मध्य पूर्व युद्ध के असर से भारत में आर्थिक संकट गहराया, एलपीजी की कमी, शेयर बाजार में गिरावट और बेरोजगारी बढ़ी। अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए आम जनता पर बढ़ते बोझ और व्यवस्थागत विफलताओं को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।
Arvind Kejriwal on Modi Government: मध्य पूर्व में चल रहा तनाव अब सिर्फ उस इलाके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर दुनिया के कई देशों पर साफ दिखने लगा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। यहां आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर इसका असर महसूस किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल का कहना है कि सरकार इस संभावित संकट को पहले से भांपने में नाकाम रही। उनका आरोप है कि अगर समय रहते सही तैयारी की गई होती, तो आज देश को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब दुनिया को पहले से अंदेशा था कि हालात बिगड़ सकते हैं, तो फिर भारत सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम क्यों नहीं किए।
उन्होंने खास तौर पर आर्थिक हालात पर चिंता जताई। केजरीवाल के मुताबिक, शेयर बाजार में लगातार गिरावट आ रही है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ा है। कई छोटे व्यवसायों को नुकसान झेलना पड़ रहा है और कुछ जगहों पर कामकाज ठप होने की खबरें भी सामने आई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों को एलपीजी सिलेंडर की कमी से हो रही है। कई शहरों में लोगों को गैस सिलेंडर लेने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। गर्मी के इस मौसम में घंटों लाइन में लगना लोगों के लिए एक बड़ी मुश्किल बन गया है।
इसके अलावा, प्रवासी मजदूरों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। काम के अवसर कम होने से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, रुपये की गिरती कीमत ने महंगाई को और बढ़ा दिया है, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। केजरीवाल ने कहा कि हर बार संकट का भार आम जनता पर डाल दिया जाता है, जबकि जिम्मेदारी सरकार की होती है कि वह समय रहते तैयारी करे। उनका सवाल साफ है, आखिर आम लोग ही हर बार क्यों कीमत चुकाएं? कुल मिलाकर, मध्य पूर्व के हालात ने भारत के अंदर कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन परिस्थितियों से निपटने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।