Akola ASI Suspended: महाराष्ट्र के अकोला में एक एएसआई द्वारा महिला कैदी की बेटी से संबंध बनाने के बदले पैसे देने का प्रस्ताव देने का गंभीर मामला सामने आया। शिकायत के बाद आरोपी को निलंबित कर दिया गया, लेकिन वह फरार है।
Maharashtra ASI Misconduct Case: महाराष्ट्र के अकोला जिले से पुलिस महकमे को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) पर महिला कैदी की बेटी से यौन संबंध बनाने की मांग करने और बदले में 10,000 रुपये देने का लालच देने का आरोप लगा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, निलंबन के बाद आरोपी ASI फरार बताया जा रहा है।
यह घटना अकोला के सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन की है। पुलिस के अनुसार, लगभग 80 लाख रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार एक महिला को लॉकअप में रखा गया था। घटना के दिन 54 वर्षीय एएसआई ड्यूटी पर तैनात था। आरोप है कि उसने अपनी वर्दी और पद का दुरुपयोग करते हुए महिला कैदी से आपत्तिजनक प्रस्ताव रखा। उसने कथित तौर पर महिला से उसकी बेटी को अपने पास भेजने के लिए कहा और इसके बदले 10,000 रुपये देने का लालच दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी एएसआई ने महिला से कहा तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हारी बेटी भी जरूर खूबसूरत होगी। उसे मेरे पास भेज दो, मैं तुम्हें इसके बदले 10,000 रुपये दूंगा। पुलिस की इस हरकत का पता लगते ही मामला और भी गंभीर हो गया।
पीड़ित महिला ने साहस दिखाते हुए तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी एएसआई को निलंबित कर दिया।
आरोपी के खिलाफ महिला की लज्जा भंग करने सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। हालांकि, निलंबन के बाद से ही वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी का रिकॉर्ड पहले भी संदिग्ध रहा है। करीब 10 साल पहले उसके खिलाफ महिलाओं के प्रति अनुचित व्यवहार और पारिवारिक विवादों से जुड़े आरोप सामने आ चुके हैं।
इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने संज्ञान लेते हुए राज्य पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने निर्देश दिया है कि आरोपी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो, सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए। आयोग ने इस कृत्य को सत्ता का घोर दुरुपयोग और मानवीय गरिमा का उल्लंघन बताया है।