Ajit Doval Salary: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 फरवरी 2026 को दिल्ली में नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) परिसर का उद्घाटन करेंगे। यह परिसर सेवा तीर्थ नाम से जाना जाएगा।
PMO Shifting to Seva Teerth: देश के PMO में आजादी के बाद पहली बार बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 95 साल पुरानी साउथ ब्लॉक से पीएम मोदी का ऑफिस अब नए आधुनिक परिसर 'सेवा तीर्थ' में शिफ्ट हो रहा है। इसका उद्घाटन आज (13 फरवरी 2026) पीएम मोदी करेंगे। नए ऑफिस में NSA अजीत डोभाल का ऑफिस भी होगा। आइए जानते हैं अजीत डोभाल की सैलरी मिलती है और उन्हें क्या-क्या सुविधाएं दी जाती है।
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत बने इस परिसर में PMO के साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय भी एक छत के नीचे होंगे, जिससे प्रशासनिक कामकाज तेज और बेहतर होगा, और इसी में देश के सबसे ताकतवर सलाहकार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का ऑफिस भी होगा।
NSA के कैबिनेट मंत्री दर्जे वाले पद पर अजीत डोभाल की बेसिक सैलरी ₹1,37,500 प्रति माह है, जबकि महंगाई भत्ता, HRA और अन्य भत्तों के साथ कुल मासिक वेतन लगभग 2.5 लाख रुपये है, इसके अलावा उन्हें Z+ सुरक्षा, सरकारी बंगला, वाहन और अन्य उच्च स्तरीय सुविधाएं भी मिलती हैं। यह शिफ्ट न सिर्फ औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का प्रतीक है, बल्कि देश की सुरक्षा और शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अजीत डोभाल 1968 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी बने थे। उन्होंने केरल कैडर से अपनी सेवा की शुरुआत की थी और अपने शानदार करियर के दौरान कई चुनौतीपूर्ण खुफिया मिशनों का नेतृत्व किया। वह न केवल एक उत्कृष्ट पुलिस अधिकारी रहे, बल्कि बाद में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक भी बने।
अजीत डोभाल को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, जो शांतिकाल का दूसरा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार है। 1989 में मिला यह सम्मान उन्हें देश का पहला और एकमात्र पुलिस अधिकारी बनाता है, जिसे यह सैन्य पुरस्कार प्राप्त हुआ। मुख्य रूप से ऑपरेशन ब्लैक थंडर-II (1988) में उनकी बहादुरी और खुफिया भूमिका के लिए दिया गया, जहां उन्होंने स्वर्ण मंदिर में घुसे खालिस्तानी उग्रवादियों के खिलाफ महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई और ऑपरेशन की सफलता में अहम योगदान दिया।
अजीत डोभाल, भारत के प्रसिद्ध 'जेम्स बॉन्ड' कहे जाने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी ने 2004-2005 तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के चीफ के रूप में काम किया। 1968 बैच के केरल कैडर के इस अधिकारी ने 1972 में आईबी जॉइन किया और पाकिस्तान में गुप्त मिशनों सहित कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में हिस्सा लिया। आईबी चीफ रहते उन्होंने संगठन को मजबूत किया और राष्ट्रीय सुरक्षा के संवेदनशील अभियानों का नेतृत्व किया। 2014 से वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) हैं, जहां वे भारत की सुरक्षा नीतियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अजित डोभाल ने 1980 के दशक में पाकिस्तान में एक बेहद जोखिम भरा गुप्त मिशन अंजाम दिया। कई सालों (करीब 6-7 वर्ष) तक वे भिखारी का भेष धारण कर कहूटा न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के आसपास घूमते रहे, जहां पाकिस्तान अपना गुप्त परमाणु कार्यक्रम चला रहा था। सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि कुत्ते भी अजनबियों को पहचान लेते थे, लेकिन डोभाल ने भिखारी बनकर नाई की दुकान पर वैज्ञानिकों के बाल इकट्ठा किए, जिनकी जांच से यूरेनियम के निशान मिले। इस खुफिया जानकारी ने पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को कई वर्षों (कुछ रिपोर्ट्स में 15 साल) पीछे धकेल दिया और भारत को महत्वपूर्ण रणनीतिक लाभ पहुंचाया।