाल विवाह
बेटियों की सुरक्षा को लेकर पालकों में चिंता
सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक दबाव
आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर जल्दी विवाह का निर्णय
ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरा और सामाजिक चलन का प्रभाव
प्रशासनिक कार्रवाई से बचने दूसरे क्षेत्रों में जाकर विवाह
फैक्ट फाइल
2020 से 2026-27 तक रोके गए बाल विवाह -127
वर्ष 2022 और 2024 में सबसे अधिक मामले - 25-25
सर्वाधिक मामले-नरसिंहपुर, चीचली और साईंखेड़ा क्षेत्र
निगरानी में शामिल विभाग-महिला एवं बाल विकास, पुलिस और प्रशासन
वर्षवार आंकड़े
वर्ष रोके गए बाल विवाह
2020 09
2021 14
2022 25
2023 22
2024 25
2025 22
2026 09
वर्जन
जिले में बाल विवाह के जो भी मामले में अब तक मेरे सामने आए उनमें अधिकांश में बच्चों का स्कूल ड्रॉप करना, पढ़ाई से दूरी है। साथ ही गांव-कस्बों में पालकों को आज के माहौल में यह चिंता भी रहती है कि उनके बच्चे कोई गलत कदम न उठा लें। समाज को बाल विवाह के दुष्परिणाम बताने निरंतर जागरूकता कार्यक्रम होते हैं। सबसे जरूरी है कि बच्चों को शिक्षा से जोडकऱ रखा जाए।
प्रांजली मर्सकोले, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग नरसिंहपुर