भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। इंडियन ऑयल की सहायक कंपनी चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने पिछले माह की तुलना में अक्टूबर में रूसी तेल की खरीद आधी कर दी है।
भारत में तेल रिफाइन करने वाली कंपनियों ने रूसी तेल के आयात में कमी लाई है। देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनर और ईंधन खुदरा कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Indian Oil) के चेयरमैन अरविंदर सिंह सहनी ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा लगाए गए सभी प्रतिबंधों का पालन करेंगे, लेकिन कंपनी ने सीधे तौर पर यह नहीं बताया कि वह रूस की कंपनियों रॉसनेफ्ट और लुकोइल से सस्ता कच्चा तेल खरीदना बंद करेगी या नहीं।
इंडियन ऑयल ने जुलाई–सितंबर तिमाही में 7,610 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह लाभ मात्र 180 करोड़ रुपये था। कंपनी ने कहा कि इस मुनाफे की मुख्य वजह रिफाइनिंग मार्जिन में तेजी रहा, जोकि इस बार 10.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल यही आंकड़ा 1.8 डॉलर प्रति बैरल था।
मीडिया ने जब इंडियन ऑयल के चेरमैन अरविंदर सिंह सहनी से पूछा कि क्या रूस से खरीदे गए सस्ते तेल की वजह से मुनाफा बढ़ा, तो उन्होंने कहा कि कंपनी ने पहले भी बिना रूसी कच्चे तेल के ऐसे अच्छे परिणाम हासिल किए हैं। यह बाजार की स्थिति, क्रैक मार्जिन, लागत में कमी और इफिसिएंसि इंप्रूवमेंट (दक्षता सुधार) का परिणाम है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के पालन की बात कही थी। अब इंडियन ऑयल ने भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के पालन की बात कही है। भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम आमतौर पर ग्लोबल टेंडर के जरिए मध्यस्थों से रूसी तेल खरीदती रही हैं, जबकि निजी कंपनियां सीधे सौदे करती हैं।
इंडियन ऑयल की सहायक कंपनी चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (CPCL) द्वारा रूसी तेल की खरीद आधी पर आ गई। यह सारा घटनाक्रम अमेरिकी प्रतिबंधो के ऐलान से मेल खाता है।
रोसनेफ्ट रूस की सरकारी है। यह तेल की खोज, रिफाइनिंग और बिक्री में एक्सपर्ट है। लूकोइल एक निजी स्वामित्व वाली इंटरनेशनल कंपनी है। यह रूस और विदेशों में तेल और गैस की खोज व रिफाइनिंग का काम करती है। अमेरिका ने इन दोनों कंपनियों की 50% या उससे ज्यादा की डायरेक्ट या इनडायरेक्ट हिस्सेदारी वाली 36 सहायक कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 21 नवंबर तक विदेशी कंपनियों को रोसनेफ्ट और लूकोइल के साथ लेन-देन खत्म करने के निर्देश दिए हैं। अगर पालन नहीं किया गया, तो जुर्माना, ब्लैकलिस्टिंग या व्यापार प्रतिबंध लग सकते हैं।