Ganesh idol saved 13 year old child life: शुक्रवार को सूरत में रहने वाला 13 साल का लखन देवीपूजक अपने परिवार के साथ माताजी के दर्शन करने के बाद सूरत के डुमस के समुद्र तट पर गणेश विसर्जन देखने गया थे। जहां वह समुद्र में डूब गया।
कहते हैं कि जब किसी की रक्षा भगवान करते है तो मौत चाहकर भी उसको नहीं छू सकती। ऐसा ही कुछ हुआ है गुजरात के सूरत में, जहां पिछले शुक्रवार को सूरत में रहने वाला 13 साल का लखन देवीपूजक अपने परिवार के साथ माताजी के दर्शन करने के बाद सूरत के डुमस के समुद्र तट पर गणेश विसर्जन देखने गया थे। जहां वह अपने भाई के साथ समुद्र में तैरने उतरा।
इसी दौरान लखन और उसका भाई समुद्र में डूबने लगा। इसके बाद लोगों ने दोनों भाइयों को बचाने की कोशिश की। इसमें एक भाई तो बच गया। लेकिन लखन गहरे पानी में जाने के कारण लोगों को नहीं मिला, हालांकि वह 36 घंटे बाद सकुशल जिंदा मिल गया।
पिता खोज रहे थे बेटे का शव
बता दें कि बेटे के समुद्र में डूबने की खबर पाकर अगले दिन प्रशासन और परिवारजनों ने उसकी तलाश जारी रखी। तब परिवार को संदेश आया कि लखन को समुद्र में मछुआरों ने बचा लिया है। वहीं, बेटे के शव की तलाश कर रहे पिता को पुलिस से जानकारी मिली कि लखन जीवित है तो उनके जीवन में एक नई ऊर्जा आ गई और आंसुओं के साथ उसके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।
गणेश भगवान ने बचाई बच्चे की जान
बताया जा रहा है कि करीब 8 मछुआरे नवदुर्गा नाम की नाव से समुद्र में मछली पकड़ रहे थे। तभी उन्होंने देखा कि समुद्र के बीच में एक बच्चा लकड़ी के तख्त पर बैठा है और हाथ उठाए मदद मांग रहा है। तब मछुआरे नाव लेकर इस बच्चे के पास पहुंचे। उसे नाव में बिठाया और उससे पूछताछ की। वह गणेश प्रतिमा के अवशेषों पर बैठा था जहां से उसे बचा लिया गया। 13 साल का बच्चा गणेशजी के लकड़ी के सहारे मौत को मात देकर जिंदा वापिस आया है।
समुद्र तट से 14 नॉटिकल माइल दूर चला गया था लखन
मछुआरों ने बताया कि बच्चा समंदर में जिस जगह पर मिला था वहां से समुद्र तट करीब 14 नॉटिकल माइल दूर था। बच्चे के मिलने की खबर उन्होंने प्रशासन को दी तो पता चला कि सूरत के डूमस समुद्र तट से जो बच्चा शुक्रवार दोपहर को डूब गया था वो यही बच्चा है। 12 घंटे बाद रविवार सुबह मछुआरे बच्चे को लेकर बिलीमोरा के पास धोलाई बंदर पहुंचे और पुलिस को सौंप दिया।
पूरी तरह से स्वस्थ पाया गया लड़का
डूमस के समुद्र में डूबने के बाद लापता हुए लखन को 36 घंटे बाद ढोलाई बंदर पर उतारा। इसके बाद नवसारी के अस्पताल में डॉक्टरों ने उसकी प्रारंभिक जांच की जहां वह स्वस्थ पाया गया। आईसीयू में 24 घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखने के बाद में उसे परिवार को सौंप दिया गया।