
IAF Chief AP Singh Predictive AI Digital Twins Defence Planning: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा है कि आधुनिक युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वायुसेना भविष्य की परिस्थितियों का अनुमान लगाने और बेहतर फैसले लेने के लिए प्रेडिक्टिव एआई और डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने शनिवार को कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आज बड़ी मात्रा में जानकारी उपलब्ध है। इस डेटा का इस्तेमाल करके यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आगे क्या होने की संभावना है। इससे भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से बेहतर तैयारी की जा सकती है।
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने बताया कि वायुसेना भविष्य की संभावनाओं को समझने के लिए डिजिटल ट्विन तैयार कर रही है। इसके जरिए किसी वास्तविक स्थिति या प्रणाली का आभासी मॉडल बनाया जाता है।
इस मॉडल की मदद से अलग-अलग परिस्थितियों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे संभावित नतीजों को समझने और उसी के अनुसार योजना बनाने में मदद मिलती है।
वायुसेना प्रमुख ने अलग-अलग संस्थाओं और लोगों के बीच जानकारी साझा करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध डेटा का बेहतर इस्तेमाल करके पिछली गलतियों से सीखा जा सकता है।
उन्होंने कहा, “गलती किसी ने भी की हो, हमें उससे सीखना चाहिए और उसे दोबारा दोहराने से बचना चाहिए।”
उनके मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध जानकारी को साझा करने से रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सकता है।
अमर प्रीत सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध लगातार तकनीक पर निर्भर होता जा रहा है। ऐसे में सशस्त्र बलों को नई तकनीकों को अपनाते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल सैन्य अभियानों, निगरानी, प्रशिक्षण और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।
वायुसेना प्रमुख ने कहा कि मजबूत रक्षा क्षमता के लिए नई तकनीक अपनाने के साथ-साथ सहयोग और नए प्रयोग भी जरूरी हैं। अलग-अलग अनुभवों से सीखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल केवल सैन्य क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका उपयोग भविष्य की संभावित परिस्थितियों और चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए भी किया जाना चाहिए।
भारतीय वायुसेना अपनी आधुनिकीकरण प्रक्रिया के तहत नई तकनीकों और स्वदेशी प्रणालियों को शामिल करने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य बदलती सुरक्षा जरूरतों के बीच वायुसेना की परिचालन क्षमता और तैयारी को मजबूत करना है।