नरसिंहपुर

विभाग को नहीं पता कितने स्कूलों में जलभराव, कितने स्कूल मार्ग खराब, कच्चे रास्ते, जलभराव ने बिगाड़ी पढ़ाई की राह

शिक्षा विभाग के पास यह जानकारी तक उपलब्ध नहीं है कि जिले में कितने स्कूल ऐसे हैं जहां पहुंच मार्ग जर्जर हैं और कितने स्कूलों हर बारिश में जलभराव से प्रभावित होते हैं।
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जिले में बारिश के मौसम में सरकारी स्कूलों तक पहुंचने की राह बच्चों के लिए आसान नहीं है। कई स्कूलों तक जाने वाले कच्चे और फिसलन भरे रास्ते स्कूली बच्चों के लिए रोजाना जोखिम बन रहे हैं, जबकि अनेक स्कूल परिसरों में जलभराव से हालात तालाब जैसे हो गए हैं।
गोटेगांव इंदिरा स्कूल परिसर मानों यहां जलसरंक्षण होता हो।

rainy season is no easy task for children नरसिंहपुर. जिले में बारिश के मौसम में सरकारी स्कूलों तक पहुंचने की राह बच्चों के लिए आसान नहीं है। कई स्कूलों तक जाने वाले कच्चे और फिसलन भरे रास्ते स्कूली बच्चों के लिए रोजाना जोखिम बन रहे हैं, जबकि अनेक स्कूल परिसरों में जलभराव से हालात तालाब जैसे हो गए हैं। गंभीर बात यह है कि शिक्षा विभाग के पास यह जानकारी तक उपलब्ध नहीं है कि जिले में कितने स्कूल ऐसे हैं जहां पहुंच मार्ग जर्जर हैं और कितने स्कूलों हर बारिश में जलभराव से प्रभावित होते हैं। ऐसे में समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस योजना भी नजर नहीं आ रही है।
नरसिंहपुर शहर के नेहरू स्कूल और सीएम राइज सांदीपनी स्कूल सहित कई विद्यालयों में भी परिसर में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। साईंखेड़ा, चीचली और अन्य क्षेत्रों के स्कूलों में भी बारिश के दौरान ऐसे ही हालात देखने को मिल रहे हैं। तेंदूखेड़ा तहसील के बंधी गांव के टपरिया मोहल्ले से लगभग एक किलोमीटर लंबा कच्चा मार्ग आज भी बच्चों की मजबूरी बना हुआ है। खेतों में रहने वाले करीब 20 से 25 परिवारों के बच्चे इसी रास्ते से मदनपुर और तेंदूखेड़ा के स्कूलों तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों के अनुसार बारिश में पुलिया के ऊपर पानी आने से मार्ग बंद हो जाता है और बच्चों को कीचड़ व फिसलन से भरे रास्तों से होकर स्कूल जाना पड़ता है। वर्षों से सडक़ पक्की कराने की मांग के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जातीं छात्राएं।

गोटेगांव तहसील के टीला गांव और सिरकौना पंचायत के रोंसरा स्कूल की स्थिति भी अलग नहीं है। खराब पहुंच मार्ग के कारण बरसात में बच्चों की नियमित उपस्थिति प्रभावित होती है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों को ऐसे रास्तों से भेजना जोखिम भरा हो जाता है। समस्या केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है। गोटेगांव की इंदिरा कन्या शाला का परिसर बारिश में तालाब बन रहा है। स्कूल पहुंच मार्ग पर कीचड़ और गंदे पानी के कारण छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ रही है।
हर वर्ष एक जैसे हालात
जिले में यह पहली बार नहीं है कि बारिश के दौरान बच्चों के लिए स्कूल की राह मुश्किल हुई हो। हर वर्ष बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन अब तक न तो प्रभावित स्कूलों का समग्र सर्वे हुआ और न ही समस्या के स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार की गई। जिससे जिले के नौनिहाल आज भी सुरक्षित रास्ते और जलभराव मुक्त स्कूल परिसर का इंतजार कर रहे हैं।
वर्जन
जानकारी बुलाई जा रही है कि कहां-कहां स्कूलों में जलभराव की समस्या हो रही है और कितने स्कूलों तक के पहुंच मार्ग ठीक नहीं है। जैसे ही जानकारी आएगी तो समस्या निराकरण के लिए कार्रवाई करेंगे।
डॉ. अनिल कुशवाहा, जिला शिक्षा अधिकारी नरसिंहपुर
मैंने पता किया है जलभराव से प्रभावित होने वाले स्कूलों और पहुंच मार्ग स्कूलों के संबंध में पहले कोई डाटा तैयार नहीं हुआ है। निर्देश देकर जानकारी बुलाते हैं, सभी को पत्र जारी कराते हैं।
प्रदीप द्विवेदी, डीपीसी नरसिंहपुर

Updated on:
08 Jul 2026 12:36 pm
Published on:
08 Jul 2026 12:35 pm
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