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Brics Summit में पुतिन ने ‘आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ का जिक्र किया, भारत इस पर क्या कर रहा?

पुतिन ने BRICS समिट में आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का जिक्र किया। साथ ही, इशारों ही इशारों में G7 देशों पर निशाना भी साधा। क्या है आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, भारत इस पर क्या कर रहा?
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PM Modi Putin Meeting
नरेंद्र मोदी-व्लादिमीर पुतिन(फोटो-ANI)

Putin BRICS Summit: नई दिल्ली ब्रिक्स के 18वें शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहा है। इस शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी पहुंचे। यहां उन्होंने ऐसी बात कह दी कि यूरोप से लेकर अमेरिका के थिंक टैंक तक के कान खड़े हो गए। ब्रिक्स फोरम को संबोधित करते हुए पुतिन ने साफ तौर पर कहा कि दुनिया बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। पुराने ताकतवर देशों का दबदबा अब खत्म हो रहा है। नई ताकतें वैश्विक जगत में जगत बना रही हैं।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने भाषण में कहा कि रूस या BRICS किसी को अलग-थलग करने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि पुराने और नए दोनों तरह के साझेदारों के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद लगाए गए आर्थिक पाबंदियों का भी जिक्र किया। साथ ही, नए व्यापारिक रास्ते को लेकर फोरम को संबोधित किया। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर जैसे भरोसेमंद व्यापारिक रास्तों को अब मजबूत करना होगा।

क्या है आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर

अमेरिका ईरान युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरुमध्य में नेवल ब्लॉकेड की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस वजह से तेल व गैस आपूर्ति की सप्लाई लाइन पर व्यापक रूप से असर पड़ा है। इस युद्ध की वजह से अब दुनिया के देश नए व्यापारिक मार्ग तलाशने में जुट गए हैं। आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर उन्हीं में से एक व्यापारिक रास्ता है। इसे लेकर चीन ने अपनी रणनीति पर काम करना भी शुरू कर दिया है। भारत की भी इस व्यापारिक रास्ते पर नजर है।

भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने मार्च 2022 में जो आर्कटिक नीति लॉन्च की थी, वह अब सिर्फ जलवायु और वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं रही। अब इसमें ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्ग, खनिज संसाधन और रूस से बेहतर कनेक्टिविटी जैसे पहलू भी जुड़ गए हैं। भारत 2008 से आर्कटिक में वैज्ञानिक तौर पर मौजूद है, और अब नॉर्दर्न सी रूट को आर्थिक व रणनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है।

खास बात यह है कि भारत के पास आर्कटिक तक पहुंचने का अपना रास्ता भी मौजूद है। चेन्नई से व्लादिवोस्तोक तक बन रहे ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर को भविष्य में नॉर्दर्न सी रूट से जोड़ने पर काम चल रहा है। 2025 में नई दिल्ली में हुए भारत-रूस व्यापार मंच के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच इस मार्ग पर सहयोग बढ़ाने को लेकर सहमति भी बनी थी। दोनों देशों ने इसके लिए एक साझा कार्यसमूह भी बनाया है, जो आइसब्रेकर निर्माण और ध्रुवीय जल में जहाज चलाने के प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेगा।

2030 तक 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत संग व्यापार को मजूबत करने पर भी बात कही है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने आपसी व्यापार को मौजूदा 65 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का फैसला किया है। वहीं, पीएम मोदी और पुतिन की 45 मिनट लंबी द्विपक्षीय बैठक के बाद दोनों नेता एक ही कार में सवार होकर निकले। इसके साथ ही, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नरेंद्र मोदी को दोनों देशों के 24वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का न्योता दिया, जिसे मोदी ने स्वीकार भी कर लिया। हालांकि इस सम्मेलन की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

Updated on:
12 Sept 2026 07:59 am
Published on:
12 Sept 2026 07:59 am
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