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‘धर्म की आज़ादी खत्म करके UCC लागू नहीं कर सकते’, असदुद्दीन ओवैसी का बड़ा बयान

Asaduddin Owaisi's Statement: यूसीसी लागू करने पर असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा बयान दिया है। क्या कहा ओवैसी ने? आइए नज़र डालते हैं।
2 min read
Sep 15, 2026
Asaduddin Owaisi
असदुद्दीन ओवैसी (Photo - Video Screenshot from ANI)

एआईएमआईएम - ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM - All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) आज यूसीसी - यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC - Uniform Civil Code) के खिलाफ एक जनसभा में शामिल होने के लिए भोपाल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यूसीसी के लागू किए जाने के खिलाफ बात की।

"धर्म की आज़ादी खत्म करके लागू नहीं किया जा सकता"

ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यह प्रस्तावित कानून संविधान के कई प्रावधानों, जिनमें अनुच्छेद 25, 26, 14 और 29 शामिल हैं, के खिलाफ होगा। आप धर्म की आज़ादी को खत्म करके ऐसा कानून लागू नहीं कर सकते।"

अमित शाह और बीजेपी पर साधा निशाना

ओवैसी ने ये बातें अमित शाह (Amit Shah) और बीजेपी (BJP) पर निशाना साधते हुए कही। सोमवार को हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए भी ओवैसी ने शाह और बीजेपी पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि बीजेपी समानता के लिए यूसीसी नहीं ला रही है, बल्कि भारत के 18 करोड़ मुस्लिमों को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। ओवैसी ने पत्रकारों से कहा, "सबसे पहले आपको यह समझने की जरूरत है कि बीजेपी समानता के लिए यूसीसी नहीं ला रही है। उन्होंने अपने राज्यों और सरकारी स्तर पर यूसीसी सिर्फ भारत के 18 करोड़ मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए पेश किया है। ऐसा करके बीजेपी और अमित शाह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 (धर्म की आज़ादी), 14 (समानता का अधिकार), 26 और 29 का उल्लंघन कर रहे हैं। इसलिए किसी को पहले यह समझना चाहिए कि बीजेपी का यह कदम समानता के बारे में नहीं है बल्कि पूरी तरह से मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए है।"

अनेकता के महत्व पर दिया जोर

ओवैसी ने देश में अनेकता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि मोदी सरकार द्वारा गठित लॉ कमीशन ने पहले कहा था कि यूसीसी भारत के लिए न तो ज़रूरी है और न ही वांछनीय। ओवैसी ने कहा, "इस देश की आत्मा और भावना अनेकता है। अमित शाह, बीजेपी और आरएसएस गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश कर रहे हैं। खुद मोदी सरकार द्वारा गठित लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि यूसीसीए भारत के लिए न तो ज़रूरी है और न ही वांछनीय। यूसीसी का मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म से परे सभी नागरिकों के लिए पर्सनल कानूनों का एक समान सेट बनाना है। यह मुद्दा बीजेपी के मुख्य एजेंडे में रहा है और पार्टी अपने व्यापक कानूनी और सामाजिक सुधारों के हिस्से के तौर पर इसे लागू करने की वकालत करती रही है।"

Updated on:
15 Sept 2026 07:05 pm
Published on:
15 Sept 2026 07:05 pm
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