municipal corporation lacks a management master plan तेजी से विकसित होते नरसिंहपुर नगरीय क्षेत्र के सामने हर दिन बड़े पैमाने पर निकल रहे प्लास्टिक-पॉलिथिन का कचरे का उचित प्रबंधन नहीं हो रहा है। जो आने वाले समय में न सिर्फ निकय के लिए बल्कि नागरिकों के लिए भी बड़ी चुनौती साबित होगा। क्योंकि वर्तमान में […]
municipal corporation lacks a management master plan
तेजी से विकसित होते नरसिंहपुर नगरीय क्षेत्र के सामने हर दिन बड़े पैमाने पर निकल रहे प्लास्टिक-पॉलिथिन का कचरे का उचित प्रबंधन नहीं हो रहा है। जो आने वाले समय में न सिर्फ निकय के लिए बल्कि नागरिकों के लिए भी बड़ी चुनौती साबित होगा। क्योंकि वर्तमान में ही हर दिन करीब दो टन कचरा निकल रहा है। जिसके उचित प्रबंधन के लिए निकाय के पास कोई मास्टर प्लान नहीं हैं जिससे उम्मीद की जा सके कि भविष्य में यह कचरा निकाय के लिए मुसीबत नहीं बनेगा।
शहर में ठोस कचरा और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के दावे और योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। नगरपालिका केवल घरों से कचरा उठाकर डंपिंग यार्ड तक पहुंचा रही है। नतीजतन शहर के ट्रेंचिंग ग्राउंड में पॉलिथिन और प्लास्टिक के पहाड़ खड़े हो गए हैं। उल्लेखनीय है शहर से रोज निकलने वाले कचरे का बड़ा हिस्सा पॉलिथिन और प्लास्टिक है। जिसके पृथक्करण व रीसाइक्लिंग की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। डंपिंग यार्ड में लगातार ढेर जमा हो रहा है, जिससे प्रदूषण और जलभराव की समस्या और गहरी हो रही है। इस स्थान से लगी जगदंबा कॉलोनी, सांकल रोड और मुशरान वार्ड के लोग इसकी बदबू और बढ़ती समस्या से खासे परेशान हैं।
ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत नगर पालिकाओं को प्लास्टिक कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और निस्तारण करना चाहिए। नपा की भूमिका अभी सिर्फ कचरा उठाने तक सीमित है। रीसाइक्लिंग, पुन: उपयोग और प्रोसेसिंग को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है।इधर दूसरी ओरनगरपालिका ने ट्रेंचिंग ग्राउंड में जैविक खाद निर्माण इकाई बनाई थी। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यहां आज तक खाद नहीं बनी। नाडेप टंकियां खाली पड़ी हैं और कचरा बिना प्रसंस्करण के यार्ड में फेंका जा रहा है। यह इकाई अब औचित्यहीन साबित हो चुकी है।
आदेशों के बावजूद बाजारों, हाट-बाजारों और दुकानों में प्लास्टिक बैग का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। नाले-नालियों और सार्वजनिक जगहों पर प्लास्टिक का ढेर दिखाई देता है। नपा प्रशासन की कार्रवाई पिछले महीनों में महज औपचारिकताओं तक सिमट गई है। ट्रेंचिंग ग्राउंड का एक चौथाई हिस्सा प्लास्टिक के ढेर से अटा पड़ा है।