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किसी भी महिला के साथ लिव-इन में रह सकता है शादीशुदा शख्स, हाई कोर्ट ने दे दी इजाजत

Allahabad High Court: लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि शादीशुदा पुरुष का बालिग महिला के साथ लिव-इन में रहना जुर्म नहीं…नीचे पढ़ें पूरी अपडेट
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Mar 27, 2026
ओबीसी आरक्षण: दो केस सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, बाकी 52 पर हाईकोर्ट में दो अप्रेल को सुनवाई
ओबीसी आरक्षण: दो केस सुनेगा सुप्रीम कोर्ट, बाकी 52 पर हाईकोर्ट में दो अप्रेल को सुनवाई (File Photo)

Allahabad High Court Updates: अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या शादीशुदा व्यक्ति किसी दूसरी महिला के साथ रह सकता है? क्या यह कानूनन सही है? अब इस पर बड़ा फैसला सुनाते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर महिला बालिग है और अपनी मर्जी से रह रही है, तो इसे अपराध नहीं माना जाएगा। इस स्थिति में सम्बंधित व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं होगी। उसके ऊपर मुकदमा नहीं चलेगा।

यह मामला तब सामने आया जब शाहजहांपुर में एक कपल के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया गया था। कोर्ट ने न सिर्फ इस कार्रवाई पर रोक लगाई, बल्कि पुलिस को निर्देश दिया कि दोनों को सुरक्षा दी जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल ये पूरा मामला शाहजहांपुर के जैतीपुर थाने का है। अनामिका की मां कांति ने 8 जनवरी 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, उन्होंने आरोप लगाया कि नेत्रपाल उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने नेत्रपाल के खिलाफ बीएनएस की धारा 87 के तहत केस दर्ज कर लिया।

लेकिन मामला तब पलट गया, जब अनामिका ने कोर्ट से केस रद्द करने की मांग की। अनामिका और नेत्रपाल ने अदालत को बताया कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं। दिलचस्प बात यह रही कि खुद मां की एफआईआर में भी अनामिका की उम्र 18 साल लिखी थी, जिससे यह साबित हो गया कि वह बालिग है।

वहीं, दूसरे पक्ष के वकील ने कहा कि नेत्रपाल पहले से शादीशुदा है, इसलिए उसका किसी दूसरी महिला के साथ रहना गलत है। लेकिन अदालत ने इस दलील को नहीं माना और साफ कहा कि अगर दो बालिग अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं, तो इसे अपराध नहीं कहा जा सकता।

कोर्ट ने SP को ठहराया जिम्मेदार

सुरक्षा को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि शाहजहांपुर के पुलिस कप्तान (SP) को व्यक्तिगत रूप से इसके जिम्मेदार हैं। कोर्ट ने आगे ये भी कहा कि इस जोड़े की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी शाहजहांपुर के पुलिस कप्तान (SP) की होगी और यह पुलिस का कर्तव्य है कि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचे।

अदालत ने यह भी याद दिलाया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट पहले ही 2018 के ‘शक्ति वाहिनी’ मामले में ऐसे मामलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुका है।

इसके साथ ही कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश दिया कि इस फैसले की जानकारी 24 घंटे के भीतर पुलिस अधीक्षक शाहजहांपुर और जैतीपुर थाने के प्रभारी तक पहुंचाई जाए। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

Updated on:
27 Mar 2026 05:08 pm
Published on:
27 Mar 2026 04:18 pm