राष्ट्रीय

1971 Indo-Pak War: किसी ने घर पर आकर शोर मचाया तब पता चला कि भारत ने हमला बोल दिया है- बेनजीर भुट्टो की दोस्त की आंखोंदेखी

1971 India-Pakistan War के समय कैसे पाकिस्तानी मीडिया अपने ही नागरिकों को गुमराह कर रहा था, जानिए उस खत के हवाले से जो सामिया ने हार्वर्ड में पढ़ रहीं अपनी दोस्त बेनजीर भुट्टो को लिखा था। उन्होंने लिखा था कि भारतीय वायु सेना के विमान करांची के घरों की खिड़कियों के इतने पास मंडराते थे कि उनके पायलट दिखाई देते थे, लेकिन पाकिस्तान की ओर से कोई जवाबी कार्रवाई दिखती ही नहीं थी।
3 min read
1971 War
भारतीय वायु सेना (IAF) द्वारा सार्वजनिक की गईं 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की कुछ तस्वीरें।

1972 में 2 जुलाई को भारत और पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक शिमला समझौते पर दस्तखत हुए थे। पाकिस्तान ने यह समझौता उन परिस्थितियों में किया था, जब कुछ ही महीने पहले भारत से युद्ध में वह बुरी तरह हार चुका था। पूर्वी पाकिस्तान को बांग्लादेश बना कर भारत ने उसका भूगोल बादल दिया था। 93000 पाकिस्तानी भारत के युद्धबंदी थे और करीब 5000 वर्ग मील पाकिस्तानी जमीन पर भारत का कब्जा था।

3 दिसंबर, 1971 को शुरू हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद जनरल याहया खान को हटा कर जुल्फिकार अली भुट्टो पाकिस्तान के राष्ट्रपति बनाए गए थे। पाकिस्तान को शिमला समझौते के जरिए युद्धबंदी और जमीन वापस दिलाने का श्रेय उनके नाम ही दर्ज हुआ। इस समझौते की गवाह उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो भी थीं। हालांकि बेनजीर ने युद्ध की विभीषिका आंखों से नहीं देखी थी। उस दौरान वह हार्वर्ड में पढ़ाई कर रहीं थीं। वहां उन्होंने युद्ध का आंखों देखा हाल पढ़ा था। उन दिनों के हालात के बारे में उनके पिता जुल्फिकार अली भुट्टो ने उन्हें पूरी जानकारी दी थी। बेनजीर की दोस्त सामिया ने तो उन्हें युद्ध का आंखों देखा हाल लिख भेजा था। अपनी आत्मकथा 'डॉटर ऑफ डेस्टिनी' में बेनजीर ने उन खतों की बातों को दर्ज किया है।

पाकिस्तान के खत्म होने की नौबत- पिता ने बेनजीर को बताया था मुल्क का हाल

पिता के खत के हवाले से बेनजीर ने उस समय के हालात की भयावहता कुछ इस तरह बयां की है, 'पाकिस्तान खौफनाक परिस्थिति से गुजर रहा है। पाकिस्तानियों के हाथों पाकिस्तानियों के कत्ल का सिलसिला रुका नहीं है। अब भी खून बह ही रहा है। भारत के आक्रामक दखल से हालात और गंभीर हो गए हैं। आज के हालात से बच कर निकल गए, तभी पाकिस्तान अपने किसी मकसद के लिए जिंदा रहा पाएगा, वरना यह तबाही हमें पूरी तरह खत्म कर देगी।'

यह तबाही 3 दिसंबर, 1971 को आ चुकी थी। ईलियट हॉल में यह खबर पढ़ते ही बेनजीर के मुंह से चीख निकल पड़ी थी, 'नहीं'। उन्होंने अखबार दूर फेंक दिया था। खबर पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान पर भारत के हमले की थी। कराची बंदरगाह पर पाकिस्तानी युद्धपोतों को भारत की मिसाइलें तबाह कर रही थीं। भारतीय विमान पाकिस्तानी शहरों के महत्वपूर्ण ठिकाने ध्वस्त कर रहे थे। पाकिस्तान के हथियार इन हमलों के आगे टिकने लायक नहीं थे। पाकिस्तान का वजूद ही खतरे में था।

बेनजीर ने यह सब अखबारों में पढ़ा। उधर कारांची से उनके दोस्त सामिया ने आंखों देखा हाल लिख कर भेजा। यह तो और भी दिल दहलाने वाला था।

पाकिस्तानी सरकार ने अपने लोगों को भारत के हमले की जानकारी तक नहीं दी थी

सामिया ने लिखा, 'नसीब ठीक है कि तुम यहां नहीं हो। हर रात हवाई हमले हो रहे हैं। हमने खिड़कियों पर काला कागज लगा रखा है, ताकि कमरे की रोशनी बाहर न जाए। स्कूल, यूनिवर्सिटी बंद हैं। पूरा दिन सिवाय फिक्र के कुछ करने के लिए नहीं होता। अखबार हमेशा की तरह कोई खबर नहीं दे रहे। यहां तक कि पूर्वी पाकिस्तान पर भारत के हमले की जानकारी भी हमें तब मिली जब किसी ने दरवाजे पर आकर शोर मचाया- जंग छिड़ गई! जंग!! सात बजे के समाचार में कहा जा रहा है कि हम जीत रहे हैं, लेकिन बीबीसी एशिया बता रहा है कि हमें कुचला जा रहा है। बीबीसी पूर्वी पाकिस्तान में सेना के द्वारा किए गए जुल्मों के बारे में बता रहा है। इस बारे में तुम्हें कुछ पता है?

करांची में तुम्हारा 13 साल का भाई शाह नवाज बड़ा उत्साहित है। उसने सिविल डिफेंस जॉइन कर ली है और रोज रात को मोटरसाइकल से गश्त लगाते हुए लोगों को बत्तियां बुझा कर रखने के लिए कहता रहता है। बाकी सब तो डरे-सहमे जी रहे हैं। एक बार तो जब हमला हुआ, मैं सनम के साथ तुम्हारे ही घर पर थी। तुम्हारी अम्मी ने हमें सीढ़ियों के नीचे डाइनिंग रूम में ले जाकर छिपाया। वहां कोई खिड़की नहीं थी। घर पर तो मैं अम्मी के साथ ही सोती हूं। हम दोनों बड़े ही नर्वस रहती हैं। तीन बम तो हमारे घर की गली में भी गिर गए थे। खुशकिस्मती रही कि वे फटे नहीं। हमारे बगीचे में कांच ही कांच बिखरे पड़े हैं।
भारत के विमान खिड़कियों के इतने नजदीक से उड़ते हैं कि पायलट को साफ देखा जा सकता है! लेकिन हमारी वायु सेना कहीं जवाब देते नहीं दिखती। तीन रात पहले एक धमाका इतना तेज हुआ कि मुझे लगा पड़ोसी के घर हमला हो गया। मैं छत पर गई। पूरा आसमान गुलाबी दिख रहा था। सुबह पता चला कि कराची बंदरगाह पर ऑयल टर्मिनल को मिसाइलों से निशाना बनाया गया था। वह आग अभी तक धधक रही है। हमें उम्मीद है कि अमरीका हमारी मदद को आगे आए।'

Updated on:
03 Jul 2026 02:54 pm
Published on:
03 Jul 2026 02:21 pm