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निकायों तक सिमटा जर्जर मकानों का चिन्हांकन, ग्रामीण क्षेत्र में सर्वे नहीं, जिले में 74 निजी 18 सरकारी भवनों से जुड़े जिम्मेदारों को नोटिस

प्रशासन ने निकाय क्षेत्रों में जो 88 जर्जर चिन्हित किए हैं उनमें निजी भवनों की संख्या 74 और सरकारी भवनों की संख्या 14 बताई जा रही है।
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जिले में जर्जर मकानों, सरकारी भवनों के गिरने का खतरा यूं तो सालभर रहता है लेकिन बारिश का मौसम होने से ऐसे भवनों को लेकर प्रशासन ने सक्रियता बढ़ाई है। हालांकि जर्जर भवनों के चिन्हांकन एवं संबंधितों को नोटिस देने, चेतावनी बोर्ड लगाने की कार्रवाई सिर्फ निकाय क्षेत्रों तक सिमट कर रह गई है।

चीचली में चिन्हित जर्जर मकान।

88 dilapidated structures identified नरसिंहपुर. जिले में जर्जर मकानों, सरकारी भवनों के गिरने का खतरा यूं तो सालभर रहता है लेकिन बारिश का मौसम होने से ऐसे भवनों को लेकर प्रशासन ने सक्रियता बढ़ाई है। हालांकि जर्जर भवनों के चिन्हांकन एवं संबंधितों को नोटिस देने, चेतावनी बोर्ड लगाने की कार्रवाई सिर्फ निकाय क्षेत्रों तक सिमट कर रह गई है। जबकि हर साल बारिश के मौसम में मकान गिरने की ज्यादातर घटनाएं ग्रामीण इलाकों से सामने आती हैं। लेकिन पंचायतों के स्तर पर जोखिम वाले मकानों, भवनों का चिन्हांकन नहीं हो रहा है। प्रशासन ने निकाय क्षेत्रों में जो 88 जर्जर चिन्हित किए हैं उनमें निजी भवनों की संख्या 74 और सरकारी भवनों की संख्या 14 बताई जा रही है।
बारिश के मौसम में संभावित हादसों को रोकने के लिए प्रशासन ने जर्जर भवनों से संबंधित भवन स्वामियों एवं विभागों को नोटिस जारी किए हैं। लोगों को सतर्क करने के लिए चिन्हित भवनों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जर्जर भवनों के गिरने का खतरा तो निकाय और ग्रामीण क्षेत्र में बराबर रहता है तो फिर इस तरह के भवनों को चिन्हित करने की कार्रवाई सिर्फ निकाय क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान कच्चे और पुराने मकानों के गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें जनहानि और आर्थिक नुकसान भी होता है। इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर मकानों और भवनों का व्यापक सर्वे या चिन्हांकन अभियान नहीं चलाया जाता। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ग्रामीण क्षेत्रों में भी खतरा बना रहता है तो वहां इस तरह की पूर्व तैयारी क्यों नहीं की जाती।


प्रशासन को साईखेड़ा-सालीचौका में नहीं मिला कोई जर्जर भवन
प्रशासन के सर्वे के अनुसार नरसिंहपुर में 24, गोटेगांव में 21, करेली में 18, गाडरवारा में 16, तेंदुखेड़ा में 5 तथा चीचली में 4 जर्जर भवन चिन्हित किए गए हैं। साईंखेड़ा और सालीचौका में कोई जर्जर भवन नहीं मिला। सभी चिन्हित भवनों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं तथा संबंधितों को कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही भवन स्वामियों को निर्धारित समय-सीमा में मरम्मत या अन्य आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। समय-सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों तक हो सर्वे तो रूकेंगी घटनाएं
जिले में प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे और जर्जर मकानों के गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। कई बार लोगों को चोट लगने, पशुधन की हानि और मकानों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं भी होती हैं। इसके बावजूद जर्जर भवनों की पहचान और नोटिस की कार्रवाई केवल निकाय क्षेत्रों तक सीमित रहती है। यदि ग्राम पंचायत स्तर पर भी समय रहते सर्वे और चिन्हांकन कराया जाए तो संभावित हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

फैक्ट फाइल
जिले में कुल जर्जर भवन- 88
शासकीय भवन -14
निजी भवन -74
नरसिंहपुर -24
गोटेगांव- 21
करेली - 18
गाडरवारा- 16
तेंदुखेड़ा - 05
चीचली - 04
वर्जन
नगरीय क्षेत्रों की तरह ग्रामीण क्षेत्र में भी जर्जर भवनों, मकानों का चिन्हांकन कराने कार्रवाई होगी। इस संबंध में निर्देश जारी करेंगे। जिससे ग्रामीण क्षेत्र में बारिश के दौरान कोई अप्रिय स्थिति न बने।

गजेंद्र नागेश, सीईओ जिला पंचायत नरसिंहपुर