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समुद्र में मचेगी हलचल! इसरो की चेतावनी-3 बड़े चक्रवाती तूफान आने की आशंका, पिछले 44 से ज्यादा खतरनाक

इसरो के ताजा शोध में खुलासा- साल 2026 के आखिरी तीन महीनों में उत्तरी हिंद महासागर में आ सकते हैं 3 शक्तिशाली चक्रवाती तूफान, जो पिछले 44 तूफानों से भी ज्यादा तीव्र हो सकते हैं। जानें पूरी रिपोर्ट, वैज्ञानिक आधार और भारत पर संभावित असर।
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tropical cyclone prediction

इसरो ने अगले तीन महीने में 3 चक्रवाती तूफान आने की दी चेतावनी, photo source: ChatGpt

ISRO Cyclone Forecast: साल 2026 के आखिरी तीन महीनों के दौरान उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवाती गतिविधियां सामान्य से अधिक हो सकती हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अनुमान जताया है कि अक्टूबर से दिसम्बर के बीच तीन उष्णकटिबंधीय चक्रवात दस्तक दे सकते हैं।

बेंगलूरु से मिली जानकारी के अनुसार, आखिरी तीन महीनों के दौरान उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवाती गतिविधियां सामान्य से अधिक रहने की आशंका है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने अपने अनुमान में कहा है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच इस क्षेत्र में तीन उष्णकटिबंधीय चक्रवात सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि इसरो ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ये तूफान भारतीय तटों से टकराएंगे या समुद्र में ही सीमित रह जाएंगे। इसका सही अंदाजा तभी लग पाएगा जब संबंधित चक्रवाती सिस्टम पूरी तरह विकसित हो जाएंगे।

पिछले 44 तूफानों से ज्यादा हो सकती है तीव्रता

इसरो के अध्ययन में एक अहम बात यह सामने आई है कि इस बार बनने वाले चक्रवातों की संयुक्त शक्ति पहले से कहीं ज्यादा हो सकती है। रिसर्च के मुताबिक, आने वाले ये तूफान पिछले 44 दर्ज किए गए चक्रवाती तूफानों के मुकाबले अधिक तीव्र साबित हो सकते हैं। तीनों संभावित चक्रवातों का समवेत पावर डिसिपेशन इंडेक्स, जो किसी चक्रवात की कुल ऊर्जा और ताकत मापने का एक पैमाना है, सामान्य से करीब 83 फीसदी अधिक आंका गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस सीजन में बनने वाले तूफान असरदार हो सकते हैं।

चार दशकों के आंकड़ों पर आधारित है अनुमान

इसरो का यह अनुमान किसी अटकल पर नहीं, बल्कि ठोस वैज्ञानिक विश्लेषण पर टिका है। संस्थान ने यह पूर्वानुमान तैयार करने के लिए कई दशकों के समुद्री और वायुमंडलीय आंकड़ों का गहन अध्ययन किया है। इसके लिए करीब 40 वर्षों के मौसम और महासागरीय डेटा को खंगाला गया, ताकि उन परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझा जा सके जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के बनने और उनकी तीव्रता बढ़ने के पीछे जिम्मेदार होती हैं। इतने लंबे समय के डेटा के विश्लेषण से मिले नतीजे इस अनुमान को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत बनाते हैं।

भारतीय भूमि से टकराने पर अभी संशय बरकरार

मौसम विज्ञान में उत्तर हिंद महासागर के लिए अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के महीने पारंपरिक रूप से चक्रवातों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। बावजूद इसके, फिलहाल ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं मिला है जिससे यह पुख्ता तौर पर कहा जा सके कि अनुमानित तीनों चक्रवाती तूफान भारत की स्थलीय सीमा से सीधे टकराएंगे।

इसरो का यह पूर्वानुमान मुख्य रूप से समुद्री क्षेत्र में बढ़ने वाली चक्रवाती गतिविधियों पर केंद्रित है, न कि तटीय टकराव पर। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्र के भीतर चक्रवाती गतिविधि की तीव्रता बढ़ती है, तो एहतियात के तौर पर भारत के तटीय राज्यों के लिए सतर्क निगरानी और आपदा-प्रबंधन की तैयारियां पहले से मजबूत करना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से निपटा जा सके।