8th केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर सरकार ने सुझाव प्रक्रिया शुरू कर दी है। MyGov के जरिए कर्मचारी वेतन, पेंशन और भत्तों पर राय दे सकते हैं। इससे अंतिम सिफारिशों और सैलरी ढांचे पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने आठवें केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ा दिया है। लंबे समय से वेतन, पेंशन और भत्तों में संशोधन की मांग कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह अहम संकेत माना जा रहा है। सरकार ने आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और मायगव प्लेटफॉर्म के जरिए आम लोगों और कर्मचारियों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। मुख्य खबर यह है कि 8th केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) से जुड़े मुद्दों पर अब सीधे राय दर्ज करने की सुविधा शुरू हो गई है, जिससे अंतिम सिफारिशों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
केंद्र सरकार ने साफ किया है कि 8th CPC से जुड़े सभी सुझाव केवल ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। ईमेल, पत्र या किसी अन्य माध्यम से भेजे गए सुझावों पर विचार नहीं होगा। यह सुविधा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है ताकि देशभर के कर्मचारी आसानी से भाग ले सकें। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि सुझाव देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और सभी प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण सामूहिक रूप से किया जाएगा। राय देने की अंतिम तारीख 16 मार्च 2026 तय की गई है, जिसके बाद पोर्टल बंद कर दिया जाएगा।
8th CPC में केवल वेतन बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि पूरे वेतन ढांचे की समीक्षा की जा रही है। फिटमेंट फैक्टर कितना हो, सालाना इंक्रीमेंट का फार्मूला क्या हो और टॉप लेवल सैलरी की तुलना किस आधार पर की जाए, जैसे सवाल शामिल हैं। इसके अलावा महंगाई, आर्थिक विकास और कर्मचारियों की जीवन लागत को भी ध्यान में रखा जा रहा है। पेंशनर्स के लिए समान लाभ और भविष्य की सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी सुझाव मांगे गए हैं, जिससे आयोग की सिफारिशें संतुलित बन सकें।
आठवें वेतन आयोग की घोषणा जनवरी 2025 में की गई थी और इसे औपचारिक रूप से 3 नवंबर 2025 को अधिसूचित किया गया। आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई तेजी से बढ़ रही है, इसलिए स्पष्ट टाइमलाइन और एरियर की स्थिति साफ होनी चाहिए। माना जा रहा है कि जनवरी 2026 से एरियर मिलेगा या नहीं, इस पर भी व्यापक चर्चा होगी। कुल मिलाकर यह प्रक्रिया आने वाले दशक की सैलरी संरचना तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।