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पुतिन ने पश्चिम को दिखाया आईना! रूस पर 30,000 से ज्यादा प्रतिबंधों को लेकर BRICS में खुलकर बोले

BRICS बिजनेस फोरम में पुतिन ने रूस पर 30 हजार से ज्यादा प्रतिबंधों को लेकर पश्चिम पर निशाना साधा। भारत-रूस तेल कारोबार और अमेरिकी टैरिफ पर भी बढ़ी चिंता।
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नई दिल्ली

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Anand Prakash Yadav

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Updated: 12 Sep 2026, 5:51 AM IST

Putin BRICS speech

अमेरिका की टैरिफ धमकी के बीच पुतिन का पलटवार, photo source(IANS)

Russia Sanctions: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को खुलासा किया कि रूस पर अब तक 30,000 से ज्यादा प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, जो दुनिया के बाकी सभी देशों पर लगाए गए कुल प्रतिबंधों से दोगुने से भी ज्यादा हैं। उन्होंने वैश्विक आर्थिक दबाव और पश्चिमी देशों की 'बदसूरत' प्रतिस्पर्धी रणनीतियों की कड़ी निंदा की।

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के लीडर्स सेशन में बोलते हुए पुतिन ने पश्चिमी देशों पर आरोप लगाया कि वे व्यापारिक और कूटनीतिक दबाव को सरकारी स्तर के हस्तक्षेप में बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूस पर लगे प्रतिबंधों की संख्या बाकी दुनिया के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा है।

पाइपलाइन, ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और सेकेंडरी प्रतिबंधों पर निशाना

अमेरिका पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए पुतिन ने कहा कि व्यापारिक विवाद अब गंभीर भू-राजनीतिक टकराव में तब्दील हो चुके हैं। उन्होंने ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर की नाकेबंदी, पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाने, जहाजों की जब्ती, गैर-कानूनी प्रतिबंधों और उन देशों के खिलाफ सेकेंडरी प्रतिबंधों के खतरे का जिक्र किया, जो अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं।

आर्थिक संप्रभुता और नए साझेदारों पर जोर

चुनौतियों के बावजूद पुतिन ने दावा किया कि रूस ने विश्वसनीय साझेदारों के साथ संबंध मजबूत कर अपनी व्यापार रणनीति को सफलतापूर्वक बदला है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में रूस की आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से बेहतर रही है।

भारत के लिए क्यों अहम है मामला?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति विविध वैश्विक स्रोतों से भरोसेमंद और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करने पर आधारित है, जिसमें अमेरिका से आयात भी शामिल है। वहीं भारत में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने सेकेंडरी प्रतिबंधों को दंडात्मक "दबाव की रणनीति" बताया और कहा कि रूस भारत की जरूरत के अनुसार तेल आपूर्ति देने को तैयार है। इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट की औपचारिक शुरुआत से पहले पुतिन से मुलाकात कर व्यापारिक सहयोग और 'आर्थिक सहयोग कार्यक्रम 2030' पर चर्चा की।

अमेरिकी सीनेट का सैंक्शन बिल और भारत पर असर

पिछले महीने अमेरिकी सीनेट ने 86-11 वोटों से 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पारित किया, जो राष्ट्रपति ट्रंप को भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है, अगर वे रूस से बड़ी मात्रा में तेल-गैस आयात जारी रखते हैं। भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल है, जिससे यह बिल भारत-रूस ऊर्जा व्यापार के लिए चुनौती बन सकता है।