8 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सीमित संसाधनों में डेंगू-मलेरिया से जंग, जांच बढ़ाने जोर, एक एलाइजा से जांच व्यवस्था, जागरूकता भरोसे नियंत्रण की कोशिश

जिले में हर वर्ष डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित बन रही है। सीमित संसाधन, पर्याप्त जांच सुविधाओं की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव के बीच विभाग को संक्रमण रोकने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।

2 min read
Google source verification
जिले में हर वर्ष डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित बन रही है। सीमित संसाधन, पर्याप्त जांच सुविधाओं की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव के बीच विभाग को संक्रमण रोकने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।

जिला मलेरिया विभाग जहां अमला-संसाधन कम हैं।

major challenge for the Health Department नरसिंहपुर. जिले में हर वर्ष डेंगू और मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियों की रोकथाम स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित बन रही है। सीमित संसाधन, पर्याप्त जांच सुविधाओं की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव के बीच विभाग को संक्रमण रोकने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। जिले के कई गांव वर्षों से मलेरिया और डेंगू प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित हैं, जहां हर वर्ष बरसात और मौसम बदलने के दौरान मरीजों की संख्या बढऩे लगती है। जिले में बीमारी की जांच के लिए रेपिड किट व एक एलाइजा मशीन, हर ब्लाक में एक-एक फागिंग मशीन तो है। लेकिन
अमले की कमी है। वहीं एक और एलाइजा मशीन की दरकार बनी है। जिससे जिले को मलेरिया-डेंगू मुक्त बनाने या मरीजों के आंकड़ों को कम करने में मदद मिल सके।
विभागीय जानकारी के अनुसार डेंगू जांच के लिए जिले में केवल एक एलाइजा मशीन उपलब्ध है, जबकि जून-जुलाई से बारिश के सीजन दौरान संदिग्ध मरीजों की संख्या लगातार बढऩे की आशंका बनी रहती है। ऐसे में समय पर जांच और रिपोर्ट उपलब्ध कराना भी चुनौती साबित होता है। खासकर गाडरवारा, सांईखेड़ा, चीचली ब्लाक क्षेत्र से मरीजों के सैंपल लेकर नरसिंहपुर आने की लाचारी बनती है। यदि सिविल अस्पताल गाडरवारा को एक एलाइजा मशीन मिलती है तो रोग की रोकथाम में न केवल मदद मिलेगी बल्कि बीमारी की पुष्टि जल्दी होने से इलाज त्वरित संभव हो सकेगा।
अब तक चार माह में 40 हजार 846 लोगों की जांच
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में जनवरी से दिसंबर तक जिले में मलेरिया जांच के लिए 1 लाख 73 हजार 879 सैंपल लिए गए, जिनमें 89 मरीज पॉजिटिव मिले। इसी अवधि में डेंगू के 32 केस सामने आए, जबकि चिकनगुनिया के 6 मरीज मिले थे। वहीं वर्ष 2026 में जनवरी से 30 अप्रेल तक 40 हजार 846 लोगों की जांच की गई, जिनमें 4 मरीज पॉजिटिव पाए गए। इसी अवधि में डेंगू के 3 केस मिले हैं, जबकि चिकनगुनिया का कोई मामला सामने नहीं आया। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि गांवों में लार्वा सर्वे, दवा छिडक़ाव, बुखार सर्वे और जांच अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य अमले को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि शुरुआती लक्षण मिलने पर मरीजों की पहचान कर समय पर जांच कराई जा सके। करीब 50 हजार रेपिड किट उपलब्ध है। विभाग का मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच से ही संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है।
सुदूर गांवों में चुनौती ज्यादा
मलेरिया-डेंगू का असर ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी साफ-सफाई, जलभराव और मच्छरों की रोकथाम में कमी से अधिक रहता है। जिसकी वजह गांवों से लगे वनक्षेत्र, जलभराव वाले स्थानों की अधिकता एवं घरों में पानी का स्टाक अधिक रहना है। जिले के कई गांव वर्षों से मलेरिया-डेंगू प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित हैं। वर्ष 2024 में चिन्हित 274 गांवों में 1 लाख 58 हजार 850 मच्छरदानियों का वितरण किया जा चुका है।

डेंगू-मलेरिया की स्थिति
वर्ष 2025 (जनवरी-दिसंबर)
मलेरिया जांच -1,73,879
मलेरिया पॉजिटिव- 89
डेंगू केस - 32
चिकनगुनिया केस -6
वर्ष 2026 (जनवरी से 30 अप्रेल)
मलेरिया जांच - 40,846
मलेरिया पॉजिटिव -4
डेंगू केस - 3
चिकनगुनिया केस -0
वर्जन
अभी एक एलाइजा मशीन से ही जांच होती है, गाडरवारा क्षेत्र से सैंपल नरसिंहपुर न लाना पड़े इसके लिए एक और मशीन लाने प्रयास हो रहे हैं। अमले की कमी तो है लेकिन मैदानी अमले को प्रशिक्षित किया गया है। हमारे पास रेपिड किट भी पर्याप्त हैं। मौसम में जैसे ही आगे बदलाव होगा तो संक्रमण का असर दिखेगा।

डॉ. राजकिशोर पटेल, जिला मलेरिया अधिकारी नरसिंहपुर

बड़ी खबरें

View All

नरसिंहपुर

मध्य प्रदेश न्यूज़

ट्रेंडिंग