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Asaduddin Owaisi: लंदन से लॉ की डिग्री, मोदी लहर में भी नहीं डिगे, मुस्लिम वोटरों में सर्वाधिक लोकप्रिय, ऐसा रहा है AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी का सफर

Lok Sabha Elections 2024 Hyderabad Seat Asaduddin Owaisi: लोकसभा चुनाव 2024 के रण में असदुद्दीन ओवैसी एक बार फिर मैदान में हैं। पिछले 40 सालों से हैदराबाद लोकसभा सीट पर ओवैसी परिवार का कब्जा है। 59 फीसदी मुस्लिम वोटर्स वाले इस लोकसभा सीट असदुद्दीन ओवैसी लगातार 4 बार और उनके पिता सलाहुद्दीन ओवैसी ने लगातार 6 बार सांसद चुने गए हैं। आइये जानते हैं AIMIM चीफ असद्दुदीन ओवैसी के बारे में...

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Lok Sabha Elections 2024 Hyderabad Seat Asaduddin Owaisi: चार बार के सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी को हैदराबाद लोकसभा सीट जीतने के लिए कभी मेहनत नहीं करना पड़ा। हर बार आसानी से जीत लेते हैं। आसान जीत कहने का मतलब है कि जीत का अंतर भी लाखों में रहा। अब तक कोई भी पार्टी उनके सामने इतना दमदार उम्मीदवार ही नहीं उतार पाई कि उन्हें कोई चुनौती मिले। पिछले 20 साल यानी चार लोकसभा चुनाव से वो अजेय हैं। उनके पिता सलाहुद्दीन ओवैसी भी 20 साल तक आसानी से जीतते आए थे। लेकिन 18वीं लोकसभा चुनाव में मामला अलग है। इस बार उनका मुकाबला भाजपा की डॉ. माधवी लता से है। पीएम मोदी और अमित शाह से उन्हें फुल सपोर्ट मिल रहा है। माधवी भले ही राजनीति में नई हैं, लेकिन वाकपटुता में निपुण हैं। मीडिया का भी उन्हें फुल अटेंशन मिल रहा है। इसलिए पांचवीं बार जीतने के लिए असदुद्दीन ओवैसी को भीषण गर्मी में पसीना बहा रहे हैं।

ओवैसी को विरासत में मिली सियासत

हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी को सियासत विरासत में मिली। 13 मई 1969 को जन्मे ओवैसी के पिता सलाहुद्दीन ओवैसी भी सियासत का एक चेहरा थे और एक दो बार नहीं बल्कि 6 बार हैदराबाद के सांसद रहे। सलाहुद्दीन ओवैसी भी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन के अध्यक्ष लंबे समय तक रहे। फरहीन के साथ ओवैसी 1996 में परिणय सूत्र में बांध गए।

ओवैसी ने लंदन से की पढ़ाई

फायरब्रांड नेता के तौर पर मुस्लिम वर्ग में पहचान बनाने वाले असदुद्दीन ओवैसी युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। एक बार टीवी शो के दौरान उनपर एक पत्रकार ने आरोप लगाते हुए कहा कि आप बीजेपी की बी टीम हैं और आपकी पार्टी हमेशा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को फायेदा पहुंचाती है। क्या आप दोनों के बीच को डील हुई है। इसका जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा था हां, आप सही कह रहे हैं। यह डील आपके ही घर पर हुई थी और हमने डील के बाद साथ में खाना भी खाया था। उनके इस जवाब को सुन पूरा हॉल हंसने लगा था। ओवैसी को स्पीच और तर्क के साथ बात करने के लिए जाना जाता है। बता दें कि ओवैसी की पढ़ाई हैदराबाद में ही हुई, इसके बाद वह लॉ की पढ़ाई के लिए लंदन चले गए।

Owaisi in Hyderabad

हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र का लेखा-जोखा

हैदराबाद लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनके नाम मलकपेट, कारवां, गोशामहल, चारमीनार, चंद्रयानगुट्टा, याकूतपुरा और बहादुरपुरा हैं। यहां पुरुष वोटरों की संख्या 9,45,277 है, जबकि महिला वोटरों की संख्या 10,12,522 है। 17वीं लोकसभा चुनाव में यहां कुल वोटरों की संख्या 8,77,872 थी, जिनमें से पुरुष मतदाता 4,79,564 और महिला मतदाता 3,97,698 थीं। 2019 में यहां मतदान प्रतिशत 44.84% था। असदुद्दीन ओवैसी को इस चुनाव में कुल 5 लाख 17 हजार 471 वोट मिले थे।

माधवी लता का तीर सबको चुभा

ओवैसी को चुनौती दे रही बीजेपी प्रत्याशी माधवी लता ने रामनवमी के दिन बेगम बाजार इलाके में जो तीर-धनुष वाला निशाना साधा उसकी गूंज चौतरफा है। माधवी के इस कृत्य से ओवैसी भड़क गए और उन्होंने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। ओवैसी ने तब कहा था, "यह भाजपा की घृणा फैलाने वाली मानसिकता का सबूत है।" हालांकि मामला बढ़ता देख माधवी ने माफी मांग ली। माधवी के नरम पड़ने की वजह पसमांदा मुसलमान हैं, जिनका समर्थन पाने की वह पूरी कोशिश कर रही हैं।

कांग्रेस-बीआरएस के प्रत्याशी में नहीं दिख रहा दम

जिस तरह के उम्मीदवार कांग्रेस और बीआरएस ने ओवैसी के सामने उतारे हैं उसे देख कर कहा जा सकता है कि पिछले दरवाजे से उन्हें भाजपा को हराने के लिए सपोर्ट किया जा रहा है। बता दें कि ओवैसी की पार्टी को भाजपा की बी-टीम बताने वाली कांग्रेस आज तक उनके खिलाफ कभी मजबूत प्रत्याशी नहीं उतार पाई। कमोबेश यही स्थिति बीआरएस की भी रही है। यहीं कारण है कि ओवैसी 2014 और 2019 के मोदी लहर में भी नहीं डिगे।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ओवैसी खुलेआम कुछ भी कहें, लेकिन तेलंगाना में जिसकी सरकार होती है, उससे मिलकर ही चलते हैं। उदहारण से आप ऐसे समझ सकते हैं कि पहले जब बीआरएस की सरकार की तो ओवैसी उनके करीब थे, अब कांग्रेस की सरकार है तो ओवैसी इनके करीब हैं। बीजेपी नेता माधवी लता कहती हैं, कांग्रेस ने जिलाध्यक्ष मो. वलीउल्लाह समीर को डमी कैंडिडेट के रूप में ही उतारा है और बीआरएस से जी. श्रीनिवास यादव भी बस नाम के ही प्रत्याशी हैं।

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