Calcutta High Court: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता हाईकोर्ट में दायर PIL में ECI द्वारा बड़े पैमाने पर किए गए प्रशासनिक तबादलों को चुनौती दी गई है।
Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रशासनिक फेरबदल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कोलकाता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा किए गए बड़े पैमाने पर तबादलों को चुनौती दी गई है। यह याचिका राज्य में अगले महीने प्रस्तावित दो-चरणीय विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दायर की गई है, जिससे राजनीतिक माहौल और भी ज्यादा गरमा गया है।
याचिकाकर्ता अर्का नाग की ओर से सीनियर वकील और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने यह PIL दाखिल की है। याचिका में चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद पश्चिम बंगाल कैडर के नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के तबादलों पर सवाल उठाए गए हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच के समक्ष होनी है।
याचिका में विशेष रूप से प्रशासन और पुलिस विभाग के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों के तबादलों का विरोध किया गया है, जिनमें मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था), कोलकाता पुलिस आयुक्त शामिल है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर उच्च स्तर के अधिकारियों का तबादला प्रशासनिक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
PIL में भारत निर्वाचन आयोग के उस अधिकार को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत सामान्य और पुलिस प्रशासन में शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक व्यापक स्तर पर फेरबदल किए गए हैं। साथ ही, कुछ अधिकारियों जैसे पूर्व राज्य गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को अन्य चुनावी राज्यों में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने पर भी आपत्ति जताई गई है।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर तबादले केवल पश्चिम बंगाल में किए गए हैं, जबकि अन्य चुनावी राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में ऐसा नहीं देखा गया। इसे असमान और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई बताया गया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को दो पत्र लिखकर इस मुद्दे पर आपत्ति दर्ज करा चुकी हैं। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि आयोग के फैसले पक्षपातपूर्ण, जल्दबाजी में लिए गए और एकतरफा हैं। CM ने आरोप लगाया कि इस तरह के कदम एक निर्वाचित राज्य सरकार के अधिकारों को असंवैधानिक रूप से कमजोर करते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव से पहले राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है। अब सभी की निगाहें कोलकाता उच्च न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस संवेदनशील मुद्दे पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।