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अयोध्या राम मंदिर में लगेंगे स्वर्णजड़ित 14 द्वार, महाराष्ट्र की लकड़ी, तमिलनाडु के कारीगर इस राज्य में कर रहे तैयार

Ayodhya Ram temple: राम मंदिर में लगने वाले दरवाजे तमिलनाडु के कारीगरों द्वारा बनाया जा रहा है। इसमें कमल, मोर और अन्य पक्षियों के पारंपरिक भारतीय रूपांकनों को प्रदर्शित किया गया है।

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500 साल के इंतजार के बाद अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के ग्राउंड फ्लोर का काम लगभग पूरा हो चुका है। मंदिर में अब दरवाजे लगाने की तैयारी की जा रही है। राम मंदिर के भूतल में लगने वाले 14 खूबसूरत दरवाजों को हैदराबाद में अनुराधा टिम्बर्स इंटरनेशनल के निदेशक सरथ बाबू के निर्देशन में महाराष्ट्र से आई सागौन की लकड़ी से तैयार किया गया है और उन पर तांबे की परत चढ़ाई जा रही है, जिसके बाद इन्हें स्वर्ण जड़ित किया जाना है। इसके काम में कन्याकुमारी तमिलनाडु के कारीगर पीछले तीन महीने से जुटे हुए है।

8 फीट ऊंचे और 12 फीट चौड़े होंगे सोने से जड़ित दरवाजे

अनुराधा टिम्बर्स इंटरनेशनल के निदेशक सरथ बाबू ने बताया कि राम मंदिर गर्भ गृह के दरवाजे की ऊंचाई 8 फीट है और दरवाजे की चौड़ाई 12 फीट है और अन्य दरवाजे की ऊंचाई केवल 8 फीट है और दरवाजे की चौड़ाई एक दूसरे से अलग है जो 12 फीट से कम है। जरूरत पड़ने पर दरवाजा आधा बंद या पूरा खोला जा सकता है। दरवाजों को फाइनल टच देने के लिए दिल्ली भेजा गया है जहां इनकी कोटिंग होगी। इन दरवाजों पर वैभव प्रतीक गज ( हाथी),खूबसूरत विष्णु कमल, स्वागत की प्रणाम मुद्रा में देवी चित्र अंकित हैं।

नागर शैली में बनाया जा रहे दरवाजे

तमिलनाडु के कारीगरों द्वारा बनाए जा रहे दरवाजे नागर शैली में डिजाइन किए गए है, जिसमें कमल, मोर और अन्य पक्षियों के पारंपरिक भारतीय रूपांकनों को प्रदर्शित किया जाएगा। नागर मंदिर वास्तुकला की उत्तर भारतीय शैली है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह तीसरी शताब्दी ईस्वी में गुप्त काल में शुरू हुई और मुसलमानों के आगमन तक जारी रही। कंपनी ने बताया कि अब तक मुख्य मंदिर के 18 दरवाजे और मंदिर के चारों ओर 100 चौखटें बनाई जा चुकी हैं।

नागर शैली के दरवाजों में नहीं होता लोहे का इस्तेमान

दरअसल, मंदिर उत्तर भारत की नागर शैली पर बनाया जा रहा है है. नागर शैली उत्तर भारतीय हिन्दू स्थापत्य कला की तीन में से एक शैली है. वास्तुशास्त्र के अनुसार नागर शैली के मंदिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च अंश तक इसका चतुष्कोण होना है. खास बात यह है नागर शैली के मंदिरों में लोहे और सीमेंट का इस्तेमाल नहीं होता है. भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वहीं डिजाइन में मंदिर में प्रवेश के लिए चार अलग-अलग गेट सभी दिशाओं में बनाए गए हैं. सभी द्वार पर भारतीय संस्कृति की झांकियां भी मिलेंगी। साथ ही मंदिर में प्रदर्शनी, मेडिटेशन हॉल, धर्मशाला, रिसर्च सेंटर, स्टॉफ के रहने के लिए घर, राम भगवान पर रिसर्च और साहित्य के लिए लाइब्रेरी भी बनाई जाए।

Published on:
28 Dec 2023 11:07 am
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