राष्ट्रीय

Bangladesh Election: चुनावी मामले में बहुत आगे, पर इन मोर्चों पर बांग्लादेश से बहुत पीछे भारत

2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा भारत कई मानकों पर बांग्लादेश से पिछड़ रहा है। विकसित राष्ट्र बनने के लिहाज से इन पैमानों पर मजबूत होना जरूरी है।

3 min read
Feb 12, 2026
नरेंद्र मोदी और मोहम्मद यूनुस की फ़ाइल फोटो। (सोर्स: एजेंसी)

बांग्लादेश में तख्तापलट के 18 महीने बाद चुनी हुई सरकार बनने जा रही है। इससे पहले वहां हुए एक दर्जन चुनावों में से चार को ही ‘पाक-साफ’ माना जाता है। बाकी हर चुनाव में पक्षपात के आरोप लगे और बहिष्कार हुआ। इस मामले में उसका रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है और उसे भारत से सीखने की जरूरत है। लेकिन, कई मोर्चों पर वह भारत के लिए नजीर भी पेश कर रहा है।

ये भी पढ़ें

Bangladesh Elections:हर दूसरी लड़की बालिका वधु, 25 फीसदी औरतें करतीं बेगारी- वोट से बदलेगा बांग्लादेश?

बांग्लादेश का चुनाव के मामले में खराब रिकॉर्ड

चुनाव वर्ष मुख्य पार्टी को मिलीं सीटेंदूसरे पक्ष को मिलीं सीटें चुनावी स्थिति
1973अवामी लीग (293)निर्दलीय (5)-
1979BNP (207)अवामी लीग (39)संस्थापक जियाउर रहमान राष्ट्रपति थे।
1986जातीय पार्टी (153)अवामी लीग (76)संस्थापक हुसैन मुहम्मद इरशाद राष्ट्रपति थे।
1988जातीय पार्टी (251)संयुक्त विपक्ष (19)अवामी लीग, BNP और अन्य द्वारा बहिष्कार।
1991BNP (140)अवामी लीग (88)स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव माना गया।
1996-IBNP (278)निर्दलीय (10)अधिकांश विपक्षी दलों द्वारा बहिष्कार।
1996-IIअवामी लीग (146)BNP (116)स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव।
2001BNP (195)अवामी लीग (58)स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव।
2008अवामी लीग (230)BNP (30)स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव।
2014अवामी लीग (234)जातीय पार्टी (34)BNP के नेतृत्व वाले 18-दली गठबंधन द्वारा बहिष्कार।
2018अवामी लीग (258)जातीय पार्टी (23)BNP द्वारा बहिष्कार।
2024अवामी लीग (224)निर्दलीय (62)BNP द्वारा बहिष्कार।

बांग्लादेश कहां दे रहा भारत को चुनौती

भारत में लोगों की ज़िंदगी औसतन 72 साल (जीवन प्रत्याशा या life expectancy) होती है, जबकी बांग्लादेश में यह 75 साल है। शिशु मृत्यु दर (infant mortality rate) के मामले में भी बांग्लादेश का रिकॉर्ड (24) भारत (25) से बेहतर है। इन मोर्चों पर बांग्लादेश काफी समय से अच्छा कर रहा है।

संकेतक (Indicator)बांग्लादेशभारतपाकिस्तान
जनसंख्या (मिलियन)1741,464240
जीडीपी (ट्रिलियन $)0.53.90.4
साक्षरता दर (%)798259
जीवन प्रत्याशा (life expectancy75 वर्ष72 वर्ष68 वर्ष
शिशु मृत्यु दर (प्रति 1000)242550
विदेशी मुद्रा भंडार (बिलियन $)2164318

भारत पीछे क्यों?

