
पूर्व वाइस एयर चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर (फोटो - @DefenseNewsIN/X)
Nagesh Kapoor on Tejas Mk-2: भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी के बीच तेजस Mk-2 और स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रम की समयसीमा को लेकर पूर्व वाइस एयर चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत को आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत है और इसके लिए बहुत लंबे समय तक इंतजार नहीं किया जा सकता है।
कपूर ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की काम की रफ्तार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि HAL जिस गति से काम कर रहा है वह भारतीय वायुसेना की उम्मीदों के मुताबिक नहीं है।
जब कपूर से पूछा गया कि अगर तेजस Mk-2 2030 के दशक के मध्य में बड़ी संख्या में वायुसेना में शामिल होता है तो क्या उस समय चौथी पीढ़ी के विमान पर निर्भर रहना सही होगा जबकि चीन छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की दिशा में आगे बढ़ चुका है और पाकिस्तान पांचवीं पीढ़ी के विमान पर विचार कर रहा है? इस पर उन्होंने साफ कहा कि ऑपरेशन के लिहाज से यह पर्याप्त नहीं होगा। भारत के पास फिलहाल पांचवीं या छठी पीढ़ी का कोई लड़ाकू विमान नहीं है। वहीं चीन पांचवीं पीढ़ी के J-20 विमानों की संख्या तेजी से बढ़ा रहा है।
कपूर ने यह भी माना कि तेजस Mk-2 की अपनी उपयोगिता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में केवल पांचवीं और छठी पीढ़ी के विमानों के भरोसे पूरी वायुसेना की जरूरत पूरी नहीं की जा सकती।
उनके मुताबिक, आधुनिक विमानों की संख्या सीमित रहेगी और देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनाती के लिए चौथी पीढ़ी के विमानों की जरूरत बनी रहेगी। ऐसे में तेजस Mk-2 बाकी कमी को पूरा करने में भूमिका निभा सकता है।
पूर्व वाइस एयर चीफ ने स्वदेशी लड़ाकू विमानों के विकास का समर्थन करते हुए कहा कि स्वदेशी तकनीक सही रास्ता है लेकिन सवाल यह है कि इसके लिए भारत कब तक इंतजार करता रहेगा। उन्होंने तेजस Mk-1A की डिलीवरी में देरी का भी जिक्र किया। उनका सवाल था कि जिस विमान को कई साल पहले कुछ तय क्षमताओं के साथ देने का वादा किया गया था, उसकी डिलीवरी अब तक क्यों नहीं हो पाई।
भारतीय वायुसेना ने 2021 में करीब 46 हजार करोड़ रुपये की लागत से 83 तेजस Mk-1A विमानों का ऑर्डर दिया था। इसके बाद सितंबर 2025 में 97 और तेजस Mk-1A विमानों के लिए करीब 62,370 करोड़ रुपये की डील की घोषणा की गई।
हालांकि, पहले ऑर्डर किए गए Mk-1A विमानों की डिलीवरी में देरी हुई है। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका से मिलने वाले जनरल इलेक्ट्रिक F404-IN20 इंजन की सप्लाई में देरी बताई गई है। इसके अलावा विमान के रडार, एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों के एकीकरण से जुड़े काम भी चल रहे हैं।
तेजस Mk-2 को तेजस Mk-1A से ज्यादा आधुनिक विमान के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसकी पहली उड़ान पहले 2022 में प्रस्तावित थी, लेकिन समयसीमा कई बार आगे बढ़ी। अब HAL के जुलाई 2026 के अपडेट के मुताबिक, तेजस Mk-2 की पहली उड़ान मार्च से जुलाई 2027 के बीच होने की उम्मीद है। कपूर ने HAL की काम करने की गति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी जिस रफ्तार से काम कर रही है, वह भारतीय वायुसेना की अपेक्षाओं से काफी कम है।
कपूर ने भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम को लेकर भी मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई। AMCA भारत का स्वदेशी स्टील्थ फाइटर प्रोजेक्ट है।
उनका कहना है कि इसके विकास और परीक्षण में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में जब विमान तैयार होगा तब उसके शुरुआती वर्जन उस समय की तकनीकी जरूरतों के मुकाबले पीछे रह सकते हैं।
कपूर ने भारत को अंतरराष्ट्रीय फाइटर जेट कार्यक्रमों में साझेदारी पर भी विचार करने की सलाह दी। उन्होंने FCAS और GCAP जैसे अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों का उदाहरण दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दुनिया अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर काम कर रही है, तो भारत को सिर्फ Gen-4 या Gen-4.5 के चरणों तक सीमित क्यों रहना चाहिए।
FCAS फ्रांस, जर्मनी और स्पेन का संयुक्त कार्यक्रम है जबकि GCAP ब्रिटेन, इटली और जापान का अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने वाला कार्यक्रम है। कपूर का सुझाव है कि भारत को ऐसे किसी कार्यक्रम में साझेदारी पर विचार करना चाहिए, जहां विकास और डिलीवरी का अनुभव पहले से मौजूद हो।
Updated on:
22 Aug 2026 06:42 pm
Published on:
22 Aug 2026 06:42 pm
