जिले के तेंदूखेड़ा नगर में वार्ड क्रमांक 14 स्थित एक खेत में बने कुएं में गिरे मादा तेंदुआ की कुएं से सुरक्षित निकासी गुरुवार की देर रात करीब साढ़े 10 बजे हो सकी। वह भी तब जब रात का सन्नाटा बढ़ा, मौके पर मौजूद वन अमले ने अपने वाहनों की लाइट बुझाईं
The safe extraction of a female leopard नरसिंहपुर. जिले के तेंदूखेड़ा नगर में वार्ड क्रमांक 14 स्थित एक खेत में बने कुएं में गिरे मादा तेंदुआ की कुएं से सुरक्षित निकासी गुरुवार की देर रात करीब साढ़े 10 बजे हो सकी। वह भी तब जब रात का सन्नाटा बढ़ा, मौके पर मौजूद वन अमले ने अपने वाहनों की लाइट बुझाईं और चुपचाप बैठकर तेंदुआ के प्राकृतिक तरीके से कुएं में डाले गए पेड़ के जरिए निकलने का काफी देर इंतजार किया। वन अमले ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में सुबह से देर रात तक तेंदुआ को निकालने के लिए प्रयास हुए। रात करीब साढ़े 10 बजे जब चारों तरफ अंधेरा और सन्नाटा बढ़ा तो अचानक कुएं के पास से तेंदुआ के भागने की आहट मिली। इसके बाद लाइट बंद कर खामोशी से बैठे अमले ने सुरक्षित तरीके से कुएं के पास जाकर देखा तो तेंदुआ जंगल की तरफ जा चुका था। इसके बाद रात को ही अमले ने वापिसी की। आसपास के लोगों को सावधान रहने के लिए भी कहा है जिससे कहीं कोई अप्रिय स्थिति न बन
15 फीट गहरे कुएं में गिरे तेंदुए को निकालने डाला पेड़
खेत में बने करीब 15 फीट गहरे कुएं में गिरे मादा तेंदुए को निकालने तीन परिक्षेत्र की टीम ने दिनभर रेस्क्यु किया। लेकिन तेंदुआ कुंए में एक तरफ दीवार से सटकर बैठा रहा। इस दौरान अमले के लिए जहां रेस्क्यु में मेहनत करना पड़ी वहीं उसे देखने लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करना भी चुनौती रहा। तेंदुए को सुरक्षित निकालने अमले ने कुएं में पेड़ों की डालियां डालने हाइड्रा, क्रेन बुलाई। शाम को एक मोटे पेड़ को कुएं में डाला गया ताकि उस पर चढकऱ तेंदुआ बाहर आ सके। अमले ने निगरानी के साथ ही शाम होने का इंतजार किया। कुएं में पेड़ डालकर अमला तेंदुए के निकलने का इंतजार करता रहा। बताया जाता है कि घटना का खुलासा गुरुवार की सुबह उस वक्त हुआ जब खेत मालिक सरफराज खान अपने पशुओं को पानी पिलाने खेत गया। कुएं में पानी कम होने से किसान को एक तरफ तेंदुआ बैठा दिखा तो उसके होश उड़ गए। किसान ने पड़ोसी किसानों और फिर वन अमले को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर बरमान, करेली, गाडरवारा परिक्षेत्र के अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम पहुंच गई। वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से भी विशेष वाहन बुलाया गया ताकि तेंदुआ पिंजरे में कैद होने पर उसे सुरक्षित जंगल में भेजा जा सके। लेकिन दिनभर रेस्क्यु के सारे प्रयास विफल रहे। डीएफओ डॉ. कल्पना तिवारी, एसडीओ वन विकास शर्मा के निर्देशन में परिक्षेत्र अधिकारी एचएल बिसेन समेत अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों की टीम कुएं के आसपास मोर्चा संभाले रही। अमले ने ग्रामीणों को सुरक्षित रहने की सलाह दी है। वन अमले ने कहा है कि मादा तेंदुआ की आयु चार से पांच वर्ष अनुमानित है।
पानी की तलाश में आने की आशंका
घटना में माना जा रहा हैं संभवत: पानी की तलाश में तेंदुआ जंगल से भटकर कुएं तक पहुंचा होगा, क्योंकि इन दिनों जंगल के अधिकांश जलस्रोत सूख गए हैं। जिससे वन्यजीवों की खेतीहर क्षेत्रों में आवक बढ़ रही है। बीते फरवरी माह में भी एक काले हिरण की पड़रिया-सिमरिया गांव के पास किसी वाहन की