कई मामलों में आगे चल रहा और तेजी से विकास कर रहा भारत इन मामलों में पीछे क्यों है? प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने स्वाति नारायण की किताब Unequal: Why India lags behind its neighbours की भूमिका लिखते हुए इस मामले का जिक्र किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि शुरू में तो माना गया कि बांग्लादेश कोई तिकड़म कर रहा है, लेकिन दोनों देशों के आंकड़ों का अंतर बढ़ता ही गया। द्रेज ने एनजीओ और सरकारी स्वास्थ्य मशीनरी की अत्यधिक सक्रियता को इसका कारण बताया।

एनजीओ का बड़ा रोल

लैंसेट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में भी बताया गया था कि बांग्लादेश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में एनजीओ की अत्यधिक भागीदारी के चलते पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतों और टीबी जैसी बीमारी पर काबू पाने में जबर्दस्त कामयाबी मिली है।

जाति व्यवस्था बड़ी वजह

अर्थशास्त्री स्वामीनाथन अय्यर ने अपने एक लेख में बांग्लादेश के मुक़ाबले भारत के पिछड़ने की मुख्य वजह जाति व्यवस्था को बताया है। उनका तर्क है कि जाति के आधार पर किया जाने वाला भेदभाव कई स्तर पर (वर्ग/आय, लिंग, क्षेत्र आदि) भेदभाव को जन्म देता है। उनकी राय में यह समस्या बांग्लादेश में भी है, लेकिन भारत में उच्च जातियों का तमाम क्षेत्रों में दबदबा है। उनके इस दबदबे के चलते निचली जतियों के लोगों के लिए आगे बढ़ने के रास्ते काफी सिकुड़ जाते हैं।

यह इन आंकड़ों में भी देखा जा सकता है। भारत के पुरुषों को जो औसत वेतन मिलता है, वह महिलाओं की तुलना में 25 फीसदी ज्यादा है। भारत में एक फीसदी लोगों के पास देश की 40 फीसदी संपत्ति है। विश्व बैंक के मुताबिक यहां 2024 में कामकाजी आबादी में महिलाओं की भागीदारी महज 15 फीसदी (ग्लोबल एवरेज 49%) थी। बांग्लादेश में भी यह आंकड़ा इतना ही है। हालांकि भारत सरकार इसे 41 फीसदी से ज्यादा बताती है, लेकिन वह इनमें स्वरोजगार और बिना पैसे के काम में लगी महिलाओं को भी गिनती है। 2014 से 2024 के दौरान सबसे अमीर 10 फीसदी और सबसे गरीब 50 फीसदी लोगों की आय का अंतर लगभग बराबर ही रहा।

बांग्लादेश में नौकरीपेशा भारत से दोगुना

भारत में नौकरी करने वाले लोग एशिया और दुनिया के कई देशों से काफी कम हैं। यहां केवल 23 फीसदी लोग हैं, जो काम के बदले सैलरी पाते हैं। यह सैलरीड क्लास या वेतनभोगी बांग्लादेश में 46 फीसदी है। श्रीलंका में इनकी हिस्सेदारी 58 और चीन में 54 प्रतिशत है। दुनिया का औसत 52 फीसदी है।

देश के विकसित होने का एक पैमाना यह भी है। कामकाजी लोगों की कुशलता देश को आगे बढ़ाने में मदद करती है। जैसे-जैसे देश विकसित होता है, इनकी कुशलता भी बढ़ती जाती है। ऐसे में जैसे-जैसे देश विकसित होता है, वैसे-वैसे नौकरीपेशा लोगों की संख्या बढ़ती जाती है। अमेरिका (94), जर्मनी (91), जापान (89), ब्रिटेन (87) में नौकरीपेशा लोग 90 प्रतिशत के करीब हैं।

खेती में काम करने वालों की बात करें तो बांग्लादेश में 45 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जबकि भारत में 42 फीसदी हैं।
एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2000 में रोज 2.15 डॉलर की क्रय शक्ति रखने वाली आबादी का प्रतिशत बांग्लादेश में जहां मात्र 5 प्रतिशत था, वहीं भारत में यह 12.9 प्रतिशत था।

बांग्लादेश चुनाव 2026: एक नजर

क्या कितना/कब
कुल सीटें (जातीय संसद)350
निर्वाचित सीटें300
महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें50
बहुमत के लिए आवश्यक सीटें151
कुल उम्मीदवार1,981
पहली बार चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार1,518
युवा और 'जेन-जी' मतदाता (18-37 वर्ष)56 मिलियन (कुल का 44%)
मतगणना की शुरुआत12 फरवरी 2026, शाम 4 बजे से, नतीजे 13 फरवरी को
Published on:
12 Feb 2026 03:41 pm
Also Read
View All

अगली खबर