नरसिंहपुर

स्वीकृति के दो साल बाद भी अधूरा रेलवे गुड्स यार्ड

स्वीकृति के दो साल बाद भी अधूरा रेलवे गुड्स यार्ड, 1.15 करोड़ की परियोजना पर अब भी इंतजार वाहनों की लगातार आवाजाही से जर्जर और बदहाल हो रहा प्लेटफ ार्म

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railway goods yard remains incomplete
railway goods yard remains incomplete

रेलवे स्टेशन नरसिंहपुर पर प्रस्तावित गुड्स यार्ड के निर्माण को स्वीकृति मिले करीब दो वर्ष बीत चुके हैं लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हो सका है। 1 करोड़ 15 लाख रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद जमीन पर काम नजर नहीं आ रहा। इसका खामियाजा मौजूदा रैक प्वाइंट को भुगतना पड़ रहा है, जहां लगातार वाहनों की आवाजाही से प्लेटफ ार्म जर्जर और बदहाल होता जा रहा है।
रेलवे द्वारा प्रस्तावित गुड्स यार्ड के निर्माण से नरसिंहपुर स्टेशन की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। इस परियोजना के तहत प्लेटफ ार्म का निर्माणए चबूतरे का विस्तार और भंडारण के लिए शेड बनाए जाने हैं। योजना के अनुसार 400 मीटर लंबे प्लेटफ ार्म में से 300 मीटर लंबाई और लगभग 20 मीटर चौड़ाई में पक्का चबूतरा तैयार किया जाएगा। कुछ स्थानों पर स्थल की उपलब्धता के अनुसार चौड़ाई कम रखी जाएगी। इसके साथ ही खाद्यान्न और खाद के सुरक्षित भंडारण के लिए शेड का निर्माण भी प्रस्तावित है।

खुले आसमान के नीचे सालभर रैक से लोडिंग और अनलोडिंग


वर्तमान स्थिति यह है कि रेलवे गुड्स यार्ड में न तो समुचित प्लेटफ ार्म है और न ही भंडारण की कोई पुख्ता व्यवस्था। खुले आसमान के नीचे सालभर रैक से लोडिंग और अनलोडिंग का काम किया जाता है। बारिश के मौसम में खाद्यान्न और खाद की बोरियां भीगकर खराब होने का खतरा बना रहता है। गुड्स यार्ड के रूप में यहां दो साइडिंग ट्रैक उपलब्ध हैं, जिनमें एक पुरानी और एक नई ट्रैक शामिल है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में इनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

साल भर में लगते 25-30 रैक


उल्लेखनीय है नरसिंहपुर कृषि उत्पादन के लिहाज से प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल है। यहां से मक्का, धान, चावल, गेहूं और गुड़ मोलासिस की लाखों टन खेप पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, गुजरात सहित अन्य राज्यों में भेजी जाती है। वहीं कृषि प्रधान जिला होने के कारण खाद और बीज की बड़ी मात्रा में आवक भी होती है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यहां पर साल भर में 25-30 रैक लगते हैं। गुड्स यार्ड की उपयोगिता और बढ़ते परिवहन दबाव को देखते हुए रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया था। इसके बाद प्रस्ताव भेजा गया और जिसे स्वीकृति भी मिल गई। लेकिन दो साल बाद भी निर्माण शुरू न होना रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
वर्जन-
यह प्रोजेक्ट स्वीकृत तो हो चुका है लेकिन अभी इसका कार्य आरंभ नहीं हुआ है। वैसे भी अभी रैक लग रहे हैं,इसलिए साइट भी खाली नहीं है। यहां पूरे साल में लगभग 25-30 रैक लगते हैं। जिनमें अनाज और खाद की ट्रांसपोटिंग होती है।
सुनील जाट स्टेशन प्रबंधक नरसिंहपुर

Published on:
17 Jan 2026 02:32 pm
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