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4 साल में 34 किताबों को रक्षा मंत्रालय की हरी झंडी, सिर्फ जनरल नरवणे की किताब क्यों अटकी? RTI में बड़ा खुलासा

संसद के बजट सत्र के दौरान पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे कि किताब पर सियासी बवाल जारी है। RTI में खुलासा हुआ है कि बीते चार साल में 35 किताबें टाइटल मंजूरी के लिए रक्षा मंत्रालय पहुंची, जिनमें से सिर्फ 1 किताब पब्लिश नहीं हुई।

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Feb 07, 2026
पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे की किताब का हुआ जिक्र

भारतीय रक्षा मंत्रालय के पास बीते 4 सालों में 35 किताबों के टाइटल मंजूरी के लिए उनके पास आए थे। इनमें से 34 किताबों को मंजूरी मिल गई। सिर्फ एक पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की आत्मकथा को मंत्रालय से हरी झंडी का इंतजार है। इस किताब को लेकर अब तक न तो रक्षा मंत्रालय और न ही पब्लिशर, पेंगुइन रैंडम हाउस ने कोई जानकारी दी है।

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जनरल एनसी विज की किताब को मिली हरी झंडी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 17 सितंबर 2024 को रक्षा मंत्रालय ने RTI के जवाब में ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित (रिटायर्ड) की किताब 'लीडरशिप बियॉन्ड बैरक्स' को "प्रक्रियाधीन" बताया था। उस दौरान नवरने की 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' और जनरल एनसी विज की किताब 'अलोन इन द रिंग' को भी हरी झंडी नहीं मिली थी, लेकिन कुछ समय बाद ब्रिगेडियर जीवन राजपुरोहित और जनरल एनसी विज की किताब को हरी झंडी मिल गई।

कारगिल युद्ध के दौरान मिलिट्री ऑपरेशंस के डायरेक्टर जनरल रहे एनसी विज की किताब मई 2025 में रिलीज हुई, जबकि ब्रिगेडियर राजपुरोहित की किताब प्रकाशन का इंतजार कर रही है। RTI के जवाब से पता चलता है कि रिटायर्ड सैन्य कर्मियों से प्रकाशन की मंजूरी के लिए अपीलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।

2023 में 16 और 2024 में 14 किताबों को मिली मंजूरी

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में रक्षा मंत्रालय में मंजूरी के लिए सिर्फ एक किताब आई थी। 2021 में कोई किताब मंजूरी के लिए नहीं आई, जबकि 2022 में चार, 2023 में 16, 2024 में 14 किताबें मंजूरी के लिए आई थी। जिनमें से एक पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब भी थी।

RTI में प्राप्त की गई जानकारी के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एस ए हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल एस के गेडॉक, लेफ्टिनेंट जनरल एस आर आर अयंगर, मेजर जनरल (डॉ.) अशोक कुमार, मेजर जनरल शशिकांत पित्रे, मेजर जनरल आर के शर्मा, मेजर जनरल जी डी बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल योगेश कुमार जोशी की किताबों को प्रकाशित करने के लिए हरी झंडी मिल गई है।

2019 से 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे

जनरल नरवणे 2019 से 2022 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे थे। उसी दौरान चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ गया था। उन्होंने अपनी आत्मकथा, जिसके कुछ अंश 2023 में PTI द्वारा प्रकाशित किए गए थे। उसके अनुसार, गलवान में चीन के साथ तनाव बढ़ने पर पूर्वी लद्दाख में रेचिन ला क्षेत्र की ओर बढ़ते चीनी टैंकों को लेकर जब सैन्य प्रमुख नरवणे ने राजनाथ सिंह से बात की तो पीएम मोदी की तरफ से कहा गया कि जो उचित समझो वह करो। वहीं, गलवान झड़प के बाद अगले कई महीनों तक LAC पर तनाव बना रहा और अगस्त 2020 से जनवरी 2021 के बीच राजनयिक स्तर की बातचीत हुई।

नरवणे की किताब पर मचे सियासी बवाल के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार पूर्व सेना प्रमुख का बहुत सम्मान करती है, और यह विपक्ष है जो उनका मजाक उड़ाने की कोशिश कर रहा है।

Published on:
07 Feb 2026 09:50 am
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